दोपहर 1:31 बजे का मुख्य मुहूर्त छूट गया? परेशान न हों, जानें दिनभर में बप्पा की स्थापना के शुभ चौघड़िया विकल्प

दोपहर 1:31 बजे का मुख्य मुहूर्त छूट गया? परेशान न हों, जानें दिनभर में बप्पा की स्थापना के शुभ चौघड़िया विकल्प

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर देशभर में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पंचांगीय गणना के अनुसार आज 14 सितंबर 2026 को गणपति बप्पा की स्थापना और पूजन का मुख्य मध्याह्न काल मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक ही था। ऐसे में कई श्रद्धालु, जो किसी व्यस्तता, यात्रा, प्रतिमा लाने में हुई देरी या अन्य कारणों से इस निर्धारित समयावधि में प्रतिमा स्थापित नहीं कर पाए, उनके मन में यह संशय है कि क्या अब आज बप्पा की स्थापना हो सकती है? धर्मशास्त्रों और वैदिक पंचांग के अनुसार निराश होने की आवश्यकता नहीं है; मुख्य काल बीत जाने के बाद भी दिन और संध्याकाल में कई शुभ चौघड़िया और मांगलिक योग उपलब्ध हैं जिनमें बप्पा की स्थापना पूर्ण श्रद्धा के साथ की जा सकती है।

मुख्य मुहूर्त छूटने के बाद दिनभर में बप्पा की स्थापना के शुभ समय

सनातन धर्म परंपरा में मध्याह्न काल को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि भगवान गणेश का अवतरण दोपहर में हुआ था। परंतु यदि यह समय चूक जाता है, तो पंचांग के शुभ चौघड़िया और गोधूलि वेला में प्राण-प्रतिष्ठा की जा सकती है। आज दोपहर और शाम के शेष शुभ समय इस प्रकार हैं:

  • शुभ चौघड़िया (दोपहर): दोपहर 01:48 बजे से 03:20 बजे तक (यह समय किसी भी नए अनुष्ठान और देव स्थापना के लिए अत्यंत मंगलकारी है)।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:21 बजे से 03:11 बजे तक (इस काल में किए गए कार्य में सर्वत्र विजय और सिद्धि मिलती है)।

  • गोधूलि मुहूर्त (संध्याकाल): शाम 06:26 बजे से 06:50 बजे तक (सूर्यास्त के समय की यह वेला सभी प्रकार के दोषों का शमन करती है)।

  • अमृत चौघड़िया (सायंकाल): शाम 04:52 बजे से 06:24 बजे तक (इस समयावधि में भी बप्पा का गृह प्रवेश और स्थापना अनुष्ठान संपन्न किया जा सकता है)।

विलंब से स्थापना करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

यदि आप मुख्य मध्याह्न मुहूर्त के बाद प्रतिमा स्थापित करने जा रहे हैं, तो कुछ शास्त्रीय नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:

  • राहुकाल की चिंता नहीं: आज सोमवार का राहुकाल सुबह 07:38 बजे से 09:11 बजे तक था, जो पहले ही बीत चुका है। अतः दोपहर और शाम के शुभ चौघड़िया में राहुकाल का कोई व्यवधान नहीं है।

  • शुद्ध भाव से क्षमा प्रार्थना: पूजा के आरंभ में हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान गजानन से समय पर स्थापना न कर पाने के लिए क्षमा याचना करें और कहें कि "हे प्रभु, मैं अपनी असमर्थता के लिए क्षमाप्रार्थी हूं, कृपया मेरे इस भावपूर्ण आतिथ्य को स्वीकार करें।"

  • चंद्र दर्शन निषेध का कड़ा ध्यान रखें: गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखना वर्जित माना गया है। आज रात 08:52 बजे चंद्रास्त होगा, इसलिए शाम के समय पूजा करते हुए या घर से बाहर निकलते समय आकाश में चंद्रमा की ओर देखने से पूरी तरह बचें।

बाद के मुहूर्त में गणेश स्थापना की सरल विधि

घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की साफ चौकी लगाएं। उस पर नया लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। चौकी के एक कोने पर तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें, जिसमें गंगाजल युक्त शुद्ध जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें।

चौकी के मध्य में अक्षत का अष्टदल कमल बनाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद प्रतिमा पर गंगाजल और पंचामृत के छींटे देकर प्रतीकात्मक स्नान कराएं। बप्पा को रोली, चंदन, हल्दी, सिंदूर, जनेऊ और कलावा रूपी वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद उनकी सबसे प्रिय 21 दूर्वा दल की गांठें और लाल गुड़हल या गेंदे के फूल अर्पित करें। मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं, धूप-दीप प्रज्वलित करें और "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करते हुए पूरे परिवार के साथ कर्पूर से आरती करें।