सावन में कैसे कराएं शिव-पार्वती का गठबंधन? जानें सही विधि, नियम, पूजन सामग्री और इसके अचूक फायदे, पूरी होगी हर मनोकामना

सावन में कैसे कराएं शिव-पार्वती का गठबंधन? जानें सही विधि, नियम, पूजन सामग्री और इसके अचूक फायदे, पूरी होगी हर मनोकामना

सावन के पावन महीने में शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस पवित्र मास में महादेव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसी कड़ी में 'शिव-पार्वती गठबंधन' एक ऐसा अचूक और प्रभावशाली उपाय है, जो प्रेम, समर्पण और शिव-शक्ति के महामिलन का प्रतीक है। अगर आप भी महादेव की कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन में विधि-विधान से शिव-पार्वती का गठबंधन जरूर करें। आइए जानते हैं इस खास अनुष्ठान की सही विधि और नियम।

शिव-पार्वती गठबंधन का खास महत्व और फायदे

सनातन धर्म में शिव और शक्ति के इस गठबंधन को बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यह गठबंधन कराता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है, साथ ही संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। वहीं, अगर विवाह योग्य कुंवारी कन्याएं यह गठबंधन करती हैं, तो उनके विवाह में आ रही सारी अड़चनें दूर होती हैं और उन्हें मनचाहा एवं सुयोग्य वर प्राप्त होता है।

गठबंधन के लिए जरूरी पूजन सामग्री

अनुष्ठान शुरू करने से पहले आपके पास सही पूजन सामग्री होनी चाहिए। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

भगवान शिव और माता पार्वती का विग्रह (मूर्ति) या शिवलिंग, कलावा (मौली) या कच्चा सूत, शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन, धूप, अगरबत्ती, रोली, कपूर, तांबे का लोटा, ताजे फूल, फल, सुहाग की सामग्री और मिठाई।

शिव-पार्वती गठबंधन की सही विधि और नियम

इस अनुष्ठान को करते समय कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है:

  • विग्रह का चुनाव: गठबंधन कभी भी तस्वीर (फोटो) के साथ नहीं किया जाता है। इसके लिए हमेशा शिवलिंग और माता पार्वती के विग्रह (मूर्ति) का ही उपयोग करें। यदि मूर्ति न हो, तो आप शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती बनाकर भी यह अनुष्ठान कर सकते हैं।

  • शेषनाग को न करें शामिल: भगवान शिव के गले में लिपटे शेषनाग को श्री हरि नारायण का स्वरूप माना गया है। इसलिए ध्यान रखें कि गठबंधन करते समय कलावा शेषनाग के ऊपर से न जाए।

  • कहां से करें शुरुआत: गठबंधन हमेशा भगवान शिव की तरफ से शुरू करना चाहिए। मौली या कच्चे सूत से शिव जी और माता पार्वती के चारों ओर पूरे सात फेरे (चक्कर) लगाएं।

  • मंत्र जाप: फेरे लगाते समय मन ही मन पूरी श्रद्धा के साथ महादेव के पंचाक्षरी मंत्र 'ऊं नम: शिवाय' का निरंतर जाप करते रहें।

  • इस बात का रखें खास ध्यान: गठबंधन करते समय सूत या कलावा बीच में कटना या टूटना नहीं चाहिए और न ही यह कम पड़ना चाहिए। इसलिए धागा पर्याप्त मात्रा में लें।

गठबंधन से पहले महादेव का पंचामृत या गंगाजल से अभिषेक जरूर करें और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इस विधि से की गई पूजा भगवान शिव और माता पार्वती शीघ्र स्वीकार करते हैं।