लखनऊ को जाम से मिलेगी मुक्ति: 4 प्रमुख स्थानों पर बनेगी बहुमंजिला और भूमिगत पार्किंग
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को विश्वस्तरीय और जाम-मुक्त शहर बनाने की दिशा में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा योजना पर काम तेज कर दिया है। शहर के तेजी से बढ़ते दायरे, वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और व्यस्ततम वाणिज्यिक केंद्रों में पार्किंग की भारी किल्लत को देखते हुए एलडीए ने शहर के चार सबसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अत्याधुनिक बहुमंजिला (मल्टीलेवल) और भूमिगत (अंडरग्राउंड) पार्किंग सुविधाओं के निर्माण का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, राजधानी के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक परिदृश्य को नई पहचान देने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम को समर्पित एक भव्य 'वार म्यूजियम' (शौर्य स्मारक व सैन्य संग्रहालय) की स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एलडीए उपाध्यक्ष और तकनीकी विंग के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन सभी परियोजनाओं की विस्तृत कार्ययोजना (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
किन चार चिन्हित स्थानों पर बनेगी बहुमंजिला और भूमिगत पार्किंग?
शहर के प्रमुख बाजारों और प्रशासनिक गलियारों में वाहनों के अनियंत्रित जमावड़े को समाप्त करने के लिए एलडीए ने चार प्रमुख स्थलों का चयन किया है:
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हजरतगंज और कैसरबाग परिधि: राजधानी के इस ऐतिहासिक और सबसे व्यस्त वाणिज्यिक इलाके में प्रतिदिन हजारों वाहन आते हैं। यहां सड़कों पर अवैध पार्किंग से लगने वाले भीषण जाम से निपटने के लिए एक आधुनिक भूमिगत पार्किंग का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें ऊपरी सतह पर हरित क्षेत्र (ग्रीन पार्क) विकसित रहेगा।
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गोमती नगर व विभूति खंड वाणिज्यिक हब: हाई-राइज कॉर्पोरेट दफ्तरों, होटलों और अस्पतालों के चलते विभूति खंड में पार्किंग की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। यहां एक विशाल मल्टीलेवल कार पार्किंग बनाई जाएगी, जिसमें सैकड़ों चार पहिया और दो पहिया वाहनों को पार्क करने की क्षमता होगी।
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चारबाग-अमीनाबाद कनेक्टिंग कॉरिडोर: लखनऊ के सबसे घने व्यापारिक और रेलवे स्टेशन से सटे इलाके में खरीददारों और व्यापारियों को राहत देने के लिए एक बहुमंजिला पार्किंग संरचना तैयार की जाएगी।
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चौक व पुराना लखनऊ हेरिटेज जोन: चिकित्सा संस्थानों (केजीएमयू) और पुराने बाजारों के संगम स्थल पर वाहनों के सुगम ठहराव के लिए अंडरग्राउंड-कम-सरफेस पार्किंग की योजना बनाई गई है ताकि ऐतिहासिक धरोहरों के दृश्य को नुकसान पहुंचाए बिना पार्किंग क्षमता जुटाई जा सके।
सेना के पराक्रम का गवाह बनेगा 'वार म्यूजियम', आधुनिक तकनीक से सजेगा शौर्य
पार्किंग परियोजनाओं के साथ-साथ एलडीए का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आकर्षण प्रस्तावित 'वार म्यूजियम' (सैन्य संग्रहालय) होगा। यह संग्रहालय भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के ऐतिहासिक युद्धों, ऑपरेशन्स और अमर बलिदानियों की वीरगाथाओं को जीवंत रूप में प्रदर्शित करेगा। संग्रहालय में वास्तविक तोपें, पुराने लड़ाकू विमानों के मॉडल्स, सैन्य साजो-सामान और युद्ध में इस्तेमाल किए गए टैंक प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अलावा, नई पीढ़ी को देशभक्ति और भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराने के लिए 3D/4D वर्चुअल रियलिटी (VR) ऑडियो-विजुअल गैलरी, इंटरएक्टिव डिजिटल स्क्रीन और लाइट-एंड-साउंड शो का विशेष प्रावधान भी रखा गया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय और मध्य कमान (सेंट्रल कमांड) के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
ईवी चार्जिंग, रूफटॉप सोलर और स्मार्ट पार्किंग मैनेजमेंट से लैस होंगी सुविधाएं
एलडीए द्वारा तैयार किए जा रहे नए पार्किंग स्ट्रक्चर्स केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं होंगे, बल्कि उन्हें 'ग्रीन एंड स्मार्ट मोबिलिटी' मानकों पर ढाला जा रहा है:
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फास्टैग और ऑटोमेटेड टिकटिंग: सभी पार्किंग परिसरों में मैन्युअल पर्चियों के बजाय फास्टैग-बेस्ड ऑटोमैटिक बूम बैरियर्स और नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे ताकि प्रवेश और निकास पर समय न लगे।
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इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रत्येक पार्किंग में न्यूनतम 10 से 15 प्रतिशत स्लॉट्स को डेडिकेटेड फास्ट ईवी चार्जिंग स्टेशनों से सुसज्जित किया जाएगा।
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रूफटॉप सोलर पैनल्स: बहुमंजिला पार्किंग की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे पार्किंग की आंतरिक लाइटिंग, वेंटिलेशन और लिफ्ट के संचालन के लिए आवश्यक बिजली की आपूर्ति हो सकेगी।
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कमर्शियल स्पेस व कैफेटेरिया: संचालन की वित्तीय आत्मनिर्भरता (वायबिलिटी) सुनिश्चित करने के लिए पार्किंग भवनों के ग्राउंड या रूफटॉप स्तर पर छोटे कैफेटेरिया और कियोस्क की जगह भी दी जाएगी।
शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प, जल्द जारी होंगी निविदाएं
एलडीए की इंजीनियरिंग विंग ने चयनित सभी चारों स्थलों का प्रारंभिक भू-सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली के खंभे, सीवर और पेयजल लाइनें) का खाका तैयार किया जा रहा है। वित्तीय अनुमोदन मिलते ही विकासकर्ता एजेंसियों के चयन के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद राजधानी की मुख्य सड़कों पर 'नो-पार्किंग' नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराना संभव हो सकेगा, जिससे फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित होंगे और शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली प्रमुख सड़कों पर 15 से 20 प्रतिशत तक वाहनों की गतिशीलता में सुधार होगा।