राम मंदिर का पहला CEO कौन? 5585 दिग्गजों में से सर्च कमेटी ने छांटे 3 नाम, ट्रस्ट की महाबैठक में 2 सितंबर को लगेगी अंतिम मुहर

राम मंदिर का पहला CEO कौन? 5585 दिग्गजों में से सर्च कमेटी ने छांटे 3 नाम, ट्रस्ट की महाबैठक में 2 सितंबर को लगेगी अंतिम मुहर

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्रशासनिक और प्रबंधकीय कामकाज को आधुनिक, पारदर्शी और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष सर्च कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सौंप दी है। रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावरे की सदस्यता वाली कमेटी ने गहन छानबीन और साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीन सबसे योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया है। अब इन तीन नामों पर ट्रस्ट की आगामी बैठक में विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिसके बाद राम मंदिर को अपना पहला पूर्णकालिक प्रशासनिक प्रमुख मिल जाएगा।

5,585 आवेदनों की कठिन स्क्रीनिंग: आईएएस, आईपीएस और सेना के शीर्ष अधिकारियों ने भी किया था आवेदन

राम मंदिर के सीईओ पद के लिए देश भर के शीर्ष प्रशासनिक, सैन्य और प्रबंधकीय क्षेत्रों से जुड़े लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला था। देश के प्रतिष्ठित पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारियों, सेना के ब्रिगेडियर व मेजर जनरल स्तर के पूर्व सैन्य अफसरों के अलावा बड़े कॉरपोरेट घरानों और गैर-सरकारी संस्थाओं के शीर्ष प्रबंधकों सहित कुल 5,585 उम्मीदवारों ने इस पद के लिए आवेदन किया था। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों में से सबसे उपयुक्त प्रतिभा को चुनने के लिए सर्च कमेटी ने बेहद वैज्ञानिक और पारदर्शी स्क्रीनिंग मॉडल तैयार किया। कमेटी ने सभी आवेदकों की शैक्षणिक योग्यता, पिछले प्रशासनिक अनुभव, संकट प्रबंधन क्षमता और भगवान राम के प्रति उनकी आस्था व सेवाभाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों को प्राथमिकता पर रखा।

600 अंकों का मूल्यांकन और अयोध्या में साक्षात्कार: पारदर्शी प्रक्रिया से छांटे गए अंतिम 3 नाम

चयन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए सर्च कमेटी ने 600 अंकों का एक व्यापक डिजिटल मूल्यांकन फॉर्म तैयार किया था, जिसे सभी आवेदकों को भेजा गया। इनमें से 3,570 उम्मीदवारों ने तय समय सीमा के भीतर विस्तृत उत्तर दर्ज कराए। इसके बाद 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले 108 शीर्ष उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और उनके साथ चार दिनों तक वर्चुअल माध्यम से विस्तृत संवाद किया गया। इस कड़े दौर के बाद 16 प्रमुख अभ्यर्थियों को अयोध्या धाम बुलाकर प्रत्यक्ष साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले इन 16 दिग्गजों के बीच से अंततः तीन नामों का अंतिम पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपा गया है। कमेटी ने इन तीनों नामों को पूरी तरह गोपनीय रखा है ताकि ट्रस्ट निष्पक्ष भाव से अंतिम मुहर लगा सके।

मंदिर की प्रशासनिक कमान और वित्तीय प्रबंधन: नए सीईओ के अधिकार व मुख्य जिम्मेदारियां

राम मंदिर के पहले सीईओ की नियुक्ति के साथ ही परिसर के प्रशासनिक, प्रबंधकीय और वित्तीय ढांचे में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। मंदिर के नए सीईओ सीधे तौर पर ट्रस्ट के प्रति जवाबदेह होंगे और ट्रस्ट महासचिव व न्यासियों के मार्गदर्शन में दैनिक व्यवस्थाओं का संचालन करेंगे। इसके अंतर्गत प्रतिदिन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था, क्राउड मैनेजमेंट, वीआईपी प्रोटोकॉल, साफ-सफाई, दान और चढ़ावे का डिजिटल व पारदर्शी ऑडिट तथा मंदिर कर्मचारियों का कुशल समन्वय शामिल रहेगा। यह व्यवस्था लागू होने से मंदिर का संचालन कॉरपोरेट स्तर की कार्यकुशलता और आध्यात्मिक शुचिता के अनूठे संगम के साथ आगे बढ़ेगा। बताया जा रहा है कि सीईओ का कार्यकाल प्रारंभिक तौर पर तीन वर्षों के लिए होगा, जिसे बाद में समीक्षा के आधार पर नवीनीकृत किया जा सकेगा।

मणिराम दास छावनी में ट्रस्ट की महाबैठक: महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में लगेगी अंतिम मुहर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की यह निर्णायक बैठक 2 सितंबर को अयोध्या स्थित ऐतिहासिक मणिराम दास छावनी में दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित की जाएगी। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि, निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन, अयोध्या के जिलाधिकारी और अन्य प्रमुख ट्रस्टी उपस्थित रहेंगे। बैठक के पहले सत्र में धार्मिक न्यास समिति, निर्माण समिति, वित्त समिति और ऑडिट कमेटी के पुनर्गठन तथा ट्रस्ट के रिक्त पदों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद मुख्य सत्र में सर्च कमेटी द्वारा सौंपे गए तीन नामों के पैनल की समीक्षा की जाएगी और आम सहमति बनने के बाद राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

राम मंदिर प्रबंधन में बड़ा संगठनात्मक बदलाव: आधुनिक गवर्नेंस और भक्तों की सुविधाओं पर फोकस

अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को व्यवस्थित करने, लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ बनाने और दान प्रबंधन को लेकर हाल के दिनों में उभरी चुनौतियों के समाधान के लिए ट्रस्ट ने यह संगठनात्मक पुनर्गठन शुरू किया है। पेशेवर नेतृत्व मिलने से राम मंदिर परिसर में आधुनिक आईटी सिस्टम, क्यू-मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य व परिवहन सेवाएं और पारदर्शी इन्वेंट्री प्रबंधन को नई गति मिलेगी। देश और दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों की निगाहें अब 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की इस अहम बैठक पर टिकी हैं, जहां से अयोध्या के प्रशासनिक इतिहास का एक नया अध्याय शुरू होगा।

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