संजय मांजरेकर ने ICC और BCCI को लगाई कड़ी फटकार: यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी पर सख्त एक्शन न होने से भड़के
भारतीय क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों का मैदान पर बढ़ता आक्रामक तेवर अब क्रिकेट पंडितों के बीच गंभीर बहस का मुद्दा बन चुका है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और जाने-माने विश्लेषक संजय मांजरेकर ने स्टार सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और उभरते युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के मैदान पर किए गए आचरण के खिलाफ सख्त रुख न अपनाए जाने पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) दोनों को आड़े हाथों लिया है। मांजरेकर का साफ कहना है कि युवा सितारों द्वारा मैदान पर दिखाई जाने वाली अनुशासनहीनता को यदि समय रहते नहीं रोका गया, तो यह पूरे भारतीय क्रिकेट के अनुशासन ढांचे को नुकसान पहुंचाएगा। दोनों क्रिकेट निकायों की लचर कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मामूली जुर्माना या केवल चेतावनी देना समाधान नहीं है।
संजय मांजरेकर का कड़ा रुख और क्रिकेटिंग अनुशासन पर सवाल
संजय मांजरेकर ने मैच समीक्षा के दौरान इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि क्रिकेट की सर्वोच्च संस्थाएं उभरते सितारों की गलतियों को नजरअंदाज कर रही हैं। मांजरेकर के अनुसार, जब कोई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच या प्रतिस्पर्धी घरेलू मुकाबलों में सीमा लांघता है, तो उसे स्टारडम के आधार पर छूट नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे बेहद प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को यह संदेश जाना आवश्यक है कि खेल हमेशा खिलाड़ी से बड़ा होता है। मांजरेकर ने तर्क दिया कि यदि युवावस्था में ही खिलाड़ियों को यह समझ नहीं दिया गया कि आक्रामकता और अनुशासनहीनता के बीच एक बहुत पतली लकीर होती है, तो आगे चलकर यह उनके पेशेवर रवैये को हमेशा के लिए बिगाड़ सकता है।
यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी से जुड़ा विवाद क्या है?
यशस्वी जायसवाल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, जबकि बिहार के समस्तीपुर से ताल्लुक रखने वाले युवा वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 और आईपीएल ऑक्शन में सबसे कम उम्र में इतिहास रचकर सबका ध्यान खींचा है। हालांकि, हाल के मैचों में दोनों खिलाड़ियों द्वारा विरोधी टीम के गेंदबाजों और अंपायरों के प्रति जरूरत से ज्यादा आक्रामक सेंड-ऑफ और असंतोष जताने की घटनाएं सामने आईं। यशस्वी जायसवाल पहले भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अत्यधिक आक्रामक जश्न या नोकझोंक के कारण चर्चा में रहे हैं, वहीं वैभव सूर्यवंशी के जूनियर स्तर के मुकाबलों में मैदान पर दिखाए गए तेवर पर भी जानकारों की नजर पड़ी। मांजरेकर का मानना है कि इन दोनों खिलाड़ियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन खेल की मर्यादा बनाए रखना भी उनकी ही जिम्मेदारी है।
ICC और BCCI की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
संजय मांजरेकर ने आईसीसी और बीसीसीआई की मौजूदा आचार संहिता प्रणाली की विफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि मैच फीस का 10 या 20 प्रतिशत काटना आज के करोड़पति क्रिकेटरों के लिए कोई सजा नहीं है। आईपीएल युग में युवा खिलाड़ियों के पास भारी वित्तीय सुरक्षा है, जिसके कारण छोटे जुर्माने उनके व्यवहार को बदलने में पूरी तरह अप्रभावी साबित होते हैं। मांजरेकर ने प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जब तक सीधे एक या दो मैचों का प्रतिबंध (बैन) नहीं लगाया जाएगा और डिमेरिट अंकों को गंभीरता से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक खिलाड़ी इसे एक सामान्य बात समझकर दोहराते रहेंगे। उन्होंने बोर्ड पर सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों को केवल टीआरपी और रोमांच से मतलब है या वे क्रिकेट के मूल मूल्यों की रक्षा करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।
खेल भावना बनाम आक्रामकता: आधुनिक क्रिकेट की नई बहस
आधुनिक क्रिकेट में एग्रेशन यानी आक्रामकता को सकारात्मक गुण माना जाता है, लेकिन मांजरेकर ने साफ किया कि आक्रामकता का प्रदर्शन बल्ले या गेंद से होना चाहिए, न कि अनियंत्रित जुबानी जंग और उकसावे वाले इशारों से। विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने भी आक्रामकता को अपनाया, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी आक्रामकता को टीम की जीत के जुनून में तब्दील किया। दूसरी ओर, जब शुरुआती करियर में ही खिलाड़ी विरोधी का अनादर करने लगें, तो वह खेल भावना (स्पिरिट ऑफ क्रिकेट) के खिलाफ जाता है। भारत में करोड़ों युवा इन खिलाड़ियों को टेलीविजन और डिजिटल मीडिया पर देखकर अपना आदर्श मानते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की हर हरकत का समाज और जूनियर क्रिकेटरों पर सीधा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
युवा खिलाड़ियों के मेंटॉरशिप और ग्रूमिंग की जरूरत
मांजरेकर ने भारतीय टीम मैनेजमेंट, राहुल द्रविड़ जैसे पूर्व दिग्गजों द्वारा स्थापित कल्चर और नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के तंत्र से भी यह अपेक्षा जताई कि वे केवल तकनीकी कौशल पर ध्यान देने के बजाय खिलाड़ियों की मेंटल कंडिशनिंग और बिहेवियरल ट्रेनिंग पर भी जोर दें। आईपीएल फ्रेंचाइजीज को भी अपनी टीमों में खेल आचरण विशेषज्ञों को शामिल करना चाहिए। सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी जैसे महान क्रिकेटरों का उदाहरण देते हुए मांजरेकर ने कहा कि दुनिया ने उनका सम्मान केवल उनके शतकों के लिए नहीं, बल्कि मैदान पर उनके बेमिसाल संयम और शालीनता के लिए किया था। यदि यशस्वी और वैभव जैसे असाधारण युवाओं को यह सीख समय पर नहीं दी गई, तो वे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने से पहले ही विवादों में उलझ कर रह जाएंगे।
भविष्य के लिए सख्त नीति और स्पष्ट संदेश
संजय मांजरेकर की इस कड़ी फटकार को क्रिकेट विशेषज्ञों ने एक जरूरी वेक-अप कॉल करार दिया है। बीसीसीआई और आईसीसी को अब अपनी दंड नीतियों को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है ताकि कोई भी खिलाड़ी नियम तोड़ने से पहले दो बार सोचे। निष्पक्ष अंपायरिंग, खेल का सम्मान और विरोधी टीम के प्रति आदर ही क्रिकेट को दुनिया का सबसे लोकप्रिय और सम्मानित खेल बनाते हैं। यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी दोनों के पास विश्व क्रिकेट के शीर्ष पर पहुंचने का सुनहरा मौका है, और उन्हें इस विवाद से सबक लेते हुए अपनी ऊर्जा को पूरी तरह से रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन में लगाना चाहिए।