अयोध्या मछली भोज विवाद में नया सियासी भूचाल: सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का केस करने कोर्ट पहुंचे यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय

अयोध्या मछली भोज विवाद में नया सियासी भूचाल: सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का केस करने कोर्ट पहुंचे यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय

उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या के बहुचर्चित 'मछली भोज' को लेकर चल रही जुबानी जंग अब अदालत की चौखट तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने के लिए मंगलवार को लखनऊ सिविल कोर्ट और एमपी-एमएलए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अजय राय ने अपने अधिवक्ता के जरिए कोर्ट में मानहानि का प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक मंच से उन पर और उनकी धार्मिक आस्था पर पूरी तरह से मनगढ़ंत, भ्रामक और तथ्यहीन आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री के इस बयान को राष्ट्रीय स्तर पर टीवी चैनलों, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों ने देखा, जिससे समाज, परिवार और राजनीतिक क्षेत्र में उनकी छवि को गंभीर आघात पहुंचा है। इस अप्रत्याशित कानूनी कदम के बाद राजधानी लखनऊ से लेकर पूरे प्रदेश के सियासी हलकों में जबरदस्त हलचल मच गई है।

रायबरेली की जनसभा में सीएम योगी का तीखा हमला: 'मंदिर में राम-राम और बाहर मछली की दावत'

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि अयोध्या में कांग्रेस के एक कार्यक्रम से जुड़ी है, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 अगस्त को रायबरेली में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान कांग्रेस और अजय राय पर सीधा हमला बोला था। सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा था कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अयोध्या में पहले हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन-पूजन करते हैं, माथे पर तिलक और चंदन लगाते हैं और फिर बाहर निकलते ही मछली की दावत उड़ाते हैं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा था कि यह दोगलापन देखकर गिरगिट भी शरमा जाएगा कि मंदिर में राम-राम जपना और बाहर आकर मछली का लुत्फ उठाना कैसी मानसिकता है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अजय राय के पुराने राजनीतिक इतिहास पर निशाना साधते हुए यह भी आरोप लगाया था कि जब माफिया ने उनके भाई की हत्या की थी, तब वे उस माफिया के आगे नतमस्तक हो गए थे और गवाही तक नहीं दी थी। सीएम योगी के इन बयानों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई थी।

'मैं बाबा विश्वनाथ का भक्त और शुद्ध शाकाहारी हूं' अजय राय का खुला पत्र और संन्यास की चुनौती

मुख्यमंत्री के आरोपों के जवाब में अजय राय ने पहले एक खुला पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी और आरोपों को सिरे से खारिज किया था। अजय राय का कहना है कि वे काशी की धरती से आते हैं, बाबा विश्वनाथ के अनन्य भक्त हैं और आजीवन शुद्ध शाकाहारी रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी कि यदि उनके मछली खाने का कोई भी प्रमाणित वीडियो, फोटो या साक्ष्य मौजूद है तो उसे देश के सामने लाया जाए। अजय राय ने यहां तक घोषणा की थी कि अगर यह आरोप साबित हो जाता है तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। कोर्ट में दायर याचिका में अजय राय ने कहा कि बिना किसी सच्चाई की पड़ताल किए एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री द्वारा ऐसा झूठा लांछन लगाना सनातन धर्म की उनकी आस्था और व्यक्तिगत आचरण का खुला अपमान है, जिसके चलते उन्हें समाज में निरंतर स्पष्टीकरण देने के लिए विवश होना पड़ा है।

निषाद समाज का पारंपरिक कार्यक्रम और सावन में भोजन को लेकर सियासी घमासान

यह समूचा विवाद 23 अगस्त को अजय राय के अयोध्या दौरे के बाद उपजा था। अजय राय पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त और अन्य नेताओं के साथ अयोध्या पहुंचे थे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी में दर्शन कर हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इसके बाद वे अयोध्या के तारून क्षेत्र में कांग्रेस नेता राम निहाल निषाद द्वारा आयोजित निषाद समाज के एक सम्मेलन में शामिल होने गए थे। अजय राय का कहना है कि निषाद समाज का जीवन और आजीविका मत्स्य पालन और नदी संस्कृति से जुड़ी है। सम्मेलन समाप्त होने के बाद आयोजकों ने अपने समाज के लोगों के लिए पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मत्स्य भोज का प्रबंध किया था। अजय राय ने स्पष्ट किया कि वे केवल कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शामिल हुए थे और उन्होंने वहां कोई मांसाहार नहीं किया। वहीं, भाजपा नेताओं ने सावन के पवित्र महीने में अयोध्या की पावन धरा पर मछली के आयोजन को सनातन संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का घोर अनादर करार दिया था।

भाई अवधेश राय हत्याकांड और माफिया के आगे झुकने के आरोपों पर भी अदालत में तकरार

अजय राय ने अपनी मानहानि याचिका में भाई अवधेश राय हत्याकांड से जुड़े मुख्यमंत्री के बयानों पर भी कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराई है। अजय राय ने कहा कि 3 अगस्त 1991 को वाराणसी में उनके बड़े भाई अवधेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस हत्याकांड के मुख्य चश्मदीद गवाह वे स्वयं थे और उन्होंने बिना किसी भय या दबाव के अदालत में माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ डटकर गवाही दी थी। उन्होंने 32 वर्षों तक न्यायिक अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने मुख्तार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई। अजय राय ने कहा कि जिस मामले में उन्होंने अपने जीवन को खतरे में डालकर माफिया के खिलाफ गवाही दी और सजा दिलाई, उस पर यह कहना कि उन्होंने माफिया के आगे घुटने टेके, उनकी शहादत, निष्ठा और आत्मसम्मान पर गहरा कुठाराघात है। इसी कारण वे न्याय की गुहार लगाने न्यायालय पहुंचे हैं।

यूपी की सियासत में 2027 चुनाव से पहले सियासी तपिश: कानूनी दांवपेच और राजनीतिक नफा-नुकसान

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच इस विवाद का कानूनी रूप लेना राज्य की सियासत को और अधिक आक्रामक बना रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस इस मुद्दे को अपनी धार्मिक शुचिता, पिछड़े निषाद समाज के स्वाभिमान और सरकार के कथित राजनीतिक दुर्भावना से जोड़कर भुनाने की कोशिश में है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसे कांग्रेस के कथित छद्म हिंदुत्व और सांस्कृतिक दोहरेपन का प्रतीक बताकर घेर रही है। लखनऊ की अदालत अब इस मामले में कानूनी दलीलों, गवाहों के बयानों और प्राथमिक साक्ष्यों का परीक्षण करेगी। यदि अदालत इस मानहानि याचिका को विचारार्थ स्वीकार करती है, तो आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय और कांग्रेस नेतृत्व के बीच का यह टकराव प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक हर धरातल पर और गहराएगा।

 

Latest Posts