UPSWAN 3.0: ई-ऑफिस से जुड़ेंगे यूपी के सभी विकास भवन और कमिश्नर दफ्तर, ₹117 करोड़ से बदलेगा डिजिटल ढांचा
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, गति और कागजी पत्राचार के बोझ को समाप्त करने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। राज्य के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक डिजिटल तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क के तीसरे संस्करण यानी UPSWAN-3.0 को धरातल पर उतारने की आधिकारिक तैयारी शुरू कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अमल में आते ही प्रदेश के सभी 75 विकास भवन और 18 मंडलायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय हाई-स्पीड सुरक्षित डेटा कनेक्टिविटी और ई-ऑफिस (e-Office) सिस्टम से पूरी तरह जुड़ जाएंगे। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने इस पूरे नेटवर्क अपग्रेडेशन के लिए करीब 117 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित करते हुए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी जिम्मेदारी राज्य की नोडल एजेंसी यूपीडेस्को (UPDESCO) को सौंपी गई है।
1348 नए पॉइंट्स का विस्तार और डबल लाइन इमरजेंसी बैकअप
वर्तमान में साल 2019 से संचालित हो रहा यूपी-स्वान-2.0 नेटवर्क आधुनिक समय की बढ़ती डिजिटल जरूरतों और वर्कलोड के लिहाज से नाकाफी साबित हो रहा था। मौजूदा व्यवस्था के तहत राज्य मुख्यालय, 75 जिला मुख्यालय, 235 तहसीलें और 574 ब्लॉक मुख्यालयों समेत कुल 885 पॉइंट्स ही कनेक्टेड थे। शासन के इस नए फैसले के बाद नेटवर्क का दायरा 885 से बढ़ाकर 1348 पॉइंट्स तक पहुंचाया जाएगा। शेष बची सभी 116 तहसीलें और 254 ब्लॉक मुख्यालय भी सीधे राज्य, कमिश्नरी और जिला मुख्यालयों से डिजिटल रूप से जुड़ जाएंगे।
इस अपग्रेडेशन की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत इसका नेटवर्क आर्किटेक्चर है। अब तक सरकारी कार्यालय सिंगल सोर्स लाइन पर निर्भर थे, जिससे नेटवर्क डाउन होने या स्पीड कम होने पर कामकाज ठप हो जाता था। यूपी-स्वान-3.0 के तहत सभी प्रशासनिक केंद्रों को डबल लाइन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इनमें से एक लाइन नियमित संचालन के लिए होगी, जबकि दूसरी लाइन आपातकालीन बैकअप (इमरजेंसी लाइन) के रूप में काम करेगी। इस व्यवस्था से किसी भी तकनीकी खराबी के दौरान भी ऑनलाइन सेवाएं, ई-ऑफिस और फाइल ट्रांसफर की प्रक्रिया निर्बाध रूप से चालू रहेगी।
आम जनता को सीधा फायदा: प्रमाणपत्र, पेंशन और राशन कार्ड सेवाओं में आएगी तेजी
प्रशासनिक कार्यालयों में ई-ऑफिस लागू होने का सीधा असर धरातल पर आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ेगा। अब तक विकास भवनों और कमिश्नर दफ्तरों के इस नेटवर्क से सीधे न जुड़े होने के कारण विकास कार्यों की फाइलों, योजनाओं की वित्तीय स्वीकृतियों और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में लंबा वक्त लगता था।
इस नए हाई-स्पीड नेटवर्क के सक्रिय होने के बाद:
-
जाति, आय, निवास जैसे जरूरी प्रमाणपत्र जारी करने की गति दोगुनी हो जाएगी।
-
वृद्धावस्था, विधवा व दिव्यांग पेंशन के आवेदनों और राशन कार्ड सत्यापन में लगने वाला समय काफी घट जाएगा।
-
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष और अन्य सरकारी वित्तीय सहायता योजनाओं की राशि सीधे और तेजी से लाभार्थियों तक पहुंच सकेगी।
-
सरकारी विभागों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग, वॉयस कॉलिंग और हाई-डेफिनिशन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सेवाएं और अधिक मजबूत होंगी।
नेक्स्ट-जेनरेशन साइबर सुरक्षा और स्टेट डेटा सेंटर से मजबूत इंटीग्रेशन
UPSWAN-3.0 को केवल तेज इंटरनेट स्पीड तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे उच्चस्तरीय साइबर सुरक्षा मानकों के आधार पर डिजाइन किया गया है। सरकारी डेटा की सुरक्षा और गोपनीय प्रशासनिक पत्राचार को साइबर हमलों से बचाने के लिए इसमें एंड-टू-एंड डेटा एन्क्रिप्शन, नेक्स्ट-जेनरेशन फायरवॉल, इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS), एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (APT) प्रोटेक्शन और रियल-टाइम एंडपॉइंट डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स (EDR) जैसी उन्नत प्रणालियां शामिल की जा रही हैं। यह पूरा ढांचा उत्तर प्रदेश राज्य डेटा सेंटर (UPSDC) से सीधे इंटीग्रेटेड रहेगा, जिससे सरकारी दफ्तरों में डिजिटल फाइलों का मूवमेंट सुरक्षित, पारदर्शी और पूरी तरह ट्रैकेबल हो जाएगा।