Mission 2027: यूपी के अनुपूरक बजट में योगी सरकार का पूर्वांचल पर 'मेगा फोकस', विंध्य एक्सप्रेस-वे, ग्रामीण विकास और रोजगार के लिए खुला खजाना, जानें आपके जिले को क्या मिला?
अगर हम पिछले कुछ चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो पूर्वांचल का राजनीतिक मिजाज काफी बदलता हुआ नजर आया है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने पूर्वांचल में क्लीन स्वीप करते हुए 41 सीटों पर कब्जा जमाया था। इसमें से अकेले भाजपा ने 34 सीटें जीती थीं। लेकिन, 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जोरदार वापसी की और 31 सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया। 2022 में भाजपा गठबंधन केवल 29 सीटों पर सिमट गया था। हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में भी पूर्वांचल में विपक्ष ने कड़ी टक्कर दी। इसी नुकसान की भरपाई करने और 2027 के विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति को अभेद्य बनाने के लिए, योगी सरकार ने अनुपूरक बजट का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्वांचल की झोली में डाल दिया है।
बुनियादी ढांचे का महाजाल: 70 प्रतिशत बजट इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम
उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे स्टेट बनाने की दिशा में सरकार ने अनुपूरक बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा (करीब 41,620 करोड़ रुपये) सिर्फ बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं के लिए आरक्षित किया है। इसमें सबसे बड़ी घोषणा पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के लिए की गई है।
-
विन्ध्य एक्सप्रेस-वे का निर्माण: गंगा एक्सप्रेस-वे का विस्तार करते हुए प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, और चंदौली से होते हुए सोनभद्र तक एक नया 'विन्ध्य एक्सप्रेस-वे' बनाया जाएगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्यों हेतु 6500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया गया है।
-
लिंक एक्सप्रेस-वे: विंध्य एक्सप्रेस-वे को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए सोनभद्र से शुरू होकर चंदौली और गाजीपुर तक एक नया लिंक एक्सप्रेस-वे भी बनेगा। इसके लिए 2300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
-
जेवर और आगरा कनेक्टिविटी: राज्य के पश्चिमी हिस्से को भी जोड़ने के लिए जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेस-वे से कनेक्ट करने हेतु 250 करोड़ रुपये और आगरा एक्सप्रेस-वे को गंगा एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।
इन नई सड़कों और एक्सप्रेस-वे के किनारे बनने वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि स्थानीय (Local SEO) स्तर पर व्यापार और रियल एस्टेट को भी जबरदस्त बूम मिलेगा।
सोशल इंजीनियरिंग: दलित वोटरों को साधने की स्पष्ट रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कमजोर होने के बाद दलित वोटरों का एक बड़ा हिस्सा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) की तरफ शिफ्ट हो गया था। सरकार 2027 से पहले इस कमी को दूर करना चाहती है। इसी कड़ी में अनुपूरक बजट में 'डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना' के लिए 407 करोड़ रुपये का बड़ा बजट प्रस्तावित किया गया है। इस विशाल धनराशि का उपयोग प्रदेश भर में संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर और समाज के अन्य प्रमुख दलित महापुरुषों की भव्य मूर्तियां स्थापित करने और उनके स्मारकों के विकास में किया जाएगा। यह कदम सीधे तौर पर सामाजिक सद्भाव और दलित समुदाय को सरकार के साथ जोड़ने की एक मजबूत वैचारिक पहल मानी जा रही है।
ग्राम्य विकास और रोजगार: वीबी-जीराम-जी (VB-Jiram-G) योजना से खुलेगा खजाना
भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और यूपी सरकार का यह बजट इस बात को पूरी तरह से प्रमाणित करता है। अनुपूरक बजट की कुल राशि का लगभग 28 फीसदी हिस्सा केवल ग्राम्य विकास (Rural Development) को समर्पित किया गया है।
इसमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है 'वीबी-जीरामजी योजना', जिसके लिए 1300 करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रस्तावित है। आपको बता दें कि यह योजना केंद्र की मनरेगा (MGNREGA) की तर्ज पर या उसके विकल्प के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करने के लिए लाई जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस योजना के सबसे अधिक संभावित लाभार्थी पूर्वांचल के ग्रामीण इलाकों से ही आते हैं। इस योजना के धरातल पर उतरने से गांवों से होने वाला पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार की गारंटी मिल सकेगी।
युवा, शिक्षा और स्मार्ट गांव: छात्रवृत्ति से लेकर डिजिटल लाइब्रेरी तक
योगी सरकार ने युवाओं के कौशल विकास और शिक्षा के आधुनिकीकरण पर भी विशेष जोर दिया है। सामान्य वर्ग (General Category) के गरीब और आश्रित छात्रों को राहत देते हुए दशमोत्तर (Post-Matric) छात्रवृत्ति के लिए 155 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट रखा गया है।
-
कौशल विकास: तकनीकी शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने के लिए प्रदेश के 31 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (Center of Excellence) बनाए जा रहे हैं। इसके लिए अनुपूरक बजट में 382 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राजकीय पॉलिटेक्निक के सामान्य विकास के लिए 101 करोड़ रुपये अलग से दिए गए हैं।
-
डिजिटल गांव: शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर छात्रों के लिए आधुनिक 'डिजिटल लाइब्रेरी' की स्थापना की जाएगी। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे ग्रामीण युवाओं को शहरों की तरफ नहीं भागना पड़ेगा।
-
मुख्यमंत्री ग्राम सौर योजना: ग्रामीण रास्तों और चौराहों को रोशन करने के लिए सरकार एक नई पहल 'मुख्यमंत्री ग्राम सौर योजना' शुरू करने जा रही है, जिसके तहत गांवों में बड़े पैमाने पर सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी।