चीन ने फिर दिखाई दुनिया को अंतरिक्ष ताकत, धरती पर सुरक्षित लौटा 'Zhuque-3' रॉकेट; क्या एलन मस्क के SpaceX के दबदबे को मिलेगी चुनौती?
अंतरिक्ष विज्ञान और कमर्शियल स्पेस रेस के क्षेत्र में चीन ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करते हुए अपनी तकनीकी ताकत का लोहा मनवाया है। निजी चीनी अंतरिक्ष कंपनी लैंडस्पेस (LandSpace) द्वारा विकसित रीयूजेबल रॉकेट 'झुक-3' (Zhuque-3) ने अंतरिक्ष में उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के बाद पृथ्वी पर सफलतापूर्वक नियंत्रित और सटीक लैंडिंग की है।
चीन के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट के पहले चरण (बूस्टर) ने खुलने वाले लैंडिंग लेग्स के सहारे जमीन पर वर्टिकल सॉफ्ट लैंडिंग (VTVL) करने में सफलता प्राप्त की है। इस बड़ी छलांग को स्पेस सेक्टर में अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के दशकों पुराने एकाधिकार के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
कैसे हुई ऐतिहासिक लैंडिंग और क्या है Zhuque-3 की खासियत?
झुक-3 रॉकेट को चीन के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर (Jiuquan Satellite Launch Center) के कमर्शियल स्पेस पायलट जोन से लॉन्च किया गया था:
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कक्षा में पेलोड और सुरक्षित वापसी: लॉन्च के लगभग 137 सेकंड बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अलग हुआ और उसने उपग्रह को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।
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390 किमी दूर लैंडिंग: रॉकेट के पहले चरण (बूस्टर) ने करीब 390 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए गांसू प्रांत के गोबी रेगिस्तान में तय रिकवरी पैड पर सुरक्षित लैंडिंग की।
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लिक्विड ऑक्सीजन-मीथेन तकनीक: 66.1 मीटर ऊंचा यह रॉकेट लिक्विड ऑक्सीजन और मीथेन ईंधन पर काम करता है। मीथेन इंजन से रॉकेट को बार-बार इस्तेमाल करना आसान और किफायती हो जाता है।
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20 उड़ानों का लक्ष्य: लैंडस्पेस का दावा है कि इस बूस्टर को कम से कम 20 बार दोबारा अंतरिक्ष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे स्पेस लॉन्च की लागत में भारी गिरावट आएगी।
एलन मस्क के SpaceX के लिए क्यों है यह बड़ी चुनौती?
अब तक वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में रीयूजेबल रॉकेट और सैटेलाइट लॉन्चिंग के क्षेत्र में एलन मस्क की स्पेसएक्स (Falcon 9) और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन का ही दबदबा रहा है। रॉकेट के सबसे महंगे हिस्से यानी बूस्टर को दोबारा इस्तेमाल करके स्पेसएक्स ने लॉन्च लागत को काफी कम कर दिया था।
चीन द्वारा इस तकनीक को सफलतापूर्वक हासिल कर लेने से ग्लोबल कमर्शियल लॉन्च मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। इसके अलावा, चीन अपने खुद के विशाल ब्रॉडबैंड सैटेलाइट नेटवर्क (मेगा-कॉन्स्टेलेशन) को बहुत तेजी से और कम खर्च पर अंतरिक्ष में स्थापित करने में सक्षम हो सकेगा, जिससे स्पेसएक्स के 'स्टारलिंक' (Starlink) को भी कड़ी टक्कर मिलेगी।