सीएम योगी ने लॉन्च की 'भारत टैक्सी'; ड्राइवरों को 0% कमीशन और 5 लाख की सामाजिक सुरक्षा का तोहफा

सीएम योगी ने लॉन्च की 'भारत टैक्सी'; ड्राइवरों को 0% कमीशन और 5 लाख की सामाजिक सुरक्षा का तोहफा

उत्तर प्रदेश के परिवहन और मोबिलिटी सेक्टर में ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी निजी कैब कंपनियों के एकाधिकार और मनमाने कमीशन को खत्म करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सहकारिता व नागर विमानन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने राजधानी लखनऊ में सहकारी मॉडल पर आधारित बहुप्रतीक्षित 'भारत टैक्सी' (Bharat Taxi) सेवा का विधिवत शुभारंभ किया।

इस नई सेवा के जरिए कैब, ऑटो-रिक्शा और बाइक टैक्सी चलाने वाले चालकों को सीधे राहत दी गई है। निजी कंपनियों की तरह इसमें ड्राइवरों की मेहनत की कमाई से कोई भारी कमीशन नहीं काटा जाएगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह 'जीरो कमीशन' (Zero Commission) पर संचालित होगी। इसके साथ ही, मंच से जुड़े सभी चालकों को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा (दुर्घटना बीमा व स्वास्थ्य कवर) प्रदान करने का ऐतिहासिक ऐलान किया गया है।

लखनऊ समेत 4 बड़े शहरों से शुरुआत, 'सारथी ही होगा मालिक'

शुरुआती चरण में 'भारत टैक्सी' सेवा का संचालन प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों—लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में शुरू किया गया है। जल्द ही इसका दायरा कानपुर, आगरा, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों तक बढ़ाया जाएगा।

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसका सहकारी स्वरूप है, जिसमें ड्राइवरों को सिर्फ 'पार्टनर' नहीं बल्कि सिस्टम का हिस्सेदार यानी 'सारथी ही मालिक' माना गया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीकात्मक रूप से पांच सारथियों को भारत टैक्सी के शेयर प्रमाण पत्र भी सौंपे। इस सेवा को सुगम बनाने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ विशेष एमओयू (MoU) भी साइन किए गए हैं, ताकि यात्रियों को रेलवे स्टेशन, मेट्रो और एयरपोर्ट से सीधे सुरक्षित कनेक्टिविटी मिल सके।

ओला-उबर के मुकाबले ड्राइवर और यात्री दोनों को कैसे होगा फायदा?

अब तक ओला, उबर और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों के खिलाफ कैब और ऑटो चालकों की सबसे बड़ी शिकायत भारी-भरकम कमीशन को लेकर रही है।

  1. पूरी कमाई ड्राइवर की जेब में: निजी एग्रीगेटर कंपनियां हर राइड पर ड्राइवर की कमाई से 20 से 30 फीसदी तक का कमीशन काट लेती हैं। 'भारत टैक्सी' में जीरो-कमीशन मॉडल होने के कारण यात्रा का पूरा पैसा सीधे ड्राइवर के बैंक खाते में जाएगा।

  2. 5 लाख की सामाजिक सुरक्षा: असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले इन चालकों के लिए अब तक किसी आपात स्थिति या दुर्घटना में कोई पुख्ता सुरक्षा कवच नहीं था। अब 5 लाख रुपये तक के बीमा और ई-श्रम पोर्टल से जुड़ने के कारण उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा।

  3. सर्ज प्राइसिंग और पीक आवर चार्ज से मुक्ति: यात्रियों के लिए भी यह सेवा किफायती साबित होगी। बारिश, रात के समय या पीक ऑवर्स में निजी कंपनियां मनमाना 'सर्ज प्राइस' (Surge Pricing) वसूलती हैं, जबकि भारत टैक्सी में पारदर्शी और तय सरकारी दरों पर गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

'महाकुंभ 2025 में दिखा था युवाओं का दम' - सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और टैक्सी चालकों की सामाजिक सुरक्षा के बारे में पहले कभी किसी ने नहीं सोचा था। अब वे बिना किसी चिंता और डर के स्वाभिमान के साथ अपनी आजीविका चला सकेंगे।

सीएम योगी ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उदाहरण देते हुए कहा, "महाकुंभ के दौरान लाखों नौजवानों ने बाइक टैक्सी के जरिए श्रद्धालुओं को संगम, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट तक सुरक्षित पहुंचाने में दिन-रात योगदान दिया था। उस सफल प्रयोग ने साबित किया कि स्थानीय युवाओं को अगर सही मंच मिले तो वे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को आसान बनाने के साथ खुद का रोजगार भी खड़ा कर सकते हैं। भारत टैक्सी सिर्फ गाड़ियां चलाने का माध्यम नहीं है, यह भारत की गति को प्रगति में बदलने का जरिया बनेगी।"

अब गांवों में भी दौड़ेगी 'ग्रामीण बस सेवा'

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को निर्देश दिए कि 'भारत टैक्सी' के इस सफल सहकारी और जीरो-कमीशन मॉडल को ग्रामीण परिवहन तक ले जाया जाए। सरकार की योजना है कि इसी तर्ज पर प्रदेश में 'ग्रामीण बस सेवा' की शुरुआत की जाए। इससे दूर-दराज के गांवों से तहसील और जिला मुख्यालयों तक आवागमन सुलभ होगा और स्थानीय स्तर पर लाखों ग्रामीण युवाओं को परिवहन क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।

निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मनमाने एल्गोरिदम और कमीशन से त्रस्त ड्राइवरों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम गेमचेंजर माना जा रहा है। अगर ऐप का तकनीकी ढांचा, वेटिंग टाइम और वाहनों की उपलब्धता मजबूत रहती है, तो आने वाले दिनों में यह सेवा यूपी के कैब बाजार की पूरी तस्वीर बदल सकती है।