'हथियार छोड़कर सब कुछ दे दिया...' पत्नी ने रची पति को जहर देने की साजिश, चैटजीपीटी और ओपनएआई पर दर्ज हुआ मुकदमा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अब तक का सबसे चौंकाने वाला और गंभीर कानूनी मामला सामने आया है। अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना निवासी जेम्स गेट्स नामक व्यक्ति ने दुनिया की अग्रणी एआई कंपनी ओपनएआई (OpenAI) और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन के खिलाफ अदालत में दीवानी मुकदमा (Civil Lawsuit) दायर किया है। वादी का सीधा और सनसनीखेज आरोप है कि चैटजीपीटी (ChatGPT) ने उसकी पत्नी को उसे जहर देकर मारने की विस्तृत साजिश रचने, जानलेवा मात्रा तय करने और अपराध के सबूत मिटाने में सक्रिय व व्यक्तिगत तकनीकी सहायता प्रदान की। इस मुकदमे के सामने आने के बाद दुनिया भर में एआई चैटबॉट्स के सुरक्षा मानकों, दायित्वों और उनकी अनियंत्रित सलाह को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है।
कैसे हुआ साजिश का खुलासा? हस्तलिखित नोट और चैट हिस्ट्री ने खोली पोल
अदालत में दाखिल शिकायत के अनुसार, जेम्स गेट्स जुलाई 2025 में अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। उन्हें दिल की धड़कन असामान्य होने, अत्यधिक बेचैनी, पेट में असहनीय दर्द, भ्रम और शारीरिक कमजोरी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उस समय डॉक्टरों को बीमारी का स्पष्ट कारण समझ नहीं आया। लेकिन कुछ महीनों बाद, सितंबर 2025 में, जेम्स को घर पर अपनी अलग रह रही पत्नी शेरिल गेट्स द्वारा लिखा गया एक संदिग्ध नोट मिला। इस नोट में कई जहरीले पदार्थों की सूची, उनकी संभावित खुराक और कुछ पदार्थों के आगे स्पष्ट रूप से "घातक" (Lethal) लिखा हुआ था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि नोट के अंत में एक खास निर्देश लिखा था—"Clear all convos – log out of ChatGPT" (सभी बातचीत डिलीट करें और चैटजीपीटी से लॉग आउट करें)।
इस नोट को देखकर जेम्स तुरंत पुलिस के पास पहुंचे। जांच अधिकारियों ने सर्च वारंट के जरिए जब शेरिल की चैटजीपीटी बातचीत की हिस्ट्री खंगाली, तो साजिश की परतें खुलकर सामने आ गईं। रिकॉर्ड से खुलासा हुआ कि शेरिल ने चैटबॉट से कनेर (Oleander) जैसे अत्यंत जहरीले पौधे के उपयोग, उसकी जानलेवा मात्रा और इस बात की पूरी जानकारी मांगी थी कि क्या यह जहर पोस्टमार्टम (Autopsy) में पकड़ा जाएगा। चैट के एक हिस्से में जब महिला ने पोस्टमार्टम में पकड़े जाने से जुड़ा सवाल पूछा, तो चैटजीपीटी ने कथित रूप से जवाब दिया—"यह एक महत्वपूर्ण सवाल है और आप इसे बिल्कुल सही वजह से पूछ रही हैं"।
याचिका में क्या-क्या गंभीर आरोप लगाए गए हैं?
जेम्स गेट्स की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने याचिका में ओपनएआई के खिलाफ कई गंभीर बिंदु दर्ज कराए हैं:
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'हथियार छोड़कर सब कुछ मुहैया कराया': वादी के वकीलों का आरोप है कि चैटजीपीटी ने सामान्य जानकारी देने के बजाय महिला की स्थिति के अनुकूल बेहद व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया। याचिका में कहा गया कि चैटबॉट ने महिला को जहर देने की साजिश में 'हथियार छोड़कर बाकी सब कुछ' थाली में परोसकर दे दिया।
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शक को भड़काकर 'इको चैंबर' का काम किया: शिकायत के मुताबिक, शेरिल शुरुआत में अपने सामान्य काम और वैवाहिक तनाव को लेकर चैटबॉट से बात कर रही थी। लेकिन चैटजीपीटी ने एक गलत 'इको चैंबर' की तरह काम करते हुए महिला के मन में यह निराधार डर गहरा कर दिया कि उसका पति उस पर जासूसी कर रहा है और उसे बेसहारा छोड़ने की साजिश रच रहा है।
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सबूत छिपाने और डिजिटल फुटप्रिंट मिटाने की सलाह: आरोप है कि चैटबॉट ने न केवल जहर के असर के बारे में बताया, बल्कि भोजन में इसे कैसे छुपाया जाए और डिजिटल सबूतों को कैसे नष्ट किया जाए, इस पर भी मार्गदर्शन दिया।
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लापरवाह डिजाइन और सुरक्षा में भारी चूक: याचिका में आरोप लगाया गया कि ओपनएआई ने अपने उत्पाद के डिजाइन में घोर लापरवाही बरती और उसके 'सेफ्टी गार्डरेल्स' गंभीर अपराधों व हिंसा को रोकने में पूरी तरह विफल रहे।
पत्नी पर दर्ज आपराधिक केस क्यों हुआ बंद?
पुलिस जांच के बाद शेरिल गेट्स पर हत्या के प्रयास (Attempted Murder) और भोजन में मिलावट करने की गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई गई थीं। वह करीब छह महीने जेल में भी रही। हालांकि, अप्रैल 2026 में सरकारी अभियोजकों ने प्रत्यक्ष भौतिक सबूतों के अभाव (Insufficient Evidence) का हवाला देते हुए आपराधिक मामलों को औपचारिक रूप से वापस ले लिया। आपराधिक अदालत से कोई ठोस सजा न मिलने के बाद अब जेम्स गेट्स ने ओपनएआई और सैम ऑल्टमैन को प्रतिवादी बनाते हुए सिविल कोर्ट में हर्जाने और जवाबदेही तय करने के लिए यह मुकदमा दायर किया है।
ओपनएआई की प्रतिक्रिया: सुरक्षा हमारी प्राथमिकता, अकाउंट किया गया था बैन
इस मामले पर ओपनएआई ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि कंपनी के लिए यूजर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि मामला संज्ञान में आने के बाद उक्त महिला यूजर के अकाउंट को तत्काल प्रभाव से प्लेटफॉर्म से बैन कर दिया गया था और पुलिस जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सभी आवश्यक डिजिटल रिकॉर्ड और सहयोग उपलब्ध कराया गया था। हालांकि, यह पहला मामला नहीं है जब ओपनएआई ऐसी कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है; इससे पहले भी खुदकुशी के लिए उकसाने और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को हिंसक सुझाव देने के आरोपों में कंपनी के खिलाफ अमेरिका और कनाडा की अदालतों में कई मुकदमे विचाराधीन हैं।