सीएम योगी ने UPCOS का किया शुभारंभ, मानदेय में दोगुनी बढ़ोतरी, 50 लाख तक का दुर्घटना बीमा और 5 लाख का कैशलेस इलाज
उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों, निगमों, प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों में कार्य कर रहे लाखों आउटसोर्स व संविदा कर्मचारियों के जीवन और आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक युगांतरकारी और ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लागू कर दिया है। राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम' (UPCOS) का विधिवत शुभारंभ करते हुए इसके नए पोर्टल, आधिकारिक वेबसाइट और लोगो का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि अब प्रदेश की कोई भी निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी या ठेकेदार कंपनी अपनी मनमर्जी से किसी भी कर्मचारी को सेवा से सीधे बर्खास्त नहीं कर सकेगी। किसी भी कर्मी को हटाने से पहले संबंधित कंपनी को राज्य सरकार से बाकायदा पूर्व अनुमति लेनी होगी, जिसके बाद सरकार स्वतंत्र स्तर पर जांच कराएगी और यदि कर्मचारी के खिलाफ शिकायत झूठी पाई गई तो कंपनी उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगी।
यह फैसला उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, बरेली और नोएडा सहित सभी 75 जिलों में कार्यरत करीब साढ़े सात लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए वर्षों से चले आ रहे शोषण, अनिश्चितता और बिचौलियों के आतंक से मुक्ति दिलाने वाला महावरदान बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों के दौर में आउटसोर्स कर्मचारियों को शासन व्यवस्था पर एक 'बोझ' समझा जाता था और राजनीतिक रसूख वाले नेताओं के रिश्तेदारों की कंपनियां बनाकर युवाओं के श्रम का बेरहमी से शोषण किया जाता था। योगी सरकार ने इस सोच को पूरी तरह बदलते हुए आउटसोर्स कर्मियों को प्रदेश की विकास यात्रा का बहुमूल्य 'एसेट' (संपत्ति) माना है। नई व्यवस्था के तहत न केवल कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित की गई है, बल्कि उनके मानदेय में भारी बढ़ोतरी, सेवा शर्तों में सुधार, ईपीएफ-ईएसआई की सीधी निगरानी और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ एमओयू कर सामाजिक सुरक्षा का ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है जिसकी मिसाल पूरे देश में नहीं है।
यूपीसीओएस पोर्टल से पारदर्शी व्यवस्था: अब खत्म होगी बिचौलियों की कमीशनखोरी और कटौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन के मंच से ऐलान किया कि अब तक आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के मासिक वेतन से जो अवैध कटौती और कमीशनखोरी की जाती थी, उस पर पूरी तरह पूर्णविराम लगा दिया गया है। नई व्यवस्था में कर्मचारी के बैंक खाते में सरकार द्वारा निर्धारित पूरा मानदेय बिना एक भी रुपये की कटौती के सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजा जाएगा। आउटसोर्सिंग कंपनियों के संचालन के लिए जो सर्विस चार्ज या प्रशासनिक शुल्क देय होगा, उसका भुगतान सरकार अपने खजाने से अलग से करेगी। इससे कंपनियों का कर्मचारियों के पारिश्रमिक पर कोई वित्तीय अधिकार नहीं रह जाएगा।
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदेश भर के सभी विभागों में तैनात मानव संसाधन का केंद्रीकृत डिजिटल एकीकरण कर दिया गया है। अब कौन सा कर्मचारी किस विभाग में, किस पद पर और कितने वर्षों से कार्यरत है, इसका पूरा सेवा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा। इससे पहले निजी फर्में कर्मचारियों का वास्तविक ईपीएफ (भविष्य निधि) और ईएसआई का अंशदान काटकर डकार जाती थीं और सरकारी खजाने में जमा नहीं कराती थीं। अब यूपीसीओएस पोर्टल के जरिए ईपीएफ का पैसा सीधे कर्मचारी के यूएएन (UAN) खाते में क्रेडिट होगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि 'पिक एंड चूज' और अधिकारियों की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर कर्मियों को प्रताड़ित करने की संस्कृति का सदा के लिए अंत कर दिया गया है।
चार श्रेणियों में मानदेय का नया ढांचा: योग्यता के आधार पर 20 हजार से 40 हजार तक वृद्धि
आउटसोर्सिंग कर्मियों के आर्थिक स्वावलंबन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पदों की जिम्मेदारियों और न्यूनतम शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर मानदेय की चार नई श्रेणियां निर्धारित की हैं, जिससे कर्मियों के वेतन में लगभग दोगुनी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। श्रेणी-एक के अंतर्गत विशेषज्ञ सेवाओं को शामिल किया गया है, जिसमें सरकारी अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टर, सहायक अभियंता (AE/SDO), डिग्री कॉलेजों के लेक्चरर, प्रोजेक्ट ऑफिसर, एकाउंट्स ऑफिसर और रिसर्च ऑफिसर जैसे पद शामिल हैं। इन उच्च योग्यताधारी कर्मियों के लिए 40 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है।
श्रेणी-दो के तहत मध्यम तकनीकी और प्रशासनिक पदों को रखा गया है, जिसमें जूनियर इंजीनियर (JE), स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, एक्स-रे टेक्नीशियन, सीनियर एकाउंटेंट, अनुवादक, लीगल असिस्टेंट और ड्राफ्टमैन जैसे पद शामिल हैं, जिन्हें अब 25 हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। श्रेणी-तीन में सामान्य सपोर्ट स्टाफ, जैसे कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, जूनियर असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर, लैब असिस्टेंट, इलेक्ट्रीशियन, फिटर और वाहन चालकों (ड्राइवर्स) को रखा गया है, जिनका मानदेय 22 हजार रुपये तय किया गया है। वहीं चतुर्थ श्रेणी में आने वाले सफाईकर्मियों, अर्दली, प्यून, चौकीदार, माली, कुक, लिफ्ट ऑपरेटर और निर्माण सहायकों के लिए न्यूनतम मानदेय 20 हजार रुपये सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही सरकार ने यह वैधानिक प्रावधान भी कर दिया है कि हर पांच वर्ष के अंतराल पर महंगाई सूचकांक के आधार पर मानदेय का अनिवार्य पुनरीक्षण किया जाएगा ताकि कर्मचारियों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार होता रहे।
5 लाख का कैशलेस इलाज और मातृत्व लाभ: स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए ईएसआई का नया मॉडल
आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बेहद मानवीय और संवेदनशील व्यवस्था की घोषणा की है। अक्सर यह देखा जाता था कि ईएसआई कार्ड होने के बावजूद कर्मचारियों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ईएसआई का अंशदान अब सीधे संबद्ध अस्पतालों को ट्रांसफर किया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में ईएसआई अस्पताल में जरूरी चिकित्सा सुविधाएं, आईसीयू या विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे, तो उस कर्मचारी और उसके पूरे परिवार को आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर 5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा से सीधे आच्छादित कर दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त महिला आउटसोर्स कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए सवेतन मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) का प्रावधान पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। किसी भी महिला कर्मचारी को गर्भावस्था के दौरान सेवा से नहीं हटाया जा सकेगा और उसे नियमानुसार मातृत्व अवकाश का पूरा भुगतान किया जाएगा। आपातकालीन परिस्थितियों के लिए आकस्मिक दवाओं के वास्ते 5 लाख रुपये और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कराने के लिए 10 लाख रुपये तक की एयर एम्बुलेंस सहायता का भी विशेष कोष स्थापित किया गया है, जिससे किसी भी कर्मचारी के परिवार को इलाज के अभाव में दर-दर न भटकना पड़े।
एसबीआई के साथ हुआ महा-समझौता: 50 लाख का बीमा कवर और बच्चों की पढ़ाई को कर्ज
लोक भवन के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार और देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत प्रत्येक आउटसोर्स कर्मचारी का शून्य बैलेंस (Zero Balance) पर सैलरी अकाउंट खोला जाएगा, जिसमें बैंक की ओर से बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम के व्यापक सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया जाएगा। यदि कार्य के दौरान या सामान्य जीवन में किसी कर्मचारी के साथ कोई दुखद सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा होती है, तो उसके आश्रित परिवार को 20 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा क्लेम तत्काल प्रदान किया जाएगा।
कार्यस्थल या घर में किसी दुर्भाग्यपूर्ण अग्निकांड की घटना होने पर आउटसोर्स सेवा निगम की तरफ से पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की सीधी आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों के भविष्य को संवारने के लिए बैंक द्वारा रियायती दरों पर शिक्षा ऋण का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसमें बेटे की उच्च शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये और बेटी की उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सुविधा दी जाएगी। बेटियों के विवाह के लिए भी सरकार और बैंक मिलकर आर्थिक सहयोग प्रदान करेंगे, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय कर्मचारियों को अपनी संतानों के भविष्य के लिए साहूकारों के कर्ज के जाल में न उलझना पड़े।
श्रम की गरिमा और सामाजिक न्याय की नई मिसाल: अब केवल योग्यता से होंगी नई नियुक्तियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच का रिश्ता केवल धन या मानदेय का नहीं होता, बल्कि यह अटूट विश्वास और परस्पर सम्मान का संबंध होता है। जब राज्य का सफाईकर्मी सुबह कड़कड़ाती ठंड में सड़क साफ करता है, जब बिजलीकर्मी जान जोखिम में डालकर खंभे पर चढ़ता है, या जब अस्पताल में वार्ड ब्वॉय और नर्स मरीजों की सेवा करते हैं, तो वे केवल अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे होते, बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी आहुति दे रहे होते हैं। ऐसे कर्मठ साथियों को सामाजिक और आर्थिक भेदभाव से मुक्त करना सरकार का परम कर्तव्य है।
आने वाले समय में आउटसोर्सिंग के पदों पर होने वाली नई भर्तियों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नियमों को सख्त और निष्पक्ष बनाने के निर्देश दिए हैं। अब किसी भी विभाग में चहेतों को पिछले दरवाजे से नौकरी नहीं दी जा सकेगी। श्रेणी-एक और श्रेणी-दो के पदों पर पारदर्शी लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षण के आधार पर ही भर्तियां की जाएंगी, जबकि श्रेणी-तीन और चार में इंटरव्यू की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर केवल न्यूनतम योग्यता और मेरिट के आधार पर बिना किसी भेदभाव के अवसर दिए जाएंगे। प्रत्येक माह की 5 तारीख तक कर्मचारियों के बैंक खातों में मानदेय पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है। योगी सरकार के इस क्रांतिकारी कदम से उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों में खुशहाली की नई लहर दौड़ गई है और कर्मचारियों को यह पक्का भरोसा मिला है कि उनके श्रम का सम्मान अब व्यवस्था की पहली प्राथमिकता बन चुका है।