इमरान खान की रिहाई के बदले सरकार से 'डील'? शहबाज शरीफ के कथित ऑफर पर बेटे कासिम का बड़ा खुलासा
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की जेल से रिहाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय और पाकिस्तानी सियासी गलियारों में एक नई सनसनीखेज बहस छिड़ गई है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद 71 वर्षीय इमरान खान की गंभीर होती स्वास्थ्य स्थिति के बीच यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान उन्हें जेल से बाहर निकालने के लिए किसी गुप्त राजनीतिक समझौते (डील) की पेशकश कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर लंदन में रह रहे इमरान खान के बेटे कासिम खान के एक हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। विदेशी मीडिया को दिए इंटरव्यू में कासिम ने एक बड़ा इशारा करते हुए कहा है कि अगर उनके बस में हो तो वे चाहेंगे कि उनके पिता इस डील को स्वीकार कर लें, हालांकि उन्हें अपने पिता के सख्त मिजाज को देखते हुए इसकी उम्मीद बेहद कम नजर आती है। इस बयान के सामने आते ही पाकिस्तान से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
'मेरी मानें तो पिता डील मान लें': बेटे कासिम का छलका दर्द
विदेशी मीडिया नेटवर्क (सीबीसी न्यूज) से बातचीत के दौरान कासिम खान ने अपने पिता की जेल में बिगड़ती हालत और परिवार की लाचारी पर खुलकर बात की। कासिम ने भावुक होते हुए कहा कि एक बेटे के तौर पर वे अपने पिता को किसी भी कीमत पर जेल की सलाखों से बाहर देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वाकई सरकार की तरफ से रिहाई को लेकर कोई समझौता या डील मेज पर है, तो वे व्यक्तिगत रूप से चाहेंगे कि उनके पिता इसे स्वीकार कर अपनी आजादी सुनिश्चित करें। हालांकि, कासिम ने यह भी साफ किया कि उन्हें जमीनी स्तर पर चल रही राजनीतिक वार्ताओं की पूरी और सीधी जानकारी नहीं है। उन्होंने पिछले सात महीनों से अधिक समय से अपने पिता से एक बार भी बात नहीं की है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पाकिस्तानी जेल प्रशासन और हुकूमत ने परिवार को फोन पर बात करने की अनुमति नहीं दी है।
'वह बहुत मजबूत इरादों वाले इंसान हैं, डील पर हां कहना मुश्किल'
कासिम खान ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि उनके चाहने भर से कुछ नहीं होगा, क्योंकि इमरान खान अपने राजनीतिक सिद्धांतों और हठधर्मिता के लिए जाने जाते हैं। कासिम के मुताबिक, उनके पिता कभी भी केवल अपनी निजी आजादी के लिए घुटने टेकने वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जेल में सिर्फ इमरान खान ही अकेले बंद नहीं हैं, बल्कि पीटीआई के सैकड़ों निर्दोष कार्यकर्ता, वरिष्ठ नेता और अब तो उनके अपने परिवार के कई सदस्य (जिनमें इमरान की बहनें भी शामिल हैं) जेल की कोठरियों में कैद हैं। ऐसे में उन सभी राजनीतिक कैदियों को पीछे छोड़कर अकेले किसी गुप्त समझौते के तहत बाहर आ जाना इमरान खान के स्वभाव के बिल्कुल विपरीत है। यही कारण है कि कासिम को लगता है कि अगर शहबाज सरकार की तरफ से कोई औपचारिक या अनौपचारिक प्रस्ताव रखा भी गया होगा, तो उनके पिता ने उसे सिरे से खारिज कर दिया होगा।
एक आंख की रोशनी घटने का दावा, जेल में अमानवीय हालात के आरोप
इमरान खान की रिहाई को लेकर यह बेचैनी उनकी लगातार गिरती सेहत के कारण और ज्यादा बढ़ गई है। उनके वकीलों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि अदियाला जेल में पूर्व प्रधानमंत्री को बेहद अमानवीय और तंग परिस्थितियों में रखा गया है। उन्हें दिन के 23 घंटे एक अंधेरी, छोटी सी कालकोठरी में एकांत कारावास (सॉलिट्री कन्फाइनमेंट) में रखा जाता है, जहां उन्हें धूप और खुली हवा तक नसीब नहीं होती। परिवार का दावा है कि लंबे समय तक अंधेरे में रहने और सही मेडिकल केयर न मिलने के कारण इमरान खान की एक आंख की रोशनी काफी कम हो गई है। हाल के महीनों में उन्हें कई बार मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा है। हालांकि, शहबाज सरकार और पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'प्रोपेगैंडा' करार देते रहे हैं।
पीटीआई का विरोध-प्रदर्शन और पर्दे के पीछे वार्ता की सुगबुगाहट
हाल ही में इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने इस्लामाबाद और पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अंतिम समय में इस बड़े आंदोलन को अचानक टाल दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आंदोलन को टाले जाने के पीछे बैकडोर डिप्लोमेसी (पर्दे के पीछे की बातचीत) मुख्य वजह हो सकती है। दोनों तरफ के मध्यस्थ इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि देश को किसी नए गृहयुद्ध या बड़े राजनीतिक टकराव से कैसे बचाया जाए। कई जानकारों का दावा है कि सैन्य प्रतिष्ठान और सत्ताधारी गठबंधन इमरान खान को देश छोड़कर बाहर जाने (एग्जाइल) या सक्रिय राजनीति से कुछ समय के लिए दूरी बनाने की शर्त पर राहत देने पर विचार कर सकते हैं, जैसा कि पाकिस्तान के इतिहास में नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ के दौर में भी देखा गया था।
वैश्विक सर्च और एआई प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड कर रहा है इमरान खान का मुद्दा
आज के आधुनिक डिजिटल युग में जब गूगल एआई ओवरव्यूज, बिंग कोपायलट और दुनिया भर के सर्च इंजनों पर लोग पाकिस्तान के राजनीतिक संकट का पल-पल का अपडेट तलाश रहे हैं, इमरान खान की रिहाई और कथित डील से जुड़े कीवर्ड्स ट्रेंडिंग लिस्ट में शीर्ष पर पहुंच चुके हैं। ब्रिटेन की संसद और अमेरिकी कांग्रेस में भी इमरान खान के मानवाधिकारों और स्वास्थ्य को लेकर आवाजें उठ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या पाकिस्तान की हुकूमत वाकई किसी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार है, और क्या 14 साल की सजा भुगत रहे इमरान खान अपनी जिद्द छोड़कर किसी समझौते का रास्ता चुनेंगे? आने वाले कुछ दिन पाकिस्तान की दिशा और दशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।