ओवैसी का 'अब्दुल' वाला तंज: विपक्षी दलों (खासकर सपा और कांग्रेस) पर साधा सीधा निशाना
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। बहराइच और श्रावस्ती के अपने दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि तथाकथित 'सेक्युलर' विपक्षी पार्टियां मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती आई हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष की राजनीति यही चाहती है कि 'अब्दुल' सिर्फ रैलियों में दरी बिछाए, नेताओं के लिए जिंदाबाद के नारे लगाए, चुपचाप वोट डाले और फिर अपने घर चला जाए।
वोट बैंक की राजनीति पर कड़ा प्रहार और हिस्सेदारी की मांग
असदुद्दीन ओवैसी ने साफ लफ्जों में कहा कि अब वह दौर बीत चुका है जब मुस्लिम समुदाय को केवल चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने कहा कि जब तक किसी कौम की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज और नेतृत्व नहीं होगा, तब तक उसके मुद्दों का कोई समाधान नहीं निकलेगा। ओवैसी ने ऐलान किया कि अब 'अब्दुल' सिर्फ दूसरों के लिए दरी नहीं बिछाएगा, बल्कि लोकतंत्र और सत्ता में अपनी बराबर की राजनीतिक हिस्सेदारी और हक हासिल करेगा। उन्होंने समुदाय से अपील की कि वे किसी के बंधुआ वोटर बनने के बजाय अपनी खुद की राजनीतिक ताकत को पहचानें और एकजुट हों।
'बीजेपी की बी-टीम' वाले आरोपों पर ओवैसी का पलटवार
विपक्षी दलों द्वारा AIMIM को लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'बी-टीम' बताए जाने के आरोपों पर भी ओवैसी ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने विपक्ष से सीधा सवाल पूछते हुए कहा:
"अगर AIMIM भाजपा की बी-टीम है, तो फिर 2014, 2017, 2022 और 2024 के चुनावों में इन विपक्षी दलों को हार का सामना क्यों करना पड़ा? विपक्ष अपनी चुनावी नाकामियों और कमजोरियों को छिपाने के लिए हमेशा हमारी पार्टी पर ठीकरा फोड़ता है। सच्चाई यह है कि ये पार्टियां न तो खुद भाजपा को हरा पा रही हैं और न ही किसी तीसरे विकल्प को उभरने देना चाहती हैं।"
प्रदेश में कथित अन्याय और मुद्दों पर घेरा
अपने भाषण में ओवैसी ने राज्य में मुसलमानों के खिलाफ हो रहे कथित अत्याचारों, प्रशासनिक कार्रवाइयों और मस्जिदों के मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब समुदाय पर संकट आता है या कानूनी लड़ाइयां लड़ी जाती हैं, तब ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल चुप्पी साध लेते हैं। ओवैसी ने यह भी दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सबसे पहले उनकी पार्टी ही अदालत का दरवाजा खटखटाने आगे आई थी।
यूपी की सियासत में नया समीकरण बनाने की कवायद
पूर्वांचल और तराई के इलाकों में ओवैसी के इस दौरे और उनके बयानों को उत्तर प्रदेश में AIMIM के संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा' जैसा बयान देकर ओवैसी सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस आक्रामक रुख से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन के भीतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व और सीटों के बंटवारे को लेकर नया राजनीतिक घमासान छिड़ना तय माना जा रहा है।