Ayodhya Ram Mandir First CEO Selection: बिहार डीजी, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट से लेकर ब्रिगेडियर तक पहुंचे राम मंदिर के पहले CEO बनने; 5,300 आवेदकों में से अंतिम तीन नामों पर गहन मंथन
अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के भव्य और दिव्य मंदिर में रोजाना आ रहे लाखों रामभक्तों की व्यवस्था, मंदिर की सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक अनुशासन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंदिर के दैनिक कामकाज और प्रबंधन की कमान संभालने के लिए पहली बार 'मुख्य कार्यकारी अधिकारी' (CEO) के नए पद का सृजन किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल पद के लिए पूरे देश से जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय सेना तथा कॉर्पोरेट जगत के दिग्गजों समेत 5,300 से अधिक लोगों ने आवेदन किया।
ट्रस्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय चयन समिति ने आवेदनों की बारीकी से जांच-परख करने के बाद 18 योग्यतम उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया था। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि परिसर के 'ग्रीन हाउस' में दो दिनों तक चले मैराथन इंटरव्यू सेशन के दौरान देश के प्रशासनिक, सैन्य और पुलिस सेवा के बड़े दिग्गजों ने अपना विजन पेश किया। साक्षात्कार प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब चयन समिति ने अंतिम तीन उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार कर लिया है, जिन पर राम मंदिर ट्रस्ट और संघ विचार परिवार की सहमति से अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' राजेश पांडेय से लेकर बिहार के डीजी तक पहुंचे अयोध्या
राम मंदिर सीईओ पद के लिए आयोजित साक्षात्कार में पहुंचे दावेदारों के नाम और उनकी पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली है। इस रेस में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश पुलिस के तेजतर्रार पूर्व आईपीएस अधिकारी और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के रूप में मशहूर राजेश पांडेय की हो रही है। यूपी एसटीएफ (STF) और एटीएस (ATS) के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे 2003 बैच के आईपीएस राजेश पांडेय ने अपने 32 साल के करियर में 80 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं। कुख्यात माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला का सफाया करने वाले और चार बार राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित राजेश पांडेय इन दिनों यूपीगीडा (UPEIDA) के सुरक्षा सलाहकार के तौर पर कार्यरत हैं।
पुलिस सेवा के साथ-साथ भारतीय सेना का भी मजबूत प्रतिनिधित्व इस प्रक्रिया में दिखा है। सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सत्येंद्र कुमार सिन्हा समेत चार पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी सीईओ पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। वहीं, बिहार पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. परेश सक्सेना भी अयोध्या पहुंचे थे। हालांकि वर्तमान में सेवारत होने के कारण उन्होंने इसे आधिकारिक इंटरव्यू के तौर पर स्वीकार नहीं किया, लेकिन उन्होंने परिसर में साक्षात्कार में भाग लेने के साथ ही मणिराम छावनी और राम कुंज कथा मंडप में प्रमुख संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इनके अलावा अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी (DM) योगेश्वर राम मिश्रा भी प्रशासनिक अनुभव के दम पर इस रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
तीन सदस्यीय चयन समिति और साक्षात्कार का मुख्य फोकस
सीईओ पद के लिए उम्मीदवारों के मूल्यांकन की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय प्रतिष्ठित चयन समिति के कंधों पर थी। इस समिति में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और देश के जाने-माने वैज्ञानिक व उद्योगपति सुरेश हावड़े शामिल रहे। समिति ने प्रत्येक उम्मीदवार के साथ एक से दो घंटे का गहन व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित किया।
साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों से केवल उनके प्रशासनिक अनुभव या फाइलों को निपटाने की क्षमता पर ही सवाल नहीं पूछे गए, बल्कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक और संवेदनशील मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण जाना गया। चयनकर्ताओं ने उम्मीदवारों की सोच, आपातकालीन स्थितियों में तुरंत कड़े फैसले लेने की क्षमता, भीड़ प्रबंधन, मंदिर की सुरक्षा, वित्तीय शुचिता और सबसे महत्वपूर्ण—लाखों आम श्रद्धालुओं के प्रति उनकी सेवा भावना और व्यवहारिकता को परखा। साक्षात्कार पूरा होने के बाद सभी उम्मीदवारों को रामलला के विशेष दर्शन कराए गए और ट्रस्ट की ओर से प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया गया।
चयन का मुख्य पैमाना: संघ विचार परिवार से निष्ठा और संतों के साथ समन्वय
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, देश के इतने बड़े और संवेदनशील धार्मिक स्थल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए केवल योग्यता ही एकमात्र कसौटी नहीं है। चयन समिति द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए अंतिम तीन नामों में से सबसे पहली और अनिवार्य कसौटी उम्मीदवार की राष्ट्रवाद और संघ विचार परिवार (RSS) के प्रति अटूट निष्ठा मानी जा रही है।
इसके साथ ही, नए सीईओ के भीतर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों, पूज्य संतों, स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बैठाकर चलने की असाधारण क्षमता होनी चाहिए। मंदिर में नौकरशाही का अत्यधिक वर्चस्व संतों को स्वीकार्य नहीं है, इसलिए एक ऐसे व्यक्तित्व की तलाश की जा रही है जो प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ सनातन धार्मिक मूल्यों और परंपराओं का पूर्ण सम्मान करे।
2 सितंबर से पहले हो सकता है नए सीईओ के नाम का ऐलान
साक्षात्कार प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब अंतिम तीन नामों की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों और संघ के वरिष्ठ विचारकों के बीच चल रहे गहन मंथन के बाद उस एक नाम पर अंतिम सहमति बनाई जाएगी जो मंदिर प्रशासन को नई ऊंचाइयों पर ले जा सके।
संभावना जताई जा रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आगामी 2 सितंबर को प्रस्तावित बोर्ड बैठक से पहले ही नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। राम मंदिर के प्रशासनिक इतिहास में पहले सीईओ की यह नियुक्ति अयोध्या के आने वाले भविष्य, सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक पटल पर राम मंदिर के कुशल संचालन के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रही है।