Nirjala Ekadashi 2026: मलमास के फेर में उलझा निर्जला एकादशी का गणित! जानें ज्येष्ठ महीने की नहीं बल्कि अधिकमास की कौन सी 2 एकादशियां आ रही हैं पहले
हिंदू कैलेंडर में इस बार तिथियों और महीनों का एक बेहद अनोखा संयोग बन रहा है, जिसने आम व्रतियों और श्रद्धालुओं को थोड़ी उलझन में डाल दिया है। अगर आप भी यही मानकर चल रहे हैं कि अपरा एकादशी के ठीक बाद ज्येष्ठ मास की प्रसिद्ध 'निर्जला एकादशी' आने वाली है, तो आप पूरी तरह सही नहीं हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 17 जून से एक महीने के लिए मलमास (जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) शुरू होने जा रहा है। इस वजह से व्रतों के क्रम में बड़ा बदलाव आया है। इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु की पूजा, जप-तप और दान का फल अनंत गुना हो जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बार निर्जला एकादशी वास्तव में कब है और मलमास के दौरान आने वाली दो विशेष एकादशियां कौन सी हैं।
सबसे पहले दूर करें कंफ्यूजन, जानिए साल की सबसे बड़ी 'निर्जला एकादशी' की सही तारीख
पद्मपुराण के अनुसार, निर्जला एकादशी को साल भर की सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस एक एकादशी का पूरी निष्ठा से व्रत रख लेता है, उसे वर्ष भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त हो जाता है। ज्येष्ठ मास में जब सूर्य देव वृष राशि पर होते हैं और उसके बाद जब मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, उस दौरान आने वाली एकादशी पर बिना जल ग्रहण किए यानी निर्जल व्रत रखने का विधान है। व्रती केवल कुल्ला या आचमन करने के लिए ही मुख में जल डाल सकता है। एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन (द्वादशी) के सूर्योदय तक जल का पूरी तरह त्याग करना होता है। इस साल यह महाव्रत 24 जून को रखा जाएगा।
मलमास में आ रही हैं 'कमला' और 'कामदा' एकादशी, हर साल नहीं मिलता यह मौका
मलमास या अधिकमास का सनातन धर्म में बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है और इसका विस्तृत वर्णन पद्मपुराण में भी मिलता है। यह महीना चूंकि हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इसमें पड़ने वाली एकादशियां भी विशेष होती हैं। अधिकमास के दौरान आने वाली इन दो एकादशियों को 'कमला एकादशी' और 'कामदा एकादशी' के नाम से जाना जाता है।
तारीखों की बात करें तो इस साल कमला एकादशी का व्रत 27 मई को रखा जाएगा। तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 05:10 बजे से हो जाएगी, जो अगले दिन 27 मई को सुबह 06:21 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी युक्त तिथि होने के कारण 27 मई को ही यह व्रत रखना शास्त्रसम्मत होगा। वहीं, इसके बाद आने वाली दूसरी एकादशी यानी कामदा एकादशी का व्रत 11 जून को किया जाएगा।
साक्षात महालक्ष्मी की कृपा बरसाती हैं पुरुषोत्तम मास की ये एकादशियां, जानें महत्व
पद्मपुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अधिकमास के आने पर जो एकादशी कृष्ण पक्ष में होती है, वह 'कमला' नाम से जगत में प्रसिद्ध है। इसे सभी तिथियों में उत्तम और सर्वोत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और नियमों का पालन करने से धन की देवी माता लक्ष्मी बेहद प्रसन्न और अनुकूल होती हैं, जिससे जातक के जीवन से दरिद्रता का नाश होता है।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान पुरुषोत्तम (श्री हरि विष्णु) का स्मरण करना चाहिए और विधि-विधान से स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शास्त्रों में इस दिन किए जाने वाले मानसिक जप के फल की महिमा गाते हुए बताया गया है कि घर पर जप करने से एक गुना, नदी के तट पर करने से दोगुना, गोशाला में करने से हजार गुना, जबकि पवित्र तीर्थों में, देवताओं के विग्रह के सामने या तुलसी जी के समीप करने से लाख गुना फल मिलता है। सबसे बढ़कर, यदि भगवान विष्णु के साक्षात सानिध्य या उनके मंदिर में जप किया जाए, तो उसका फल अनंत गुना हो जाता है।