रामपुर से देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंची आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी की जंग, समर्थकों ने किया जंतर-मंतर पर 3 घंटे के बड़े आंदोलन का ऐलान
उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान, उनके पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' को लेकर चल रही कानूनी व सियासी लड़ाई अब रामपुर की सीमाओं से निकलकर देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गई है। जेल में बंद आजम खान के समर्थकों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्रों ने रविवार को जंतर-मंतर पर तीन घंटे के सांकेतिक आंदोलन और विशाल धरने का ऐलान किया है। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक इस प्रदर्शन को लेकर जोरदार अपील की जा रही है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल दो सियासी व्यक्तियों को बचाने की मुहिम नहीं है, बल्कि यह उच्च शिक्षा संस्थान, हजारों विद्यार्थियों के भविष्य, लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान सम्मत न्याय की लड़ाई है।
रामपुर से दिल्ली पहुंचा जौहर यूनिवर्सिटी का संग्राम, रविवार को सुबह 10 से 1 बजे तक प्रदर्शन
सपा नेता आजम खान और उनके परिवार के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। आजम खान और अब्दुल्ला आजम के आधिकारिक व गैर-आधिकारिक फैन पेजों, छात्र संगठनों और जौनपुर सदर से पूर्व सपा विधायक अरशद खान सहित कई वरिष्ठ नेताओं के सोशल मीडिया हैंडल्स से जंतर-मंतर पर एकत्रित होने का खुला आह्वान किया गया है। जारी पोस्ट्स के अनुसार, रविवार को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक जंतर-मंतर पर तीन घंटे का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
इस आंदोलन की मुख्य थीम 'शिक्षा, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा' रखी गई है। समर्थकों का आरोप है कि राजनीतिक विद्वेष की भावना से प्रेरित होकर आजम खान के पूरे परिवार को जेल की सलाखों के पीछे धकेला गया है और उनके द्वारा स्थापित किए गए उच्च शिक्षण संस्थान को सुनियोजित तरीके से बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की योजना राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग करने की है।
जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर लटकी तलवार, ईडी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का शिकंजा
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पिछले कई महीनों से लगातार प्रशासनिक कार्यवाहियों और सुर्खियों के केंद्र में है। विवाद तब और गहरा गया जब रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने कैंपस में बिना ले-आउट और नक्शा पास कराए निर्मित 38 प्रमुख इमारतों के ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर दिया था। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कैंपस के मुख्य द्वार पर कई दिनों तक जोरदार धरना-प्रदर्शन किया था। हालांकि बाद में मुरादाबाद के मंडलायुक्त ने आरडीए के ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाकर विश्वविद्यालय प्रबंधन को फौरी राहत दी, लेकिन इमारतों पर कानूनी संकट का खतरा अब भी पूरी तरह टला नहीं है।
यूनिवर्सिटी के वित्तीय लेन-देन को लेकर भी केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) और आयकर विभाग (IT) ने विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण मूल्यांकन में करोड़ों रुपये की वित्तीय विसंगतियों का दावा किया है। जहां जौहर ट्रस्ट ने निर्माण लागत लगभग 46 से 60 करोड़ रुपये बताई थी, वहीं सरकारी एजेंसियों ने इसका वास्तविक मूल्यांकन 494 करोड़ रुपये से लेकर 800 करोड़ रुपये से अधिक आंका है। इस भारी अंतर और धन के स्रोत का ब्योरा न मिल पाने के कारण प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत जांच में जुटा हुआ है और हाल के दिनों में परिसर में कई बार छापेमारी की जा चुकी है।
जेल की सलाखों में आजम और अब्दुल्ला, अदालती दांव-पेच और मुकदमों का लंबा सिलसिला
सपा के संस्थापक सदस्यों में गिने जाने वाले आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम खान पिछले लंबे समय से उत्तर प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। आजम परिवार पर दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से मुख्य मामला अब्दुल्ला आजम के दोहरे जन्म प्रमाण पत्र और ड्यूल पैन कार्ड प्रकरण से जुड़ा हुआ है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अब्दुल्ला आजम को 2017 के विधानसभा चुनाव में कम उम्र होने के बावजूद कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर रामपुर की स्वार सीट से चुनाव लड़ाने का आरोप साबित हुआ था, जिसके बाद स्थानीय अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और अब्दुल्ला आजम को सजा सुनाई थी। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जब ड्यूल पैन कार्ड मामले से जुड़ी पुनरीक्षण याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुईं, तो न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करते हुए फाइल को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सहित कई प्रमुख वकीलों की टीम आजम परिवार की अंतरिम जमानत और रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
दिल्ली में सियासी तापमान बढ़ाने की तैयारी: क्या विपक्ष के लिए राष्ट्रीय मुद्दा बनेगा यह आंदोलन?
रामपुर की स्थानीय राजनीति से उठकर यह मामला देश की राजधानी तक पहुंचना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों और जौहर यूनिवर्सिटी की जांच को लेकर सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगा चुके हैं।
जंतर-मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन के जरिए आयोजकों का प्रयास है कि 'इंडिया' गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, अल्पसंख्यक संगठनों और विश्वविद्यालयी छात्र यूनियनों को एक साझा मंच पर लाया जाए। समर्थकों का तर्क है कि आजम खान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाके में आधुनिक और तकनीकी शिक्षा का एक विशाल केंद्र खड़ा किया था, जहां हजारों गरीब और वंचित छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यदि राजनीतिक टकराव के कारण इस शिक्षा संस्थान को नुकसान पहुंचता है, तो इसका सीधा असर छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ेगा।
रविवार को जंतर-मंतर पर होने वाला यह तीन घंटे का आंदोलन दिल्ली की कानून-व्यवस्था और उत्तर प्रदेश के सियासी विमर्श में नया उबाल लाने की क्षमता रखता है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस भी सतर्क है। इस प्रदर्शन से साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी का मसला सिर्फ अदालती कमरों तक सीमित न रहकर सड़कों और संसद के गलियारों में भी गूंजने वाला है।