योगिनी एकादशी व्रत का पारण 10 या 11 जुलाई कब करें? नोट कर लें सबसे सटीक शुभ मुहूर्त और नियम
सनातन धर्म में जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2026) का पावन व्रत शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से तीन जन्मों के अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि व आरोग्यता की प्राप्ति होती है। हालांकि, हिंदू धर्मशास्त्रों में यह स्पष्ट उल्लेख है कि एकादशी व्रत का पूर्ण और वास्तविक पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब व्रत की समाप्ति यानी पारण (Vrat Parana) बिल्कुल सही तिथि, सटीक समय और शास्त्रोक्त नियमों के तहत किया जाए। तिथि के फेर के कारण कई श्रद्धालुओं के मन में संशय है कि व्रत कब और किस समय खोलना शास्त्र सम्मत होगा।
जानिए कब शुरू होगी द्वादशी तिथि: पंचांग के अनुसार समय का गणित
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष योगिनी एकादशी तिथि की शुरुआत शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर हो रही है, जबकि इस तिथि का समापन शनिवार, 11 जुलाई 2026 को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि की समाप्ति के ठीक बाद सूर्योदय के समय ही द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत हमेशा द्वादशी तिथि में ही खोला जाता है, इसलिए व्रत खोलने की सही तारीख शनिवार, 11 जुलाई 2026 ही होगी। लेकिन द्वादशी लगते ही तुरंत भोजन ग्रहण करना वर्जित माना गया है, क्योंकि इस दौरान 'हरिवासर' की अवधि प्रभावी रहती है।
क्या है हरिवासर और मध्याह्न काल? भूलकर भी इस समय न खोलें अपना व्रत
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण कभी भी मनमाने समय पर नहीं किया जा सकता। द्वादशी तिथि का शुरुआती एक-चौथाई (1/4) भाग 'हरिवासर' (Hari Vasar) कहलाता है। यह समय पूर्णतः भगवान विष्णु की सूक्ष्म आराधना के लिए आरक्षित होता है और इस काल में अन्न ग्रहण करना महापाप के समान माना गया है। पंचांग के अनुसार, 11 जुलाई को हरिवासर की अवधि सुबह 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा, शास्त्रों में मध्याह्न काल (दोपहर के मुख्य समय) में भी व्रत खोलने की सख्त मनाही है। यही कारण है कि सुबह के समय पारण का योग नहीं बन पा रहा है।
नोट कर लें 11 जुलाई को पारण का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त
इन सभी शास्त्रोक्त वर्जनाओं और काल गणनाओं को ध्यान में रखते हुए ज्योतिषविदों ने योगिनी एकादशी व्रत के पारण का सबसे श्रेष्ठ और दोषमुक्त समय दोपहर के बाद निर्धारित किया है। शनिवार, 11 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होगा, जो शाम को 04 बजकर 36 मिनट तक मान्य रहेगा। सभी श्रद्धालुओं को इसी समयावधि के भीतर सात्विक अन्न ग्रहण करके अपना व्रत पूर्ण करना चाहिए, जिससे व्रत का पूरा लाभ मिल सके।
पारण के दिन क्यों जरूरी है चावल खाना? जानिए इसके पीछे का शास्त्रीय नियम
शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल (Rice) खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है, लेकिन इसके ठीक विपरीत द्वादशी यानी पारण के दिन भोजन में चावल का शामिल होना अनिवार्य है। मान्यता है कि पारण के समय चावल खाने से ही एकादशी का व्रत पूर्ण माना जाता है। व्रत खोलने की सही विधि यह है कि पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की षोडशोपचार पूजा करें। प्रभु को घी का दीपक जलाएं, पीले फूल, फल और विशेष रूप से तुलसी दल (Tulsidal) युक्त सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र और धन का दान-दक्षिणा दें।
इन गलतियों से बचें: पारण के दिन भूलकर भी न करें ये काम
व्रत के समापन के दिन कुछ विशेष सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक हैं। पारण हमेशा सात्विक भोजन, शुद्ध जल या फल के साथ ही करना चाहिए। इस दिन भूलकर भी लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन का सेवन न करें। साथ ही, मन में किसी भी प्रकार का क्रोध, ईर्ष्या, कटु वचन या पारिवारिक विवाद करने से बचें, अन्यथा व्रत से मिलने वाले पुण्य प्रभाव नष्ट हो सकते हैं।