वेस्टइंडीज सीरीज के बीच भुवनेश्वर कुमार की 'पैराशूट एंट्री'? डेथ ओवर्स और नई गेंद के संकट से बढ़ी टीम इंडिया की टेंशन

वेस्टइंडीज सीरीज के बीच भुवनेश्वर कुमार की 'पैराशूट एंट्री'? डेथ ओवर्स और नई गेंद के संकट से बढ़ी टीम इंडिया की टेंशन

वेस्टइंडीज के खिलाफ चल रही टी-20 और सीमित ओवरों की सीरीज के दौरान टीम इंडिया के गेंदबाजी खेमे में अचानक खतरे की घंटी बजती दिखाई दे रही है। कैरेबियाई बल्लेबाजों के आक्रामक तेवर, पावरप्ले में रन लुटाने की मजबूरी और डेथ ओवर्स में नियमित यॉर्कर की कमी ने भारतीय टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। प्रमुख तेज गेंदबाजों के वर्कलोड मैनेजमेंट और कई युवा गेंदबाजों की अनियंत्रित गेंदबाजी के चलते क्रिकेट गलियारों में यह सवाल तेजी से गूंजने लगा है कि क्या अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की राष्ट्रीय टीम में एक बार फिर 'पैराशूट लैंडिंग' कराई जा सकती है? सोशल मीडिया से लेकर खेल जानकारों के बीच इस बात की जोरदार चर्चा है कि जब भी टीम इंडिया का गेंदबाजी संतुलन डगमगाता है, अनुभव की तलाश सीधे 36 वर्षीय इस दिग्गज स्विंग गेंदबाज पर जाकर ठहरती है।

आखिर क्यों बढ़ी है टीम इंडिया और हेड कोच की टेंशन?

वेस्टइंडीज जैसी विस्फोटक टी-20 टीम के खिलाफ भारत की मौजूदा तेज गेंदबाजी लाइन-अप कई मोर्चों पर संघर्ष करती नजर आई है। नई गेंद से शुरुआती दो-तीन ओवरों में विकेट न निकाल पाना और पारी के 17वें से 20वें ओवर के बीच भारी रन खर्च करना टीम इंडिया की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ है। युवा गेंदबाजों के पास गति तो है, लेकिन वेस्टइंडीज के लंबे-लंबे छक्के लगाने वाले पावर-हिटर्स के सामने लाइन-लेंथ का अनुशासन गायब दिखा है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट को पावरप्ले में गेंद को दोनों तरफ लहराने वाले और अंतिम ओवरों में सटीक नक्कल बॉल फेंकने वाले एक बेहद चतुर और शांत दिमाग वाले गेंदबाज की कमी साफ खल रही है। यही कारण है कि आगामी बहुपक्षीय दौरों और आईसीसी टूर्नामेंट्स की दीर्घकालिक तैयारी को देखते हुए भुवनेश्वर के नाम पर फिर से गहन मंथन शुरू हो गया है।

आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में भुवी का धमाकेदार प्रदर्शन बना वापसी का आधार

भुवनेश्वर कुमार को टीम में शामिल किए जाने की बातें सिर्फ अटकलों पर नहीं टिकी हैं, बल्कि इसके पीछे उनका हालिया जबरदस्त फॉर्म है। आईपीएल और घरेलू टूर्नामेंट्स में उन्होंने लगातार साबित किया है कि उम्र केवल एक आंकड़ा है। नई गेंद से बल्लेबाजों को छकाने की उनकी स्वाभाविक कला आज भी वैसी ही धारदार है जैसी उनके डेब्यू के समय थी। विशेष रूप से दबाव भरे मैचों में 7 रन प्रति ओवर से कम की इकोनॉमी रेट बनाए रखना और बड़े फिनिशर्स को खामोश रखना उनकी सबसे बड़ी यूएसपी रही है। क्रिकेट समीक्षकों का मानना है कि यदि चयनकर्ता किसी युवा खिलाड़ी की चोट या खराब फॉर्म के विकल्प के रूप में सीधे किसी अनुभवी मैच विनर को मैदान में उतारना चाहते हैं, तो भुवनेश्वर से बेहतर और भरोसेमंद नाम फिलहाल भारतीय घरेलू सर्किट में दूसरा कोई नहीं है।

क्या चयनकर्ता उठाएंगे जोखिम? युवा बनाम अनुभव का बड़ा द्वंद्व

हालांकि भुवनेश्वर की अचानक 'पैराशूट एंट्री' की राह में चयन समिति के सामने एक बड़ा असमंजस भी है। भारतीय क्रिकेट पिछले कुछ समय से टी-20 और वनडे फॉर्मेट में युवाओं को ग्रूम करने की नीति पर काम कर रहा है। ऐसे में लगभग चार साल बाद किसी सीनियर खिलाड़ी को सीधे बड़े मैच में वापस लाना युवाओं के आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है। लेकिन जानकारों का तर्क है कि जब द्विपक्षीय सीरीज में ट्रॉफी और टीम का संतुलन दांव पर हो, तो प्रयोगों की जगह परिणाम देने वाले गेंदबाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि मौजूदा सीरीज के अंतिम मुकाबलों में भी भारतीय तेज गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहते हैं, तो बीसीसीआई और चयन समिति भुवनेश्वर कुमार के अनुभव को भुनाने के लिए किसी भी समय बड़ा फैसला ले सकती है, जिसने विरोधी खेमों के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम में भी हलचल बढ़ा दी है।