यूपी कैबिनेट: किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार, समर्थन मूल्य  में भी बढ़ोत्तरी पर मुहर

यूपी कैबिनेट: किसानों से 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज खरीदेगी योगी सरकार, समर्थन मूल्य में भी बढ़ोत्तरी पर मुहर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अन्नदाताओं की आय बढ़ाने और पारंपरिक मोटे अनाजों (श्री अन्न / मिलेट्स) की खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा किसान-हितैषी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत मोटे अनाज की सरकारी खरीद नीति को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। इसके अंतर्गत राज्य भर के पंजीकृत किसानों से कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज (मक्का, बाजरा और ज्वार) की खरीद का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही कैबिनेट ने मोटे अनाजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोत्तरी पर भी अंतिम मुहर लगा दी है, जिससे किसानों को उनकी उपज का भरपूर और लाभकारी मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगा।

फसल-वार खरीद लक्ष्य: मक्का, बाजरा और ज्वार का कोटा तय

खाद्य एवं रसद विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों की कृषि परिस्थितियों और पैदावार के आधार पर मोटे अनाज की खरीद का वर्गीकरण किया गया है:

  • मक्का (Maize): 1.50 लाख मीट्रिक टन

  • बाजरा (Pearl Millet): 1.25 लाख मीट्रिक टन

  • ज्वार (Sorghum): 10 हजार मीट्रिक टन

  • कुल खरीद लक्ष्य: 2.85 लाख मीट्रिक टन

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आवक अधिक होती है तो आवश्यकतानुसार इस कार्यकारी लक्ष्य का विस्तार भी किया जाएगा ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज औने-पौने दामों में बिचौलियों को न बेचनी पड़े।

समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोत्तरी: किसानों को मिलेगा बेहतर भाव

कैबिनेट बैठक में केंद्र और राज्य द्वारा निर्धारित संशोधित न्यूनतम समर्थन मूल्य को प्रभावी करने का अनुमोदन दिया गया। इस बार मोटे अनाज की फसलों के दामों में इजाफा किया गया है:

  • मक्का: समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2,410 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।

  • बाजरा: बाजरे की सरकारी खरीद के लिए आकर्षक मूल्य निर्धारित करते हुए किसानों के लिए खरीद केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

  • ज्वार (हाइब्रिड व मालदांडी): ज्वार उत्पादक किसानों के लिए भी हाइब्रिड और मालदांडी किस्मों के लिए बढ़े हुए एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित होगी।

बायोमेट्रिक सत्यापन और डीबीटी से सीधा भुगतान

खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने कड़े दिशानिर्देश तय किए हैं:

  • ई-पॉप (e-PoP) मशीनों से तौल: सभी निर्धारित क्रय केंद्रों पर खरीद केवल इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ परचेज डिवाइस के माध्यम से किसानों के बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा/आईरिस स्कैन) के बाद ही दर्ज होगी।

  • सीधे बैंक खाते में पैसा: बिचौलियों और आढ़तियों की भूमिका खत्म करते हुए फसल की पूरी धनराशि आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए अधिकतम 48 से 72 घंटों के भीतर ट्रांसफर की जाएगी।

  • ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य: खाद्य विभाग के पोर्टल fcs.up.gov.in पर पंजीकृत और राजस्व अभिलेखों से सत्यापित किसान ही अपनी फसल केंद्रों पर बेच सकेंगे।

पश्चिमी और बुंदेलखंड-मध्य यूपी में अलग-अलग समय पर खरीद

मोटे अनाज की खरीद के लिए जिलों का चयन भी फसल उत्पादन के आधार पर किया गया है। मक्का की खरीद पश्चिमी और मध्य यूपी के प्रमुख जिलों (बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, अलीगढ़, एटा, कासगंज आदि) में प्राथमिकता से होगी, जबकि बाजरा की खरीद आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़ बेल्ट और ज्वार की खरीद बुंदेलखंड क्षेत्र (बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, जालौन) के केंद्रों पर की जाएगी।

योगी सरकार का यह फैसला प्रदेश में 'मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम' को नई गति देगा और कम पानी में तैयार होने वाले मोटे अनाज की खेती करने वाले छोटे व सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा।