यूपी विधानसभा चुनाव : एक हफ्ते में तैनात होंगे सेक्टर और पुलिस अफसर, चुनाव आयोग ने दिए कड़े निर्देश

यूपी विधानसभा चुनाव : एक हफ्ते में तैनात होंगे सेक्टर और पुलिस अफसर, चुनाव आयोग ने दिए कड़े निर्देश

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर चुनावी मशीनरी को सक्रिय करने का आदेश दिया है। आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक चुनाव से पहले ही जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करना अनिवार्य होता है, जिसके तहत सभी विधानसभा क्षेत्रों में अगले एक सप्ताह के भीतर सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सेक्टर और पुलिस स्तर पर केवल संवेदनशील, सक्षम और निष्पक्ष छवि वाले अधिकारियों की ही तैनाती की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात या लापरवाही की गुंजाइश न रहे। इन सभी नवनियुक्त अधिकारियों को जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से चुनाव आचार संहिता, पोलिंग प्रबंधन और कानूनी प्रावधानों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मतदान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण: बिजली, पानी और रैंप की जांच करेंगे सेक्टर अफसर

तैनाती के तुरंत बाद सेक्टर अफसरों को अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का सघन स्थलीय निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिया है कि अधिकारी खुद हर मतदेय स्थल पर पहुंचकर वहां मतदाताओं और पोलिंग पार्टियों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का सत्यापन करेंगे। इसमें मतदेय स्थल तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग, निर्बाध बिजली आपूर्ति, बैठने के लिए फर्नीचर, दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए रैंप, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और धूप व बारिश से बचाव के लिए शेड की उपलब्धता शामिल है। सेक्टर ऑफिसर अपनी विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपेंगे, जिसके बाद यदि किसी बूथ पर बुनियादी ढांचे की कमी पाई जाती है तो संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समय रहते उसे दुरुस्त कराया जाएगा, जिससे मतदान के दिन किसी प्रकार की असुविधा न हो।

वल्नरेबिलिटी मैपिंग और क्रिटिकल बूथों की पहचान: वीएम-1 फॉर्मेट पर होगा काम

चुनावी हिंसा और अनुचित दबाव को रोकने के लिए आयोग ने वल्नरेबिलिटी मैपिंग (संवेदनशीलता आंकलन) को प्राथमिकता पर रखा है। इसके तहत सेक्टर अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को वीएम-1 (VM-1) फॉर्मेट उपलब्ध कराया जाएगा। इस विशेष फॉर्मेट में संबंधित क्षेत्र में पिछले चुनावों के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मुकदमे, जातिगत या सांप्रदायिक तनाव, आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले, शराब या नकदी की जब्ती और पुनर्मतदान जैसी संवेदनशील घटनाओं का पूरा ब्योरा दर्ज रहता है। इसके आधार पर अधिकारी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बस्तियों का दौरा करेंगे और कमजोर तबकों के मतदाताओं में विश्वास बहाली के कदम उठाएंगे। इसी मानक के आधार पर जिलेवार क्रिटिकल मतदेय स्थलों की सूची तैयार की जाएगी ताकि वहां अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों और वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जा सके।

शैडो एरिया और नेटवर्क कनेक्टिविटी पर जोर, ईवीएम वेयरहाउस में 30 दिन का बैकअप

मतदान प्रक्रिया के दौरान रियल-टाइम सूचनाओं के आदान-प्रदान और निगरानी के लिए आयोग ने तकनीकी व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ऐसे मतदेय स्थलों का तत्काल चिह्नांकन करने को कहा है जहां मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर है या बिल्कुल उपलब्ध नहीं है (शैडो एरिया)। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय टेलीकॉम कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स से समन्वय बनाकर इन बूथों पर वैकल्पिक संचार साधन या नेटवर्क कवरेज सुनिश्चित करें। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) वेयरहाउस की सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की गई। वेयरहाउसों का नियमित मासिक निरीक्षण करने के साथ-साथ सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का न्यूनतम 30 दिनों का बैकअप सुरक्षित रखने और फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) के दौरान भवन की भौतिक स्थिति व सुरक्षा प्रबंधों की निगरानी के आदेश दिए गए हैं। आयोग के इन कदमों से साफ है कि प्रशासनिक मशीनरी चुनावी मैदान को निष्पक्ष और सुदृढ़ बनाने में पूरी तरह जुट गई है।