सपा नेता आजम खां पर ईडी का महा-शिकंजा: रामपुर जेल में 8 घंटे की पूछताछ के बाद गंभीर धाराओं में नया केस दर्ज
समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शुमार और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की जिला जेल में बंद आजम खां पर अब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण, चंदे और वित्तीय लेन-देन में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी की टीम ने रामपुर जेल पहुंचकर आजम खां से करीब आठ घंटे तक तीखे सवालों की बौछार की। इस मैराथन पूछताछ और केंद्रीय एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर आजम खां के खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन और आपराधिक षड्यंत्र जैसी बेहद गंभीर धाराओं में एक और नया आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। रामपुर से लेकर राजधानी लखनऊ तक इस ताजा कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा एकाएक चढ़ गया है।
416 करोड़ का गायब हिसाब और 85 करोड़ का सरकारी धन: ईडी की जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी कैंपस में 494.46 करोड़ रुपये का निर्माण कार्य दिखाया गया था, जबकि आयकर रिटर्न (आईटीआर) के दस्तावेजों में महज 78.32 करोड़ रुपये का ही ब्योरा पेश किया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि 416.14 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का कोई वैध लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के जरिए सरकारी खजाने से लगभग 85.81 करोड़ रुपये के काम निजी ट्रस्ट की जमीन पर कराए जाने का खुलासा हुआ है। नियमों को ताक पर रखकर निजी संस्थान के अंदर सरकारी बजट से पक्के निर्माण कराए गए और बाद में उन संपत्तियों का मालिकाना हक चुपचाप यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के हवाले कर दिया गया।
ठेकेदारों से फर्जी चंदा और जल निगम के बजट का खेल: ऐसे तैयार हुआ निजी साम्राज्य
जांच एजेंसियों के हाथ लगे साक्ष्यों के मुताबिक, सपा शासनकाल के दौरान सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से सांठगांठ का बड़ा खेल खेला गया था। आरोप है कि लगभग 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने बदले में करीब 55.8 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री जौहर यूनिवर्सिटी कैंपस में मुफ्त या रियायती दरों पर पहुंचाई। इतना ही नहीं, ठेकेदारों के जरिए ही फर्जी डोनेशन के नाम पर नकदी और चेक के माध्यम से पैसा वापस जौहर ट्रस्ट के बैंक खातों में घुमाया गया। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए 23.41 करोड़ रुपये की लागत से सरकारी पंडाल, भव्य हॉस्टल और अस्पताल की इमारतें निजी विश्वविद्यालय के परिसर में बनवाई गईं। साथ ही, विधायक और विधान परिषद सदस्य (एमएलए/एमएलसी) निधि से भी 6.60 करोड़ रुपये का बजट इस निजी परिसर के विकास में झोंक दिया गया।
करीबियों और ट्रस्टियों से बयानों का मिलान: अब्दुल्ला आजम के दोस्तों पर भी कसा शिकंजा
ईडी की टीम सिर्फ आजम खां के बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जेल में हुई इस पूछताछ से पहले उनके कई करीबियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों की घेराबंदी पूरी कर ली गई थी। जांच एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर जहीरुद्दीन और चमरौआ सीट से सपा विधायक नसीर अहमद खां से लखनऊ मुख्यालय में घंटों पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए थे। इसके अलावा आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम के करीबी दोस्तों सालिम और अनवार को भी रडार पर लिया गया है। सालिम से दो बार पूछताछ हो चुकी है और उसे दोबारा तलब किया गया है, जबकि अनवार से भी वित्तीय कड़ियों को लेकर जवाब मांगे गए हैं। इन सभी गवाहों, ठेकेदारों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से मिले बयानों के आधार पर ही जेल में आजम खां के सामने फाइलों का पुलिंदा रखकर एक-एक बिंदु पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना बोले- यह इंसाफ और रामपुर की जनता की जीत है
आजम खां पर दर्ज हुए इस नए मुकदमे के बाद रामपुर शहर से भाजपा विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने इसे सत्य और न्याय की विजय करार दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 2019 से वे लगातार साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ यह शिकायत कर रहे थे कि सत्ता का खुला दुरुपयोग कर जनता के खून-पसीने की कमाई से एक निजी विश्वविद्यालय की सल्तनत खड़ी की गई थी। आकाश सक्सेना ने कहा कि सात साल के अथक कानूनी संघर्ष के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी की रिपोर्ट ने उनकी हर शिकायत पर कानूनी मुहर लगा दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामपुर में अब कानून का राज स्थापित हो चुका है और सरकारी खजाने तथा गरीब किसानों की लूटी गई एक-एक पाई और जमीन के टुकड़े का पूरा हिसाब कानून के दायरे में लिया जाएगा।
जेल की सलाखों के पीछे से नई कानूनी लड़ाई: अब आगे क्या होगा आजम खां का रास्ता
दो जन्म प्रमाण पत्र और फर्जी पैन कार्ड जैसे मामलों में अदालत से सजायाफ्ता होकर रामपुर जेल की बैरक में दिन काट रहे आजम खां के लिए यह नया मुकदमा उनकी रिहाई की उम्मीदों पर बड़ा झटका साबित हो सकता है। गंभीर धाराओं में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में अब पुलिस और ईडी रिमांड पर लेने की कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ा सकती है। आजम खां की कानूनी टीम इस नई एफआईआर को राजनीति से प्रेरित बताकर हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हालांकि, जांच एजेंसी के पास मौजूद बैंक खातों के फॉरेंसिक ऑडिट, ठेकेदारों की लिखित स्वीकारोक्ति और सरकारी बजट की फाइलों के चलते आने वाले दिनों में यह कानूनी शिकंजा और अधिक कड़ा होना तय माना जा रहा है।