करोड़ों की जमीन के लिए मां का नाम तक बदला: कांग्रेस नेता की पैतृक संपत्ति पर फर्जी वसीयत का बड़ा खेल उजागर

करोड़ों की जमीन के लिए मां का नाम तक बदला: कांग्रेस नेता की पैतृक संपत्ति पर फर्जी वसीयत का बड़ा खेल उजागर

जमीन के बढ़ते दामों ने रिश्तों और कानूनी व्यवस्था दोनों को ताक पर रख दिया है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता की पैतृक और अत्यंत मूल्यवान संपत्ति को कब्जाने के लिए भू-माफिया और जालसाजों के एक गिरोह ने दुस्साहस की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। संपत्ति को अपने नाम कराने के अंधे लालच में आरोपियों ने न केवल जाली दस्तावेज गढ़े, बल्कि सरकारी राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर कांग्रेस नेता की मां का नाम तक बदल डाला। इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक महकमे और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब पीड़ित पक्ष को इस गहरी साजिश की भनक लगी, तब मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं और अब यह मामला पुलिस व प्रशासनिक जांच के केंद्र में आ गया है।

प्रारंभिक जांच और दर्ज शिकायत के अनुसार, संबंधित संपत्ति शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र से सटी होने के कारण करोड़ों रुपये मूल्य की है। इस भूखंड पर लंबे समय से स्थानीय भू-माफियाओं की नजर गड़ी हुई थी। जब सीधे तौर पर जमीन की खरीद-फरोख्त संभव नहीं दिखी, तो आरोपियों ने प्रशासनिक मिलीभगत से कागजी हेरफेर का रास्ता चुना। जालसाजों ने तहसील स्तर पर मिलीभगत कर मूल रिकॉर्ड्स को विकृत करने का काम शुरू किया, ताकि भविष्य में होने वाली कानूनी जांच से बचा जा सके।

कागजों में रची गई खौफनाक साजिश: ऐसे बदला गया मां का नाम

जालसाजी की रूपरेखा इतनी शातिराना थी कि किसी सामान्य व्यक्ति के लिए इसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल था। आरोपियों ने सबसे पहले संबंधित राजस्व अभिलेखों, खतौनी और परिवार रजिस्टर में हेरफेर करने की योजना बनाई। कांग्रेस नेता के परिवार की वंशावली में सेंध लगाते हुए जालसाजों ने अभिलेखों में उनकी स्वर्गीय माता का नाम बदलकर एक काल्पनिक महिला का नाम दर्ज करवा दिया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि भविष्य में जब फर्जी वसीयत पेश की जाए, तो कागजी तौर पर वारिसानों की कड़ी उस नकली महिला से जुड़ सके।

इस काम को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर सक्रिय नोटरी, कथित गवाहों और तहसील के कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ का सहारा लिया गया। पुराने रजिस्टरों के पन्नों पर कटिंग और ओवरराइटिंग की गई। कई जगहों पर पुराने पन्नों को फाड़कर हूबहू दिखने वाले नए पन्ने चस्पा करने का अंदेशा भी जताया जा रहा है। राजस्व विभाग के डिजिटल पोर्टल पर भी बैकडेट में एंट्री चढ़ाने की कोशिश की गई, जिससे यह साबित किया जा सके कि जमीन का मालिकाना हक दशकों पहले ही दूसरे पक्ष के पास चला गया था।

जाली वसीयत का चक्रव्यूह: नोटरी और गवाहों का संदिग्ध गठजोड़

कागजों में नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी होते ही जालसाजों ने अपने खेल का दूसरा चरण शुरू किया। एक पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत वसीयतनामा तैयार किया गया। इस वसीयत में यह दावा किया गया कि मूल भूमि स्वामिनी ने अपने जीवनकाल के अंतिम दिनों में अपनी पूरी संपत्ति अपनी तथाकथित 'सेवा' करने वाले एक बाहरी व्यक्ति के नाम कर दी थी। वसीयत पर अंगूठे के निशान और जाली हस्ताक्षर बनाए गए, जो मृतका के वास्तविक हस्ताक्षरों से बिल्कुल मेल नहीं खाते।

इस फर्जी दस्तावेज को प्रामाणिक रूप देने के लिए एक ऐसे नोटरी से तस्दीक कराई गई, जिसकी भूमिका पहले भी कई विवादित मामलों में संदिग्ध रही है। वसीयत में जिन गवाहों के नाम और पते दर्ज किए गए, वे या तो फर्जी पाए गए या फिर भू-माफिया के ही भाड़े के प्यादे निकले। इस वसीयत के आधार पर आरोपियों ने गुपचुप तरीके से दाखिल-खारिज (नामांतरण) की प्रक्रिया भी शुरू करवा दी थी, ताकि जमीन को तुरंत किसी तीसरे पक्ष को बेचकर रकम हड़पी जा सके और मामले को दीवानी अदालत के लंबे मुकदमों में उलझा दिया जाए।

पीड़ित परिवार को कैसे हुई भनक: साजिश का हुआ भंडाफोड़

इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश तब हुआ जब कांग्रेस नेता के परिजनों ने नियमित प्रक्रिया के तहत अपनी खतौनी और राजस्व नकल निकलवाई। सरकारी पोर्टल पर अपनी पैतृक जमीन के विवरण में मां का नाम बदला हुआ देखकर उनके होश उड़ गए। जब तहसील कार्यालय जाकर पड़ताल की गई, तो पता चला कि उस जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम नामांतरण की अर्जी भी लग चुकी है और आपत्ति दर्ज करने की मियाद खत्म होने वाली थी।

समय रहते साजिश की भनक लगते ही कांग्रेस नेता ने तुरंत आला प्रशासनिक अधिकारियों, जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान से संपर्क साधा। उन्होंने अपनी माता के मूल पहचान पत्र, पुराने बैनामे, नगर निगम के टैक्स की रसीदें और मूल पारिवारिक दस्तावेज प्रस्तुत कर साबित किया कि उनके परिवार के साथ संगठित स्तर पर धोखाधड़ी की गई है। दस्तावेजों का मिलान होते ही अधिकारियों के पैरों तले भी जमीन खिसक गई, क्योंकि यह स्पष्ट था कि विभाग के अंदरूनी सहयोग के बिना इतना बड़ा हेरफेर संभव नहीं था।

प्रशासन का कड़ा रुख: आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी

मामले की गंभीरता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और क्षेत्राधिकारी (सीओ) की एक संयुक्त जांच टीम गठित कर दी है। राजस्व रिकॉर्ड्स की फोरेंसिक जांच कराने का भी निर्णय लिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी रजिस्टरों में स्याही और लिखावट किस समय की है।

पुलिस ने प्राथमिक जांच के आधार पर मुख्य सूत्रधार, जाली वसीयत के तथाकथित लाभार्थी, फर्जी गवाहों और अज्ञात राजस्व कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत धोखाधड़ी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने, रिकॉर्ड नष्ट करने और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। इसके साथ ही, विवादित जमीन के किसी भी प्रकार के क्रय-विक्रय और नामांतरण प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।