'कपड़े उतरवाकर चेहरे पर पोती थी लिपस्टिक, बहन के सामने करती थी जलील': शिवा उत्पीड़न मामले में श्रद्धा की बर्बरता की दास्तान आई सामने
रिश्तों के ताने-बाने में छिपी क्रूरता और मानसिक उत्पीड़न का एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज और पुलिस प्रशासन दोनों को स्तब्ध कर दिया है। पीड़ित युवक शिवा के परिजनों ने उसकी साथी श्रद्धा पर अमानवीय बर्बरता, मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करने के बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि लंबे समय से बंद कमरों और चारदीवारी के भीतर शिवा के साथ ऐसा सलूक किया जा रहा था, जिसकी कल्पना भी किसी सभ्य समाज में नहीं की जा सकती। मामले की शिकायत पुलिस के उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद अब इस पूरे प्रकरण की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर और बयानों के आधार पर मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और आरोपों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
कपड़े उतरवाकर लिपस्टिक पोतने और बहन के सामने अपमानित करने का संगीन आरोप
शिवा के परिवार और उसकी बहन द्वारा दर्ज कराए गए बयानों के अनुसार, श्रद्धा का व्यवहार शिवा के प्रति शुरुआत से ही अत्यधिक आक्रामक, शोषक और अपमानजनक रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि श्रद्धा न केवल छोटी-छोटी बातों पर शिवा के साथ हिंसक बर्ताव करती थी, बल्कि उसके आत्मसम्मान को पूरी तरह कुचलने के लिए बेहद घिनौने हथकंडे अपनाती थी। परिजनों के मुताबिक, एक बार विवाद के दौरान श्रद्धा ने हदें पार करते हुए शिवा के जबरन कपड़े उतरवा दिए और जबरदस्ती उसके चेहरे पर लिपस्टिक पोत दी। इतना ही नहीं, इस अपमानजनक स्थिति में शिवा की सगी बहन के सामने उसे खड़ा कर भद्दे तंज कसे गए और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। परिजनों का कहना है कि जब भी शिवा इसका विरोध करने की कोशिश करता, उसे झूठे मुकदमों में फंसाने और सामाजिक रूप से बर्बाद करने की सीधी धमकियां दी जाती थीं।
गहरे अवसाद और मानसिक घुटन में जीता रहा शिवा, परिजनों ने बयां किया दर्द
परिजनों का कहना है कि लगातार हो रहे इस अमानवीय उत्पीड़न ने शिवा को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। जो युवक पहले हंसमुख और सामाजिक हुआ करता था, वह धीरे-धीरे गहरे डिप्रेशन और अकेलेपन के अंधेरे में धकेलता चला गया। उसने अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों से बातचीत लगभग बंद कर दी थी। परिजनों का दावा है कि श्रद्धा की लगातार बढ़ती ब्लैकमेलिंग और बेइज्जती के डर से शिवा अपनी इस असहनीय पीड़ा को लंबे समय तक अपने सीने में ही दबाए रहा। जब स्थिति बर्दाश्त से बाहर हो गई और शिवा के व्यवहार व स्वास्थ्य में असामान्य बदलाव दिखने लगे, तब जाकर परिवार के सामने इस खौफनाक प्रताड़ना का सच उजागर हुआ।
पुलिस ने दर्ज की शिकायत, मोबाइल चैट और वीडियो फुटेज की फॉरेंसिक जांच तेज
मामले की गंभीरता और लगाए गए आरोपों की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित पुलिस थाने ने त्वरित संज्ञान लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं। शिवा और श्रद्धा के बीच हुई मोबाइल बातचीत, व्हाट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और कथित घटनाओं के समय मौजूद संभावित डिजिटल साक्ष्यों को जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस उत्पीड़न में श्रद्धा के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता थी। जांच अधिकारी का कहना है कि मामले में निष्पक्षता से सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और साक्ष्यों के आधार पर कानून सम्मत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुरुषों के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और कानूनी संरक्षण पर फिर छिड़ी राष्ट्रीय बहस
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और कानूनी गलियारों में एक बार फिर पुरुषों के खिलाफ होने वाले घरेलू व मानसिक उत्पीड़न को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है। विधि विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार पुरुष सामाजिक बदनामी और कानूनी जटिलताओं के डर से अपने खिलाफ हो रही ज्यादतियों की शिकायत दर्ज कराने से कतराते हैं, जिससे प्रताड़ना करने वालों के हौसले बढ़ जाते हैं। परिजनों ने मांग की है कि मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित सुनवाई हो और आरोपी श्रद्धा को उसके अमानवीय कृत्यों के लिए कानून के मुताबिक कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य युवक को इस तरह की मानसिक त्रासदी से न गुजरना पड़े।