यूपी में कुशीनगर समेत 6 एयरपोर्ट बंद, जेवर और हिंडन से क्यों घट गईं उड़ानें? जानिए सरकार का नया प्लान और क्या हैं इसके पीछे की बड़ी वजहें
उत्तर प्रदेश में नागरिक उड्डयन के विस्तार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया गया था। अरबों रुपये खर्च करके देश और दुनिया के नक्शे पर कई नए छोटे-बड़े हवाई अड्डों को जोड़ा गया, ताकि छोटे शहरों के लोग भी कम समय में हवाई यात्रा का आनंद उठा सकें। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से थोड़ी जुदा नजर आ रही है। हाल ही में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित कुल छह हवाई अड्डों से विमानों का संचालन पूरी तरह से बंद हो चुका है। यही नहीं, राज्य के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तथा गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से भी उड़ानों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस स्थिति ने विमानन सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों और आम जनता दोनों को चिंता में डाल दिया है कि आखिर इतने भारी-भरकम निवेश के बाद भी ये उड़ानें क्यों नहीं टिक पा रही हैं।
कौन-कौन से एयरपोर्ट हुए बंद और क्या है वर्तमान स्थिति?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के तहत देश भर में छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने की पहल शुरू की गई थी। इसके तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 18 एयरपोर्ट चिन्हित किए गए थे, लेकिन इनमें से छह हवाई अड्डों पर ताले लटक चुके हैं या वहां से एक भी नियमित उड़ान संचालित नहीं हो रही है। इन बंद या अप्रभावी हवाई अड्डों में मुख्य रूप से कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद का नाम शामिल है। इन सभी स्थानों पर एयरपोर्ट के निर्माण और विस्तारीकरण पर राज्य और केंद्र सरकार का भारी-भरकम बजट खर्च किया गया था। उदाहरण के लिए, कुशीनगर एयरपोर्ट के विस्तार और सुविधाओं पर ही 108.22 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी, लेकिन यात्रियों की कमी और तकनीकी-व्यावसायिक कारणों से यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। बीते वर्ष से लेकर अब तक यहां कोई नियमित कमर्शियल उड़ान संचालित नहीं हो पाई है, जिससे स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भी तगड़ा झटका लगा है।
जेवर और हिंडन एयरपोर्ट से क्यों घट रही हैं उड़ानें?
महज छोटे या क्षेत्रीय एयरपोर्ट ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और दिल्ली-एनसीआर से सटे गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट पर भी उड़ानों के आंकड़े चिंताजनक रूप से नीचे आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट से जहां पहले कुल 17 अलग-अलग शहरों के लिए उड़ानें संचालित होती थीं, वह संख्या घटकर अब 15 रह गई है। इसके अलावा, प्रतिदिन होने वाली उड़ानों की संख्या भी 36 से घटकर सीधे 28 से 30 के बीच सिमट गई है। वहीं दूसरी ओर, गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से भी उड़ानों की संख्या में भारी कटौती देखी गई है और वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग आधा रह गया है। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के पंतनगर एयरपोर्ट का भी कमोबेश यही हाल है, जहां से अधिकांश उड़ानें ठप पड़ी हैं। इन बड़े और उभरते हुए एयरपोर्ट्स से उड़ानों का घटना इस बात का संकेत है कि विमानन कंपनियों के लिए इन रूट्स को सस्टेन करना आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
उड़ानों के बंद होने और घटने के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
इन महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर उड़ानों के बंद होने या उनमें भारी कमी आने के पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण इन छोटे हवाई अड्डों पर विमानों के लिए 'फ्यूल फिलिंग' यानी ईंधन भरने की आधुनिक और पर्याप्त सुविधा का न होना है। इसके अभाव में विमानों को अपनी उड़ान पूरी करने के लिए बड़े एयरपोर्ट्स से ही एक्स्ट्रा ईंधन भरकर आना पड़ता है, जिससे एयरलाइंस कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट (संचालन लागत) काफी बढ़ जाती है। दूसरा प्रमुख कारण इन रूट्स पर पर्याप्त संख्या में यात्रियों का न मिलना है। कई छोटे शहरों में विमानों की सीटों के अनुपात में यात्री बुक नहीं हो पाते, जिससे एयरलाइंस को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, हवाई टिकटों की अधिक कीमतें और एयरपोर्ट्स तक पहुंचने के लिए लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट या सड़क मार्ग की खराब कनेक्टिविटी भी यात्रियों को आकर्षित करने में नाकाम साबित हो रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर 'उड़ान' योजना के आंकड़े और चुनौतियां
यदि हम पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में देखें तो क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के अंतर्गत देश भर में अब तक कुल 679 हवाई मार्ग शुरू किए गए थे। इनमें से केवल 348 मार्ग ही नियमित रूप से संचालित हो पा रहे हैं, जबकि लगभग 165 हवाई मार्गों को उनकी वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) की अवधि पूरी होने से पहले ही बंद करना पड़ गया है। इसका मुख्य कारण यही रहा कि संबंधित रूट पर विमानों को चलाने के लिए पर्याप्त पैसेंजर लोड नहीं मिला और एयरलाइंस कंपनियां घाटे में जाने लगीं। जब तक विमानन कंपनियों को वित्तीय रूप से निरंतरता का लाभ नहीं मिलता, तब तक वे छोटे और अविकसित शहरों के लिए अपनी सेवाएं जारी रखने से कतराती हैं। यही कारण है कि सरकारी अनुदान या सब्सिडी समाप्त होने के तुरंत बाद कई एयरलाइंस ने अपने हाथ खींच लिए और उन रूट्स पर ताले लग गए।
यात्रियों की संख्या बढ़ाने और पर्यटन को गति देने की नई रणनीति
बंद पड़े कुशीनगर एयरपोर्ट और अन्य क्षेत्रीय रूट्स को दोबारा पटरी पर लाने के लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार अब नए सिरे से खाका तैयार कर रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठकों में कुशीनगर एयरपोर्ट को जेवर और बिहार के गया से हवाई मार्ग से जोड़ने की योजना पर जोर दिया गया है। इस इंटर-कनेक्टिविटी से बौद्ध परिपथ (Buddhist Circuit) के पर्यटन को एक अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विदेशी और घरेलू सैलानियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि कुशीनगर को जेवर और गया जैसे बड़े केंद्रों से सीधे हवाई सेवा से जोड़ दिया जाता है, तो न केवल बौद्ध श्रद्धालुओं को सहूलियत होगी, बल्कि स्थानीय होटल उद्योग, रेस्टोरेंट और हस्तशिल्प व्यापार को भी पंख लगेंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस नई रणनीति से आने वाले दो वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
मुरादाबाद रूट पर बदलाव और विमानन कंपनियों का रुख
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद एयरपोर्ट से जुड़े मामलों में भी हाल ही में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मुरादाबाद और लखनऊ के बीच विमान सेवा का संचालन करने वाली एयरलाइंस 'फ्लाइबिग' ने अपने अनुबंध से जुड़े अधिकार और जिम्मेदारियां 'स्काईहॉप' नामक कंपनी को सौंप दी हैं। अब स्काईहॉप कंपनी मुरादाबाद से लखनऊ के बीच अपनी उड़ानें शुरू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही यह कंपनी मुरादाबाद को कानपुर, हिंडन, सहारनपुर और देहरादून जैसे शहरों से भी जोड़ने के लिए विमान सेवाओं का संचालन करेगी। विमानन बाजार में इस तरह के प्रशासनिक बदलाव और नई कंपनियों का आगे आना यह दर्शाता है कि छोटे शहरों में एयर कनेक्टिविटी को जिंदा रखने के लिए निजी क्षेत्र के साथ तालमेल बिठाना कितना जरूरी हो गया है। सरकार भी यह प्रयास कर रही है कि अधिक से अधिक क्षेत्रीय एयरलाइंस आगे आएं और बंद पड़े रूट्स पर दोबारा सेवा शुरू करें।
सरकार की नई तैयारी: संशोधित 'उड़ान' योजना और भविष्य का रोडमैप
इन तमाम चुनौतियों से पार पाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में 4 जुलाई 2026 को संशोधित 'उड़ान' (UDAN) योजना का नया स्वरूप लागू किया है। इस संशोधित योजना का मुख्य उद्देश्य अगले 10 वर्षों के भीतर देश के लगभग 120 नए, अविकसित और कम सेवा वाले गंतव्यों को हवाई मानचित्र पर लाना है। इसके साथ ही अगले दशक में करीब 4 करोड़ आम नागरिकों को बेहद सस्ती और सुलभ हवाई यात्रा उपलब्ध कराने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस नई योजना के तहत राज्यों द्वारा नामित किए जाने वाले हवाई अड्डों के विकास और संचालन के लिए 'चैलेंज मोड' की व्यवस्था अपनाई जाएगी, जिससे अधिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल तैयार हो सके। सरकार का यह प्रयास है कि हवाई अड्डों पर केवल कंक्रीट का ढांचा खड़ा न हो, बल्कि वहां टिकाऊ यात्री लोड और कमर्शियल वायबिलिटी भी सुनिश्चित की जा सके।