मुरादाबाद में आदमखोर तेंदुए की दहशत: वन विभाग ने बिछाया जाल, 49 पिंजरे और 40 कैमरों से निगरानी

मुरादाबाद में आदमखोर तेंदुए की दहशत: वन विभाग ने बिछाया जाल, 49 पिंजरे और 40 कैमरों से निगरानी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के ग्रामीण इलाकों में तेंदुए की बढ़ती सक्रियता और हमलों की आशंका ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। पिछले कई दिनों से गन्ने के खेतों और जंगलों से सटे गांवों में तेंदुए के पदचिह्न (पगमार्क) मिलने और मवेशियों पर हमले की घटनाओं के बाद इलाके में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। खौफ का आलम यह है कि शाम ढलते ही ग्रामीण घरों में कैद होने को मजबूर हैं और किसान खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया है। पूरे संवेदनशील क्षेत्र में 49 भारी पिंजरे और 40 अत्याधुनिक नाइट-विजन ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जबकि वन कर्मियों की टीमें दिन-रात चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं।

गन्ने के लहलहाते खेत बने तेंदुए का सुरक्षित ठिकाना, किसानों में दहशत

मुरादाबाद के कांठ, ठाकुरद्वारा और मूंढापांडे क्षेत्र से सटे दर्जनों गांवों में गन्ने की सघन फसल खड़ी है। यह समय गन्ने की फसल के ऊंचे होने का होता है, जो जंगली जानवरों, खासकर तेंदुओं के छिपने के लिए मुफीद प्राकृतिक ठिकाना बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शाम और सुबह के समय खेतों की मेड़ों पर तेंदुए को घूमते देखा है। कुछ स्थानों पर आवारा पशुओं और बछड़ों के शिकार की घटनाएं भी सामने आई हैं। बच्चों के स्कूल जाने और महिलाओं के घास-चारा लाने पर अघोषित पाबंदी जैसी स्थिति बन गई है। किसान लाठी-डंडों और टार्च के साथ झुंड बनाकर ही खेतों की ओर निकल रहे हैं।

40 नाइट-विजन कैमरों और 49 पिंजरों से की जा रही है 24 घंटे घेराबंदी

तेंदुए की लगातार मिल रही लोकेशन के आधार पर वन विभाग ने वैज्ञानिक तरीके से कॉम्बिंग प्लान तैयार किया है। प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) के निर्देशानुसार, वन विभाग की स्पेशल टास्क टीमों ने संभावित रास्तों और पानी के स्रोतों के पास 49 लोहे के मजबूत पिंजरे लगाए हैं। इन पिंजरों में तेंदुए को आकर्षित करने के लिए बकरे और मुर्गियों का चारा बांधा गया है। इसके अलावा, जंगली जानवर की सटीक मूवमेंट और दिशा का पता लगाने के लिए पेड़ों और झाड़ियों के बीच 40 ऑटोमैटिक मोशन-सेंसर और नाइट-विजन इन्फ्रारेड कैमरे स्थापित किए गए हैं। जैसे ही कोई वन्यजीव इन कैमरों के दायरे से गुजरेगा, उसकी तस्वीर और लोकेशन सीधे कंट्रोल रूम के डेटा में दर्ज हो जाएगी।

वन विभाग की आठ विशेष टीमों का गठन, लाउडस्पीकर से मुनादी

ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने अलग-अलग रेंजों से कर्मचारियों को बुलाकर 8 विशेष गश्ती दलों (Patrolling Teams) का गठन किया है। यह टीमें जीप, ट्रैक्टर और पैदल मार्च करते हुए खेतों के किनारों पर लगातार सायरन बजाकर पेट्रोलिंग कर रही हैं। वन विभाग के अधिकारी गांवों में लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी करवा रहे हैं और ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं।

वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए स्पष्ट एडवाइजरी जारी की है:

  • सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले अकेले खेतों की ओर जाने से पूरी तरह बचें।

  • यदि खेतों में जाना अनिवार्य हो, तो कम से कम 4-5 लोग एक साथ जाएं और हाथ में डंडा व टार्च जरूर रखें।

  • खेतों में काम करते समय मोबाइल फोन पर तेज आवाज में गाने बजाएं या आपस में जोर-जोर से बातचीत करते रहें, ताकि आवाज सुनकर जानवर दूर भाग जाए।

  • छोटे बच्चों को घरों के आहाते से बाहर अकेला न छोड़ें और पालतू मवेशियों को खुले में बांधने के बजाय बंद बाड़ों में रखें।

  • किसी भी संदिग्ध जानवर के दिखने पर खुद हमला करने या उसे घेरने की गलती न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग की हेल्पलाइन पर सूचना दें।

ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा, जल्द रेस्क्यू की मांग

इलाके के ग्राम प्रधानों और किसानों का कहना है कि तेंदुए के खौफ के कारण खेती-बाड़ी का सारा काम ठप पड़ गया है। सिंचाई और निराई का समय होने के बावजूद मजदूर खेतों में जाने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन संरक्षक से गुहार लगाई है कि अगर पिंजरों में तेंदुआ जल्द नहीं फंसता है, तो वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स और ट्रेंकुलाइजर गन (बेहोश करने वाली टीम) को बुलाकर विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जाए, ताकि किसी बड़ी जनहानि या अप्रिय घटना से पहले तेंदुए को सुरक्षित पकड़कर चिड़ियाघर या गहरे जंगलों में छोड़ा जा सके। वन विभाग के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि पूरी टीम अलर्ट मोड पर है और जल्द ही तेंदुए को रेस्क्यू कर लिया जाएगा।