'ओवैसी से घबराए हुए हैं अखिलेश यादव', यूपी के मंत्री ने बताईं भयभीत होने की तीन वजहें

'ओवैसी से घबराए हुए हैं अखिलेश यादव', यूपी के मंत्री ने बताईं भयभीत होने की तीन वजहें

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ही कूटनीतिक और राजनीतिक बयानबाज़ी का पारा चरम पर पहुंच गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर एक बेहद सनसनीखेज बयान दिया है। राजभर ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में ओवैसी और उनकी पार्टी की बढ़ती रैलियों, जनाधार और जनसभाओं में उमड़ रही अप्रत्याशित भीड़ को देखकर अखिलेश यादव अंदर से बेहद भयभीत और घबराए हुए हैं। मंत्री ने कहा कि सपा का पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक अब ओवैसी की तरफ आकर्षित हो रहा है, जिससे अखिलेश यादव का राजनीतिक गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।

यूपी के मंत्री ने गिनाईं अखिलेश यादव के भयभीत होने की 3 बड़ी वजहें

अखिलेश यादव के डर के पीछे की वजहों को बयां करते हुए कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने तीन प्रमुख कारण सामने रखे हैं। पहला कारण: बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहां-जहां भी असदुद्दीन ओवैसी मैदान में उतरते हैं, वहां वे सेक्युलर कहलाने वाली पार्टियों का समीकरण ध्वस्त कर देते हैं और मुस्लिम वोट अपनी तरफ खींच लेते हैं। दूसरा कारण: ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही युवाओं और मुस्लिम समुदाय की विशाल भीड़ को देखकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को आंतरिक सर्वे कराने पर मजबूर होना पड़ा है, जिसमें उन्हें अपने पैरों तले जमीन खिसकती नजर आ रही है। तीसरा कारण: मुस्लिम समुदाय अब समाजवादी पार्टी के लिए केवल 'दरी बिछाने' या महज वोट बैंक की कठपुतली बनने के मूड में नहीं है, बल्कि वह ओवैसी के रूप में एक पढ़े-लिखे बैरिस्टर और सशक्त राजनीतिक विकल्प को तरजीह दे रहा है।

'सपा ने मुसलमानों को सिर्फ राजनीतिक वोट बैंक समझा', राजभर का सपा नेतृत्व पर करारा प्रहार

योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा ने चार बार उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के दम पर सरकार बनाई, लेकिन इसके बदले में इस समुदाय को क्या मिला? उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के अंदर किसी भी मुस्लिम सांसद या विधायक में यह हिम्मत और औकात नहीं है कि वह अखिलेश यादव के सामने जाकर किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग कर सके। राजभर ने कहा कि ओवैसी आज मुसलमानों के लिए शिक्षा, रोजगार, सम्मान और सीधे राजनीतिक नेतृत्व व अधिकार की बात कर रहे हैं। यही वजह है कि राज्य का पढ़ा-लिखा मुस्लिम युवा अब सपा को छोड़कर ओवैसी की रैलियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है, जिससे सपा खेमे में भारी निराशा और चिंता का माहौल है।

पूर्वांचल से लेकर आजमगढ़ तक ओवैसी का तीसरा मोर्चा बनाने का दांव, सपा की बढ़ीं मुश्किलें

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हाल के दिनों में श्रावस्ती, बहराइच और आजमगढ़ जैसे पूर्वांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में धुआंधार प्रचार अभियान शुरू किया है। ओवैसी द्वारा यूपी में एक 'तीसरा मोर्चा' (Third Front) गठित करने की खबरों ने भी समाजवादी पार्टी के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की आहट दे दी है। हालांकि अखिलेश यादव ने AIMIM के साथ किसी भी प्रकार के चुनावी गठबंधन से स्पष्ट इनकार कर दिया है, लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि ओवैसी यूपी की 90 से 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार मजबूती से उतारते हैं, तो इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों को उठाना पड़ सकता है।

2027 के महासमर से पहले यूपी में मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जे की राजनीतिक जंग

ओम प्रकाश राजभर के इस तीखे बयान के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने राजभर के बयान को खारिज करते हुए इसे बीजेपी के इशारे पर दिया गया अनर्गल बयान बताया है। सपा प्रवक्ताओं का तर्क है कि राज्य की जनता बीजेपी की विफलताओं से तंग आ चुकी है और वह किसी भी बहकावे में आए बिना अखिलेश यादव के नेतृत्व में एकजुट है। बहरहाल, ओवैसी की बढ़ती सक्रियता और सत्ता पक्ष के मंत्रियों द्वारा दिए जा रहे इन तीखे बयानों ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की भावी राजनीति में मुस्लिम वोटों का बिखराव ही सत्ता का समीकरण तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाला है।