UP Election: अखिलेश यादव का नया फार्मूला तय! इस बार सिफारिश नहीं, प्राइवेट एजेंसी की 'गुप्त रिपोर्ट' दिलाएगी सपा का टिकट

UP Election: अखिलेश यादव का नया फार्मूला तय! इस बार सिफारिश नहीं, प्राइवेट एजेंसी की 'गुप्त रिपोर्ट' दिलाएगी सपा का टिकट

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। लोकसभा चुनाव में मिली बंपर सफलता से उत्साहित समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव इस बार सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। टिकट बंटवारे में किसी भी तरह की चूक और गुटबाजी से बचने के लिए सपा नेतृत्व ने एक बिल्कुल नया और बेहद सख्त फार्मूला तैयार किया है। इस बार सपा में टिकट पाने के लिए नेताओं की सिफारिश नहीं, बल्कि एक प्राइवेट एजेंसी की ग्राउंड रिपोर्ट और खुद का जनाधार सबसे बड़ा पैमाना बनने जा रहा है। अखिलेश यादव ने सभी 403 विधानसभा सीटों पर कील-कांटा दुरुस्त करने की जिम्मेदारी अपनी कोर टीम और स्थानीय नेताओं को सौंप दी है।

प्राइवेट एजेंसी तैयार कर रही है 403 सीटों का रिपोर्ट कार्ड

समाजवादी पार्टी ने यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक पेशेवर निजी एजेंसी को काम पर लगाया है। यह एजेंसी हर क्षेत्र में जाकर संभावित उम्मीदवारों की छवि, जनता के बीच उनकी पकड़ और स्थानीय मुद्दों पर एक सीक्रेट रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही है। सपा नेतृत्व का साफ मानना है कि उम्मीदवार का सिर्फ बड़ा नाम होना काफी नहीं है, बल्कि क्षेत्र में उसकी वास्तविक छवि बेदाग और मजबूत होनी चाहिए। इसी रिपोर्ट के आधार पर इस बार टिकटों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

अखिलेश यादव खुद ले रहे हैं नेताओं से फीडबैक

सिर्फ एजेंसी की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि अखिलेश यादव इन दिनों खुद लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं और जिलेवार नेताओं के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं। इन गुप्त बैठकों में स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों से सीधा फीडबैक लिया जा रहा है। बैठक के दौरान नेताओं से पूछा जा रहा है कि संबंधित सीट पर पार्टी की कमजोरी क्या है, विपक्षी दल का गणित कैसा है और कौन सा उम्मीदवार सोशल इंजीनियरिंग के लिहाज से सबसे फिट बैठता है। साफ कर दिया गया है कि अगर किसी बड़े नेता की दावेदारी मजबूत भी है, लेकिन स्थानीय फीडबैक खराब आया तो उसका पत्ता कटना तय है।

'साइलेंट ग्रीन सिग्नल' और उम्मीदवारों को सख्त हिदायत

सूत्रों के मुताबिक, जिन सीटों पर प्राइवेट एजेंसी का सर्वे और स्थानीय नेताओं का फीडबैक आपस में मैच कर गया है, वहां पार्टी ने उम्मीदवारों को अंदरूनी तौर पर हरी झंडी देनी शुरू कर दी है। इन संभावित प्रत्याशियों से कह दिया गया है कि वे चुपचाप अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनता के बीच काम शुरू कर दें। हालांकि, इसके साथ ही नेतृत्व ने उन्हें सख्त हिदायत भी दी है कि क्षेत्र में कोई भी ऐसा विवादित काम या बयानबाजी न करें, जिससे उनकी खुद की या समाजवादी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचे। अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

2022 की चूक से लिया सबक, अब मत प्रतिशत बढ़ाने पर पूरा फोकस

सपा के इस आक्रामक और रणनीतिक कदम के पीछे साल 2022 के विधानसभा चुनाव का सबक है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में वे सत्ता के बेहद करीब पहुंचकर भी कुछ छोटी चूकों की वजह से पीछे रह गए थे। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 32.06% वोट शेयर के साथ 111 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने 41.29% वोट पाकर 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा का ग्राफ तेजी से बढ़ा और पार्टी 33.59% वोट शेयर के साथ 37 सीटें जीतने में कामयाब रही। अब अखिलेश यादव का पूरा ध्यान इसी वोट प्रतिशत को और ऊपर ले जाने और हर बूथ पर अपना वोट बैंक सुरक्षित रखने पर टिका है।

 

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