'पहले ठीक था आकाश, शादी के बाद हुईं गलतियां': भतीजे की चौथी वापसी पर मायावती की सफाई

'पहले ठीक था आकाश, शादी के बाद हुईं गलतियां': भतीजे की चौथी वापसी पर मायावती की सफाई

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शीर्ष नेतृत्व में चल रही खींचतान और नाटकीय घटनाक्रम के बीच पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में चौथी बार वापसी पर बड़ी और चौंकाने वाली सफाई दी है। लखनऊ में पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों की अहम बैठक के बाद मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद को पार्टी के पदों से हटाना कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता और गलत सलाहकारों के प्रभाव से बचाने के लिए उठाया गया अनुशासनात्मक कदम था।

मायावती ने बेहद बेबाक अंदाज में कहा कि आकाश जब राजनीति में आए थे, तब वे पूरी तरह समर्पित और अनुशासित थे, लेकिन "शादी के बाद उनके तौर-तरीकों में बदलाव आया और उनसे कुछ गंभीर राजनीतिक गलतियां हुईं।" हालांकि, अब आकाश द्वारा अपनी गलतियों को स्वीकार करने और पार्टी हित में पूरी निष्ठा से काम करने का संकल्प दोहराने के बाद उन्हें पुनः नेशनल कोऑर्डिनेटर की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

'शादी से पहले सब ठीक था, फिर होने लगा बाहरी दखल'

बैठक के दौरान मायावती ने आकाश आनंद के पिछले घटनाक्रमों पर खुलकर रोशनी डाली। उन्होंने कैडर को संबोधित करते हुए कहा कि शादी से पहले तक आकाश पूरी तरह पार्टी की कार्यशैली, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के मिशन के दायरे में रहकर काम कर रहे थे।

मायावती के मुताबिक, शादी के बाद उनके आसपास ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ा जो पार्टी की पारंपरिक रीति-नीति से वाकिफ नहीं थे। ससुराल पक्ष और कुछ निजी सलाहकारों के दबाव के चलते आकाश ने चुनावी रैलियों में ऐसे आक्रामक और अमर्यादित बयान दिए, जिसने पार्टी को कानूनी और राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में ला खड़ा किया। लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में दिया गया उनका विवादित बयान इसका सीधा उदाहरण था, जिसके बाद पुलिस ने उन पर एफआईआर दर्ज की थी और मायावती को उन्हें 'अपरिपक्व' बताते हुए मुख्य धारा से अलग करना पड़ा था।

पद से हटाने और बार-बार वापसी की क्या रही वजह?

आकाश आनंद के बसपा में सफर को लेकर पिछले कुछ समय में कई उतार-चढ़ाव देखे गए हैं:

  1. उत्तराधिकारी घोषित करना: मायावती ने आकाश को अपना एकमात्र राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर कैडर को भविष्य का नेता दिया था।

  2. पद से बर्खास्तगी: चुनाव के बीच भड़काऊ बयानबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर दोनों पदों से हटा दिया गया।

  3. पुनः बहाली और फिर दूरी: उपचुनावों के दौरान कुछ मौकों पर उन्हें मंच पर लाया गया, लेकिन बयानों और कार्यशैली में संतुलन न दिखने पर फिर पीछे कर दिया गया।

  4. चौथी वापसी और जिम्मेदारी: अब औपचारिक समीक्षा बैठक में आकाश को एक बार फिर नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया है, हालांकि इस बार उन पर वरिष्ठ नेताओं और मायावती की सीधी निगरानी रहेगी।

मायावती ने कहा कि एक अभिभावक और पार्टी प्रमुख के रूप में उनका यह कर्तव्य था कि वे आकाश को सख्त सबक सिखाएं, ताकि वे सत्ता या पद के अहंकार में आकर संगठन को नुकसान न पहुंचाएं।

'अब समझ आ गई है गलती': 2027 चुनाव को लेकर बड़ा दांव

मायावती ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि आकाश ने अपनी पिछली गलतियों से काफी कुछ सीखा है। उन्होंने लिखित और मौखिक रूप से पार्टी के अनुशासन का हर हाल में पालन करने का भरोसा दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती की यह सफाई और आकाश की वापसी सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों से जुड़ी है:

  • दलित युवाओं को साधना: चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती सक्रियता और सपा के 'पीडीए' फॉर्मूले से बसपा का युवा दलित कोर वोटर छिटक रहा था। आकाश आनंद की युवाओं में अच्छी पकड़ है और उनका आधुनिक अंदाज कैडर में जोश भरता है।

  • दूसरे राज्यों में संगठन विस्तार: आकाश को मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के बाहर—जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली—में पार्टी संगठन को पुनर्जीवित करने का जिम्मा सौंपा जा रहा है।

कैडर को सख्त हिदायत: पार्टी और मिशन से बड़ा कोई नहीं

मायावती ने अपनी सफाई के अंत में यह कड़ा संदेश भी दिया कि बहुजन समाज पार्टी में अनुशासन सबसे ऊपर है। चाहे कोई परिवार का सदस्य हो या सामान्य कार्यकर्ता, यदि कोई भी पार्टी की विचारधारा और अनुशासन के खिलाफ जाएगा, तो उस पर कार्रवाई तय है।

आकाश आनंद की इस चौथी वापसी से बसपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि पार्टी अब आक्रामक होकर अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने की दिशा में काम करेगी।