Bakrid 2026: भारत में इस दिन मनाई जाएगी बकरीद, क्या आप जानते हैं मुसलमान साल में कितने प्रकार की मनाते हैं ईद
जैसे-जैसे जून का महीना करीब आ रहा है, वैसे-वैसे घरों, बाजारों और सोशल मीडिया पर बकरीद के त्योहार को लेकर रौनक और चर्चाएं तेज हो गई हैं। आमतौर पर लोग ईद-उल-फितर और ईद-उल-अधा (बकरीद) के बारे में ही सबसे ज्यादा जानते हैं, क्योंकि ये दुनिया भर में बेहद धूमधाम से मनाए जाने वाले दो सबसे बड़े इस्लामी त्योहार हैं। लेकिन हर साल इस त्योहार के आते ही इंटरनेट पर एक सवाल बहुत ज्यादा सर्च किया जाता है कि मुसलमान वास्तव में कितने प्रकार की ईद मनाते हैं? अमूमन लोग मानते हैं कि इस्लाम में केवल दो ही ईद होती हैं, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो कई मुसलमान एक तीसरी महत्वपूर्ण ईद भी मनाते हैं। इन सभी त्योहारों का अपना अलग महत्व और इतिहास है।
भारत में कब है बकरीद? नोट कर लें सही तारीख
इस साल भारत में ईद-उल-अधा या बकरीद 28 मई 2026 को मनाई जाएगी। वहीं दूसरी ओर, सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों में यह पवित्र त्योहार एक दिन पहले यानी 27 मई 2026 को मनाए जाने की उम्मीद है। बकरीद को इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से त्याग, अटूट आस्था और दान-पुण्य की भावना से जुड़ा हुआ है।
1. ईद-उल-फितर: रमजान के पाक महीने के खत्म होने का जश्न
इस्लाम में सबसे पहली और व्यापक रूप से मनाई जाने वाली ईद 'ईद-उल-फितर' है। भारत और उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में लोग इसे आम बोलचाल की भाषा में "मीठी ईद" या "सेवइयां वाली ईद" के नाम से भी जानते हैं। इस त्योहार का सीधा संबंध रमजान के पवित्र महीने से है। मुसलमान पूरे एक महीने के कड़े रोजे (उपवास) रखने के बाद, शव्वाल का चांद दिखने पर इस ईद को मनाते हैं। इस खास दिन सुबह ईदगाह में विशेष नमाज अदा की जाती है, गरीबों को 'फितरा' (दान) दिया जाता है और लोग एक-दूसरे के गले मिलकर गिले-शिकवे दूर करते हैं। घरों में तरह-तरह के मीठे व्यंजन और सेवइयां बनाई जाती हैं।
2. ईद-उल-अधा: कुर्बानी और हज की मुकद्दस रिवायत
दूसरी प्रमुख ईद 'ईद-उल-अधा' है, जिसे भारत में 'बकरीद' कहा जाता है। यह त्योहार इस्लामी कैलेंडर (हिजरी सन) के आखिरी महीने 'जिल हज्ज' की 10 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान अल्लाह की राह में पशु की कुर्बानी देते हैं। यह ऐतिहासिक प्रथा हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की महान कहानी से जुड़ी हुई है।
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा था। हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म पर अपने लाडले बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया। लेकिन जैसे ही उन्होंने छुरी चलाई, अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक दुंबे (मेमने) को भेज दिया। अल्लाह को उनकी यह अदा इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे कयामत तक के लिए इबादत बना दिया। बकरीद का यह जश्न तीन दिनों तक चलता है। यह त्योहार मक्का की पवित्र वार्षिक तीर्थयात्रा 'हज' के पूरा होने से भी जुड़ा है।
3. ईद मिलाद-उन-नबी: पैगंबर मोहम्मद साहब का यौम-ए-पैदाइश
इन दोनों ईदों के अलावा, मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग 'ईद मिलाद-उन-नबी' भी मनाता है। यह दिन इस्लाम के आखिरी पैगंबर, हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के तरीके दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न हैं। कुछ लोग इस दिन को मस्जिदों और घरों में शांतिपूर्वक इबादत और दुआएं करके बिताते हैं, तो कई जगहों पर बड़े-बड़े जुलूस, रैलियां और धार्मिक सभाएं आयोजित की जाती हैं, जहां पैगंबर साहब की शिक्षाओं और उनके शांति के संदेश पर चर्चा होती है। इस मौके पर गरीबों को खाना खिलाना और दान देना बेहद सवाब (पुण्य) का काम माना जाता है। हालांकि, कुछ मुस्लिम समुदायों का मानना है कि इस्लाम में पारंपरिक रूप से जन्मदिन मनाने का रिवाज नहीं है, इसलिए वे इसे सिर्फ सादगी से याद करने तक महदूद रखते हैं।
क्या होता है 'ईद' शब्द का असली और गहरा अर्थ?
अरबी भाषा में 'ईद' शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है— ऐसा उत्सव या खुशी जो बार-बार लौटकर आए। लेकिन आध्यात्मिक रूप से देखें तो ईद का मतलब सिर्फ सजने-धजने, लजीज पकवान खाने या छुट्टियों तक सीमित नहीं है। यह त्योहार समाज के हर तबके को एक साथ लाने, आपसी भाईचारा बढ़ाने, गरीबों की मदद करने और अपनी संकीर्णताओं का त्याग कर मानवता की सेवा करने का एक पवित्र जरिया है