चैटजीपीटी ऑफिस में जासूसी कांड: टीवी के पीछे टॉयलेट पेपर में छिपाया रिकॉर्डिंग डिवाइस
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांति लाने वाले चैटजीपीटी (ChatGPT) के निर्माता ओपनएआई (OpenAI) के दफ्तर में कॉरपोरेट जासूसी और सुरक्षा में भारी सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सैन फ्रांसिस्को स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालय के हाई-प्रोफाइल कॉन्फ्रेंस रूम में गुप्त रूप से बातचीत सुनने और रिकॉर्ड करने वाला उपकरण (Listening Device) लगाने के आरोप में कंपनी के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया है। जांच में आरोपी की पहचान 35 वर्षीय सऊदी अरब के नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान (Abdulrahman Alfozan) के रूप में हुई है, जो अमेरिका का स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) है और ओपनएआई में सीनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। इस गिरफ्तारी के बाद टेक जगत और वैश्विक खुफिया हलकों में हड़कंप मच गया है।
टीवी के पीछे टॉयलेट पेपर में लिपटा मिला जासूसी उपकरण, यूएसबी पोर्ट से था कनेक्टेड
अमेरिकी न्याय विभाग और अदालत में दाखिल शिकायत के अनुसार, यह उपकरण 30 सितंबर को कंपनी के एक एक्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में बरामद हुआ था। इस विशेष मीटिंग रूम का उपयोग कंपनी के शीर्ष अधिकारी गोपनीय रणनीतियों, एआई मॉडल के विकास और अहम फैसलों पर चर्चा के लिए करते हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी ने बेहद शातिराना तरीके से एक ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस को टॉयलेट पेपर में लपेटा और उसे कमरे में लगी बड़ी टेलीविजन स्क्रीन के पीछे छिपाकर यूएसबी पोर्ट से जोड़ दिया था ताकि उसे लगातार पावर सप्लाई मिलती रहे। जब आंतरिक सफाई और सुरक्षा निरीक्षण के दौरान इस संदिग्ध वस्तु पर नजर पड़ी, तो कंपनी के सुरक्षा अधिकारियों के होश उड़ गए।
सीसीटीवी फुटेज और आंतरिक टूल्स की पड़ताल: 12 बार संदिग्ध रूप से दिखा था आरोपी
शिकायत के मुताबिक, अलफोजान को उस मीटिंग रूम में जाने की अनुमति नहीं थी और न ही वह उस स्तर की किसी बैठक का हिस्सा बनने के लिए अधिकृत था। कंपनी के सर्विलांस कैमरों की फुटेज खंगालने पर पता चला कि वह पिछले एक महीने के भीतर करीब 12 बार उस कमरे के आसपास संदिग्ध परिस्थितियों में देखा गया था। इसके अलावा, कंपनी के आंतरिक प्रोडक्टिविटी टूल्स और लॉग्स की जांच से यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने दफ्तर की इमारतों के पते, एग्जीक्यूटिव मीटिंग रूम्स के कैलेंडर और उनकी बैठने की क्षमता से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां कई बार सर्च की थीं। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले अलफोजान ने दफ्तर के एक अन्य कमरे में अपना बैग छोड़ दिया था, जिसकी तलाशी लेने पर उसके बटुए और आईडी कार्ड के साथ-साथ एक और वैसा ही दूसरा रिकॉर्डिंग डिवाइस बरामद हुआ।
ओपनएआई ने अपने ही एआई मॉडल से सुलझाई गुत्थी, तत्काल प्रभाव से किया बर्खास्त
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ओपनएआई ने घुसपैठिए की पहचान करने के लिए अपने ही उन्नत एआई मॉडल का इस्तेमाल किया। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने बरामद डिवाइस और उसकी उत्पत्ति को समझने के लिए अपने सिस्टम की मदद ली, जिससे कुछ ही घंटों के भीतर यह पुष्टि हो गई कि यह उपकरण उनके ही एक कर्मचारी द्वारा लगाया गया था। इसके तुरंत बाद ओपनएआई ने एफबीआई को सूचित किया और आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि शुरुआती फॉरेंसिक जांच में मॉडल वेट्स, सोर्स कोड या कस्टमर डेटा के चोरी होने या अनधिकृत एक्सेस का कोई संकेत नहीं मिला है।
मेटा और माइक्रोसॉफ्ट में कर चुका था काम, सऊदी वेंचर फर्म से भी जुड़ा था नाता
जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, अब्दुलरहमान अलफोजान कोई साधारण तकनीकी कर्मचारी नहीं है, बल्कि उसके पास सिलिकॉन वैली की शीर्ष कंपनियों में काम करने का लंबा अनुभव है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल करने वाले अलफोजान ने पूर्व में मेटा (फेसबुक), माइक्रोसॉफ्ट और एसएपी जैसी दिग्गज कंपनियों में बतौर सिस्टम इंजीनियर सेवाएं दी थीं। इसके साथ ही वह सऊदी अरब की पूंजी उद्यम फर्म 'रेद वेंचर्स' (RAED Ventures) में एक वेंचर पार्टनर के तौर पर भी सूचीबद्ध था। वह जुलाई 2025 में ओपनएआई में एआई एजेंट्स और डेटा प्लेटफॉर्म पर केंद्रित इंजीनियरिंग टीम से जुड़ा था।
5 साल की जेल और करोड़ों का जुर्माना: 19 अक्टूबर को होगी अगली अदालती पेशी
अलफोजान को अदालत में पेश किया गया, जहां उस पर इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल उपकरणों के जरिए मौखिक बातचीत को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करने और जासूसी की कोशिश करने की गंभीर संघीय धाराएं लगाई गई हैं। यदि अदालत में उस पर लगे आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो उसे 5 साल तक की जेल की सजा, 2.5 लाख डॉलर (लगभग 2.37 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना और तीन साल की निगरानी का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर के लिए तय की है। इस बीच, एफबीआई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस जासूसी के तार किसी विदेशी सरकार या कॉर्पोरेट नेटवर्क से जुड़े हैं और क्या कोई ऑडियो डेटा बाहर भेजा गया था।