यूपी में मौसमी फ्लू और वायरल को लेकर स्वास्थ्य विभाग का हाई अलर्ट: अस्पतालों में खुलेंगे अलग फीवर काउंटर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के कड़े निर्देश- दवा
मौसम में आ रहे तीव्र उतार-चढ़ाव और मौसमी बदलाव के चलते उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वायरल बुखार, इनफ्लुएंजा, खांसी-जुकाम और सांस संबंधी संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने पूरे राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने का सख्त फरमान जारी किया है। राजधानी लखनऊ स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय से लेकर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (सीएमएस) को निर्देशित किया गया है कि अस्पतालों में आने वाले किसी भी मरीज को इलाज, जांच और दवाओं के लिए भटकना न पड़े। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में फ्लू और वायरल के मरीजों के लिए अलग काउंटर, पर्याप्त बेड, जीवनरक्षक दवाएं और निर्बाध मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके और समय पर हर मरीज को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा मिल सके।
मौसमी फ्लू और वायरल संक्रमण पर यूपी में अलर्ट: अस्पतालों में शुरू होंगे अलग फीवर क्लीनिक और जांच काउंटर
बदलते मौसम के दौरान सरकारी अस्पतालों की सामान्य ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में वायरल संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक रहता है। इस क्रॉस-इंफेक्शन को रोकने के लिए डिप्टी सीएम ने सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला संयुक्त चिकित्सालयों, महिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में अलग 'फीवर हेल्प डेस्क' और अलग ओपीडी पंजीकरण काउंटर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
इस नई व्यवस्था के तहत बुखार, सर्दी-खांसी और सांस लेने में तकलीफ के लक्षणों वाले मरीजों का सामान्य ओपीडी से अलग तुरंत प्राथमिक परीक्षण (ट्राइएज) किया जाएगा। जिन मरीजों में गंभीर लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें बिना देरी किए आइसोलेशन या विशेष फीवर वार्ड में शिफ्ट कर त्वरित उपचार दिया जाएगा। इसके साथ ही पैथोलॉजी जांच के लिए भी अलग व्यवस्था की जा रही है ताकि रक्त जांच, सीबीसी (CBC), वायरल प्रोफाइल और स्वाब सैंपलिंग के लिए मरीजों को लंबी कतारों में घंटों खड़ा न रहना पड़े।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का सख्त फरमान: अस्पतालों में दवा, बेड और मेडिकल ऑक्सीजन की कमी बर्दाश्त नहीं
उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और अस्पताल निदेशकों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता या संसाधनों का अभाव मिलने पर संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने अस्पताल के केंद्रीय दवा भंडारों में जरूरी दवाओं का कम से कम 30 से 45 दिनों का बफर स्टॉक हर समय मौजूद रखने का आदेश दिया है।
अस्पतालों में एंटीवायरल दवाओं, पैरासिटामोल सिरप व टैबलेट्स, एंटी-एलर्जिक, कफ फॉर्मूलेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ORS), जीवनरक्षक एंटीबायोटिक्स, इनहेलर और नेबुलाइजर किट की उपलब्धता अनिवार्य कर दी गई है। डिप्टी सीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाएं लिखने की शिकायत मिली तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। सभी दवाएं अस्पताल परिसर के भीतर स्थित सरकारी औषधि वितरण काउंटर से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अतिरिक्त, कोविड काल के दौरान स्थापित किए गए सभी प्रेशर स्विंग एड्सॉर्प्शन (PSA) ऑक्सीजन प्लांट्स की तत्काल मॉक ड्रिल कराने और पाइपलाइन नेटवर्क के प्रेशर की दैनिक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में बैकअप के लिए भरे हुए ऑक्सीजन सिलेंडर, कंसंट्रेटर, बाईपैप (BiPAP) मशीनें और वेंटिलेटर को पूरी तरह क्रियाशील स्थिति में रखने के आदेश जारी किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में सांस के गंभीर मरीजों को त्वरित ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा सके।
75 जिलों के सीएमओ और सीएमएस को 24x7 अलर्ट रहने के निर्देश, रेफरल व्यवस्था पर कड़ी नजर
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया है कि स्थानीय स्तर पर इलाज संभव होने के बावजूद मरीजों को अनावश्यक रूप से राजधानी लखनऊ के बड़े संस्थानों (केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान) या जिला अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए। केवल अति-गंभीर और विशिष्ट उपचार की आवश्यकता वाले मामलों में ही तय प्रोटोकॉल के तहत उचित एम्बुलेंस सुविधा के साथ मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर किया जाए।
इमरजेंसी सेवाओं को चौबीसों घंटे चाक-चौबंद रखने के लिए सीएमओ और सीएमएस को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन औचक निरीक्षण करें और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की रोस्टरवार बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करें। 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं को हाई रिस्पॉन्स टाइम पर रखा गया है ताकि ग्रामीण अंचलों से कॉल आने के तुरंत बाद न्यूनतम समय में मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जा सके। जिला स्तर पर एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) की टीमों को सक्रिय कर दिया गया है, जो किसी भी क्षेत्र में फ्लू या बुखार के क्लस्टर मामलों की तुरंत मैपिंग कर निरोधात्मक कार्रवाई करेंगी।
फ्लू के लक्षण और बचाव की डॉक्टरी सलाह: बुजुर्ग, बच्चे और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग बरतें विशेष सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों के अनुसार, बदलते मौसम में इन्फ्लुएंजा ए (H1N1, H3N2), रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (RSV) और सामान्य एडेनोवायरस का प्रसार तेजी से होता है। यह वायरस हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स और दूषित सतहों को छूने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। चिकित्सा विभाग ने आम जनता के लिए परामर्श जारी करते हुए सतर्कता बरतने की अपील की है।
फ्लू और सामान्य वायरल संक्रमण के मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द व जोड़ों में जकड़न, गले में खराश, सूखी या बलगम वाली खांसी, नाक बहना, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द और कुछ मामलों में उल्टी या दस्त शामिल हैं। चिकित्सकों ने आगाह किया है कि बुखार या खांसी होने पर बिना डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक्स या पेनकिलर्स खरीदकर खाने से बचें। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया पर असर करती हैं, वायरल फ्लू पर नहीं; इनका अनियंत्रित उपयोग शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है।
वरिष्ठ चिकित्सकों ने सलाह दी है कि:
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मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (बीपी), किडनी रोग, हृदय रोग और दमा जैसी क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे मरीज और 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग विशेष सावधानी बरतें।
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भीड़भाड़ वाली जगहों और सार्वजनिक वाहनों में यात्रा करते समय मास्क का उपयोग करें।
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हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं अथवा हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
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शरीर में पानी की कमी न होने दें; गुनगुने पानी, ताजा सूप, दाल का पानी और तरल पदार्थों का पर्याप्त सेवन करें।
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यदि बुखार 3 दिन से अधिक समय तक लगातार बना रहे या सांस फूलने, सीने में दर्द व अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य ढांचे को समय रहते सक्रिय करने और मजबूत निगरानी तंत्र लागू करने से मौसमी फ्लू के प्रभाव को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि प्रदेश भर के चिकित्सालय पूरी क्षमता के साथ तैयार हैं और नागरिकों को घबराने की नहीं, बल्कि सतर्कता और सावधानी बरतने की आवश्यकता है।