भारतीय सेना के हाथों लश्कर कमांडर मूसा के ढेर होने के बाद पाकिस्तान का नया फर्जीवाड़ा
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के संयुक्त कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का कुख्यात और वांछित आतंकी कमांडर मूसा मारा गया। खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने उसके ठिकाने की सख्त घेराबंदी की थी। जवानों द्वारा आत्मसमर्पण का अवसर दिए जाने के बावजूद उसने ऑटोमैटिक हथियारों से भीषण गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने त्वरित जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही ढेर कर दिया।
मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में एके-सीरीज की असॉल्ट राइफलें, मैगजीन, जिंदा कारतूस, अत्याधुनिक ग्रेनेड और सीमा पार से संचालित संचार उपकरण बरामद किए गए। मारे गए आतंकी कमांडर की पहचान स्थानीय खुफिया इनपुट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और तकनीकी निगरानी के जरिए पुख्ता तौर पर लश्कर कमांडर मूसा के रूप में हुई। यह आतंकी घाटी में टारगेटेड किलिंग्स, सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों की साजिश और युवाओं को बरगलाकर आतंकी नेटवर्क में धकेलने के कई मामलों में लंबे समय से वांछित था।
चारों खाने चित होने के बाद पाकिस्तान की नई चाल: मैदान में उतारा 'नकली मूसा'
घाटी में सुरक्षा बलों के आक्रामक अभियान से अपने शीर्ष कमांडर के मारे जाने और आतंकी नेटवर्क को करारा झटका लगने के बाद सीमा पार बैठे उसके आकाओं में भारी खलबली मच गई है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और लश्कर के प्रोपेगैंडा सेल ने इस नाकामी पर पर्दा डालने और बचे हुए कैडरों का गिरता मनोबल थामने के लिए एक 'नकली मूसा' को कैमरे के सामने पेश करने की नई साजिश रची है।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया तंत्र और छद्म डिजिटल प्रोफाइल्स के जरिए एक वीडियो और ऑडियो क्लिप जारी की गई है, जिसमें एक नकाबपोश शख्स खुद को जिंदा मूसा बताते हुए भारतीय सेना की कार्रवाई को झूठा साबित करने की कोशिश कर रहा है। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की शारीरिक बनावट, कद-काठी और आवाज मारे गए आतंकी कमांडर के वास्तविक डेटा से कतई मेल नहीं खाती। खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान यह मनगढ़ंत नैरेटिव इसलिए गढ़ रहा है ताकि घाटी में सक्रिय उसके स्लीपर सेल्स में बिखराव न हो और सीमा पार से आतंकी चंदा जुटाने का जरिया बंद न पड़े।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच में बेनकाब हुआ पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा
भारतीय रक्षा और तकनीकी खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे इस तथाकथित वीडियो की डिजिटल फॉरेंसिक पड़ताल की, जिसमें पाकिस्तानी एजेंसियों की पोल पूरी तरह खुल गई। जांच से साफ हुआ कि इस फर्जी वीडियो को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित एक सेफ हाउस में तैयार किया गया और बॉट्स व वीपीएन (VPN) नेटवर्क के जरिए सोशल मीडिया पर ट्रेंड कराने की कोशिश की गई। ऑडियो फ्रीक्वेंसी और स्पीच एनैलिसिस से यह साबित हो गया कि बोलने वाला कोई डमी शख्स है जिसे पहले से तैयार स्क्रिप्ट रटवाई गई थी।
यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान ने अपने आतंकियों के ढेर होने के बाद इस तरह का ढोंग रचा हो। जब भी भारतीय सेना सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करती है और बड़े आतंकी चेहरों का खात्मा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकी सुरक्षित पनाहगाह होने के आरोपों से बचने और अपनी घरेलू जनता को भ्रमित रखने के लिए पाकिस्तानी तंत्र पुराने वीडियो एडिट करने या किसी हमशक्ल को पेश करने का पुराना हथकंडा अपनाता रहा है।
जीरो टॉलरेंस पर भारतीय सुरक्षा बल: घुसपैठ के सभी रास्ते सील
भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ लफ्जों में कहा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी, साक्ष्य-आधारित और पेशेवर मानकों के अनुरूप है। लश्कर कमांडर मूसा के अंत के साथ ही उसके स्थानीय नेटवर्क की कमर टूट गई है। नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर घुसपैठ की हर संभावित कोशिश को नाकाम करने के लिए मल्टी-टियर सर्विलांस, नाइट विजन डिवाइसेज और एंटी-ड्रोन ग्रिड को और मजबूत कर दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियां अब उन डिजिटल अकाउंट्स और सोशल मीडिया नेटवर्क की भी पहचान कर रही हैं जो सीमा पार से फैलाए जा रहे इस फर्जी प्रोपेगैंडा को आगे बढ़ाने में लगे थे। भारतीय सेना ने स्पष्ट संदेश दिया है कि घाटी की शांति, सुरक्षा और स्थिरता को निशाना बनाने वाले आतंकियों और उनके विदेशी आकाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।