Ram Mandir Total Recall: नोटों के बैग से चंदा चोरी के आरोपों तक, अखिलेश के हमलों के बीच चंपत राय के इस्तीफे...

Ram Mandir Total Recall: नोटों के बैग से चंदा चोरी के आरोपों तक, अखिलेश के हमलों के बीच चंपत राय के इस्तीफे...

अयोध्या की पावन भूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर के लोकार्पण के बाद बीते तीन महीनों में धर्म, आस्था और सियासत का ऐसा अभूतपूर्व त्रिकोण देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। मंदिर के गर्भगृह में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ती लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के समानांतर ट्रस्ट के प्रशासनिक कमरों में एक जबर्दस्त भूचाल चल रहा था। दान पेटियों से नकदी गायब होने की सुगबुगाहट, कर्मचारियों के बैग से नोटों की बरामदगी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के तीखे सियासी बाण, एसआईटी की ताबड़तोड़ छापेमारी, आठ कर्मचारियों की जेल रवानगी और फिर दशकों से राम मंदिर आंदोलन का चेहरा रहे चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्रा का अप्रत्याशित इस्तीफा—इन सबने राम मंदिर के प्रबंधन को हिलाकर रख दिया था। अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के जांबाज पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को मंदिर का पहला पूर्णकालिक चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) नियुक्त कर मंदिर प्रबंधन को आधुनिक कॉरपोरेट और सैन्य अनुशासन के ढांचे में ढालने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

4 जून का वह वायरल वीडियो: दान गणना कक्ष से उठी चिंगारी

इस पूरे प्रशासनिक तूफान की नींव 4 जून 2026 को पड़ी, जब राम मंदिर परिसर स्थित चढ़ावा गणना कक्ष में दान राशि की गिनती के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियां सुरक्षा कैमरों और आंतरिक निगरानी में पकड़ी गईं। अगले ही दिन 5 जून को सोशल मीडिया के गलियारों में एक वीडियो तेजी से तैरने लगा। इस वीडियो में गणना कार्य में तैनात एक कर्मचारी अविनाश शुक्ल को भारी नकदी से भरा बैग ले जाते हुए देखा गया।

शुरुआती दौर में इस पूरे मामले को दबाने और आंतरिक अनुशासन की कार्रवाई तक सीमित रखने की कोशिश की गई, लेकिन स्थानीय हलकों से निकली यह बात देखते ही देखते लखनऊ के सत्ता और विपक्षी गलियारों तक जा पहुंची। मंदिर में प्रतिदिन आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे, विदेशी मुद्राओं और सोने-चांदी के आभूषणों के हिसाब-किताब को लेकर श्रद्धालुओं के मन में भी सवाल उठने लगे थे।

अखिलेश यादव का 'चंदा चोरी' हमला: सड़क से संसद तक सियासी उबाल

7 जून को इस पूरे विवाद ने भयानक सियासी रूप अख्तियार कर लिया, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर राम मंदिर के दान प्रबंधन में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया। अखिलेश यादव ने सवाल दागा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर देश-विदेश के करोड़ों भक्तों द्वारा पाई-पाई जोड़कर भेजे गए 'राम धन' पर डाका कौन डाल रहा है?

विपक्ष के सीधे हमले के बाद उसी शाम तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने सार्वजनिक बयान जारी कर आंतरिक ऑडिट का हवाला दिया और किसी भी बड़ी अनियमितता से साफ इनकार करते हुए अखिलेश यादव के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। मगर विपक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं था। अखिलेश यादव ने सीधे ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल दागे, जिससे यह विवाद केवल अयोध्या की स्थानीय प्रशासनिक चूक न रहकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस में तब्दील हो गया।

एसआईटी का शिकंजा, आठ गिरफ्तारियां और एसबीआई की भूमिका पर सवाल

विवाद की गंभीरता और सार्वजनिक साख पर बन आई बात को देखते हुए ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश शासन ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। मामला विभागीय जांच से निकलकर सीधे आपराधिक जांच के दायरे में आ गया।

एसआईटी की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परतें खुलती चली गईं। जांच एजेंसी ने गणना कार्य से जुड़े आठ कर्मियों को रंगे हाथों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया। एसआईटी की अंतरिम और बाद में गृह विभाग को सौंपी गई 17 अगस्त की अंतिम रिपोर्ट ने ट्रस्ट के तत्कालीन आंतरिक प्रबंधन की कलई खोलकर रख दी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि चढ़ावा गणना कक्ष में निगरानी और प्रशासनिक पर्यवेक्षण की घोर लापरवाही थी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ कैश हैंडलिंग को लेकर हुए समझौते और बैंक के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे इस मामले में अदालत के निर्देश पर आईपीएस स्तर के अधिकारियों की निगरानी में दूसरी एसआईटी भी सक्रिय कर दी गई।

चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई: ट्रस्ट के शीर्ष पर बड़ा फेरबदल

एसआईटी की रिपोर्ट और गिरफ्तारियों ने उन आरोपों पर प्रशासनिक मुहर लगा दी, जिसे ट्रस्ट शुरुआत में खारिज कर रहा था। चौतरफा दबाव के बीच 6 जुलाई 2026 को आयोजित ट्रस्ट की आपात बैठक में दशकों से मंदिर आंदोलन की धुरी रहे महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे स्वीकार करते हुए चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस में पहली प्राथमिकी दर्ज कराने वाले सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की कमान सौंप दी।

इसी बैठक में यह ऐतिहासिक नीतिगत फैसला हुआ कि संतों और स्वयंसेवकों के अनौपचारिक प्रबंधन के बजाय अब राम मंदिर के दैनिक प्रशासन, सुरक्षा, वित्त और लॉजिस्टिक्स को एक पेशेवर कॉरपोरेट ढांचे में बदला जाएगा, जिसके शीर्ष पर एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बैठेगा।

5,585 आवेदनों की स्क्रीनिंग और एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र की ताजपोशी

सीईओ चयन के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय सर्च कमेटी बनाई गई, जिसमें पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल थे। पूरे देश से इस प्रतिष्ठित पद के लिए 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। एआई-इनेबल्ड स्क्रीनिंग और कड़े सुरक्षा मानकों के बाद 1,580 योग्य उम्मीदवार चुने गए, जिनमें से 108 के साथ ऑनलाइन सत्र हुए। अंततः अयोध्या के ग्रीन हाउस में 16 शीर्ष उम्मीदवारों के आमने-सामने इंटरव्यू के बाद कमेटी ने 75 पन्नों की रिपोर्ट के साथ 3 नामों का फाइनल पैनल ट्रस्ट को सौंपा।

2 सितंबर 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना में 39 वर्षों से अधिक सेवा देने वाले और 'ऑपरेशन सिंदूर' के रणनीतिकार रहे सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को राम मंदिर का पहला सीईओ नियुक्त करने पर मुहर लगा दी। पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मूल निवासी एयर मार्शल मिश्र अपनी असाधारण कर्तव्यनिष्ठा के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक पा चुके हैं। इसके साथ ही ट्रस्ट ने कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को पूर्णकालिक महासचिव, दिल्ली के उद्योगपति महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया और मदन मोहन पांडेय व निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया।

नई व्यवस्था के बीच अखिलेश का नया वार: क्या खत्म होगी सियासत?

एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र की नियुक्ति के साथ ही जहां राम मंदिर में नकदी गणना के लिए ऑटोमेटेड डिजिटल मशीनें, बायोमेट्रिक व फेशियल रिकग्निशन कैमरे और मानवरहित कैश वैन की नई एसओपी लागू की जा रही है, वहीं इस पर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है।

सीईओ नियुक्ति के तुरंत बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि क्या नई व्यवस्थाएं लागू कर देने से पुराने पाप धुल जाएंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर जेल भेज दिया गया, जबकि शीर्ष स्तर पर बैठे जिम्मेदारों को सुरक्षित निकास दे दिया गया। अखिलेश ने अयोध्या के विकास के नाम पर गरीबों की जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दे को भी इससे जोड़ दिया।

राम मंदिर में चंदा विवाद के विस्फोट से लेकर सैन्य कमांडर के हाथों में कमान सौंपने तक का यह सफर केवल एक प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के सबसे बड़े केंद्र में अब पारंपरिक आस्था के साथ-साथ संस्थागत पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और पेशेवर निगरानी का नया युग शुरू हो चुका है।

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