लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों की गुनहगार अलीगंज की अवैध बिल्डिंग पर चलेगा बुलडोजर; LDA का बड़ा एक्शन, 4 अरेस्ट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उस तीन मंजिला अवैध व्यावसायिक इमारत को पूरी तरह से जमींदोज (गिराने) करने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है, जिसमें सोमवार को लगी भयानक आग के कारण 15 मासूम जिंदगियां खाक हो गई थीं। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस कड़े फैसले की पुष्टि की है। इसके साथ ही, एक रिहायशी (आवासीय) इमारत को नियमों को ताक पर रखकर गैर-कानूनी तरीके से कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के रूप में चलवाने वाले एलडीए के दोषी अधिकारियों पर भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
2016 में भी आया था गिराने का आदेश, लेकिन भ्रष्ट सिस्टम ने दबाई फाइल
इस मामले में जो सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक खुलासा हुआ है, उसके मुताबिक इस मौत की इमारत को गिराने का आदेश आज से 10 साल पहले यानी साल 2016 में ही जारी किया जा चुका था। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 2016 में इसके अवैध निर्माण को चिन्हित कर डिमोलिशन ऑर्डर दिया गया था, लेकिन भ्रष्ट तंत्र और मिलीभगत के चलते महज दो महीने के भीतर ही उस आदेश को रहस्यमयी तरीके से वापस ले लिया गया। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने साफ किया है कि नियमों के इस गंभीर उल्लंघन और लापरवाही को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उस दौर में शामिल रहे सभी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
एनिमेशन सेंटर के छात्रों समेत 15 की मौत, नीलेश-अनामिका की अधूरी रह गई प्रेम कहानी
सोमवार दोपहर अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित ऊषा मेहता मार्ग पर बनी इस तीन मंजिला बिल्डिंग में अचानक आग भड़क उठी थी। इस इमारत में एक नामी एनिमेशन सेंटर संचालित हो रहा था, जिसके चलते हादसे के वक्त वहां कई छात्र मौजूद थे। धुएं और आग की लपटों के कारण दम घुटने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र-छात्राएं थे, जबकि 9 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इसी हादसे में वहां काम करने वाले नीलेश और अनामिका की जिंदगी भी खत्म हो गई, जो एक-दूसरे से प्यार करते थे और इसी साल दिसंबर में शादी के बंधन में बंधने वाले थे।
पुलिस एक्शन: बिल्डिंग मालिक समेत 4 गिरफ्तार, 4 बड़े अधिकारी सस्पेंड
इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन एक्शन मोड में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक चार मुख्य आरोपियों- रामकृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, शासन स्तर पर बड़ी गाज गिराते हुए बिजली विभाग, अग्निशमन (फायर) विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के चार जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।
योगी सरकार का सख्त रुख: दो सदस्यीय हाई-लेवल SIT करेगी मामले की जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस पूरे अग्निकांड की तह तक जाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस दो सदस्यीय एसआईटी में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) लखनऊ जोन, प्रवीण तिवारी शामिल हैं। यह हाई-प्रोफाइल कमेटी घटना के हर पहलू, अवैध निर्माण की टाइमलाइन, फायर एनओसी की स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही की गहनता से जांच कर शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।