संगम तट डूबा! प्रयागराज में गंगा-यमुना का रौद्र रूप, बड़े हनुमान मंदिर की दहलीज तक पहुंचा बाढ़ का पानी; अलर्ट पर प्रशासन
तीर्थराज प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के तेजी से बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के साथ-साथ विभिन्न बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी के कारण संगम नगरी में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। विश्व प्रसिद्ध संगम तट का पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है और पावन गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते हुए बांध के नीचे स्थित प्रसिद्ध लेटे हुए बड़े हनुमान जी के मंदिर की दहलीज तक पहुंच गया है।
प्रयागराज में जब भी गंगा का जल बड़े हनुमान जी के विग्रह को स्नान कराने की ओर बढ़ता है, तो इसे धार्मिक आस्था के तौर पर अत्यंत पावन माना जाता है, लेकिन तेजी से चढ़ता पानी शहरी और ग्रामीण तटीय बस्तियों के लिए खतरे की घंटी बन चुका है।
संगम नोज पूरी तरह डूबा, गंगा आरती और पुरोहितों के तख्त हटे
गंगा और यमुना के संगम पर पानी का बहाव बेहद तेज हो गया है, जिसके चलते प्रशासन को तुरंत प्रभाव से आपात कदम उठाने पड़े हैं:
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संगम नोज जलमग्न: संगम नोज पूरी तरह पानी में समा चुका है, जिससे श्रद्धालुओं के पैदल जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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तख्त और शिविर पीछे हटे: संगम तट पर बैठने वाले तीर्थ पुरोहितों के तख्त, छाते और अस्थायी शिविरों को सुरक्षित रूप से बांध रोड और ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है।
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नाव संचालन पर सतर्कता: नदियों में तेज करंट और उफान को देखते हुए नाविकों को गहरे पानी में जाने से मना किया गया है और सभी को लाइफ जैकेट के अनिवार्य उपयोग के निर्देश दिए गए हैं।
शहरी और तटीय मोहल्लों में घुसा पानी, पलायन को मजबूर लोग
नदियों के खतरे के निशान की ओर बढ़ने से प्रयागराज के निचले और कछारी इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं:
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सलोरी, छोटा बघाड़ा और दारागंज: इन मोहल्लों की गलियों और मकानों के निचले तलों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है।
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छात्रों का पलायन: छोटा बघाड़ा और सलोरी में लॉज व हॉस्टलों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अपनी किताबें और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना हो रहे हैं।
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ग्रामीण इलाके प्रभावित: फाफामऊ, झूंसी, करैली और नैनी के निचले कछारी गांवों में कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई है।
प्रशासन ने स्थापित की बाढ़ चौकियां, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ तैनात
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए प्रयागराज जिला प्रशासन और नगर निगम पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गए हैं:
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बाढ़ राहत शिविर तैयार: प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए राहत शिविरों और शेल्टर होम्स को सक्रिय कर दिया गया है, जहां भोजन, शुद्ध पेयजल और दवाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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24x7 मॉनिटरिंग: सिंचाई विभाग और जल पुलिस द्वारा गंगा और यमुना के प्रति घंटे के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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बचाव दल अलर्ट: एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और पीएसी की फ्लड यूनिट्स को मोटरबोट्स के साथ संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
प्रशासन ने तटीय इलाकों के नागरिकों से अपील की है कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सतर्क रहें और राहत शिविरों में जाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।