लाल सागर में हूतियों का बड़ा सैन्य पलटवार, मोचा शहर पर कब्जे का दावा; क्या निशाने पर है वैश्विक चोकपॉइंट बाब-अल मंडेब?
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तटवर्ती मोर्चे पर अचानक बड़ा सैन्य अभियान छेड़ दिया है। सरकारी सैन्य सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने पश्चिम यमन के ताइज और हुदैदाह प्रांत की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मोचा (Al-Mokha) पर भीषण जमीनी हमले के बाद नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
मोचा शहर पर हूतियों के इस कथित कब्जे को यमन के गृहयुद्ध और लाल सागर की सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन की नेशनल रेसिस्टेंस फोर्सेज (तारिक सालेह नीत बल) को मोचा से पीछे हटकर दक्षिण की ओर धुबाब (Dhubab) क्षेत्र में अपनी वैकल्पिक कमान स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस भीषण गोलाबारी और झड़पों के बीच मोचा शहर से हजारों आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों ने दक्षिण स्थित अदन और लहज प्रांतों की ओर सुरक्षित ठिकानों के लिए पलायन शुरू कर दिया है।
बाब-अल मंडेब से महज 80 किमी की दूरी: क्यों रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है मोचा?
मोचा केवल एक तटीय शहर नहीं, बल्कि लाल सागर के दक्षिणी मुहाने पर स्थित वह बिंदु है जो दुनिया के सबसे संवेदनशील और व्यस्ततम समुद्री गलियारों में शामिल बाब-अल मंडेब (Bab el-Mandeb Strait) के ठीक मुहाने पर पड़ता है। मोचा से बाब-अल मंडेब जलडमरूमध्य की दूरी महज 70 से 80 किलोमीटर रह जाती है।
बाब-अल मंडेब को अरबी भाषा में 'आंसुओं का द्वार' (Gate of Tears) भी कहा जाता है, क्योंकि यह संकरा जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। सामान्य दिनों में दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का करीब 10 से 12 फीसदी हिस्सा और 50 से 70 लाख बैरल कच्चा तेल व पेट्रोलियम उत्पाद रोजाना इसी संकरे रास्ते से होकर स्वेज नहर के जरिए यूरोप और अमेरिका पहुंचते हैं। मोचा पर काबिज होने के बाद हूतियों को तटीय रडार, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन तैनात करने के लिए सीधी जमीनी जमीन मिल गई है। इससे बाब-अल मंडेब से गुजरने वाले किसी भी व्यापारिक जहाज या टैंकर को सीधे निशाना बनाना उनके लिए पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।
हनिश और जुकार द्वीपों पर भी नजर, पेरीम द्वीप पर गहराया संकट
मोचा पर कब्जा जमाने के साथ ही हूती लड़ाकों ने लाल सागर के बीच में स्थित रणनीतिक हनिश द्वीप समूह (Hanish Islands) और जुकार द्वीप (Zuqar Island) की ओर भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। यमनी सैन्य सूत्रों का कहना है कि इन द्वीपों पर मिसाइल हमलों और नावों के जरिए बढ़त बनाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
सबसे बड़ा रणनीतिक सिरदर्द बाब-अल मंडेब जलडमरूमध्य के ठीक बीचों-बीच स्थित पेरीम द्वीप (Perim Island / Mayyun) को लेकर पैदा हो गया है। पेरीम द्वीप सीधे तौर पर मुख्य शिपिंग चैनल को दो हिस्सों में बांटता है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने आगाह किया है कि यदि हूती विद्रोही मोचा के बाद धुबाब और पेरीम द्वीप पर कब्जा करने में कामयाब हो जाते हैं, तो पूरे बाब-अल मंडेब की भौतिक नाकेबंदी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में उन्हें वहां से खदेड़ने के लिए किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन को सीधे जमीनी युद्ध में उतरना पड़ सकता है।
सऊदी अरब और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
हूतियों की इस आक्रामक चाल से सबसे बड़ा झटका सऊदी अरब और खाड़ी देशों को लगा है। फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले से बने गतिरोध के बाद, खाड़ी देशों के पास कच्चे तेल को पश्चिमी बाजारों तक पहुंचाने के लिए लाल सागर ही एकमात्र प्रमुख वैकल्पिक पाइपलाइन और शिपिंग रूट बचा था।
मोचा पर कब्जे और बाब-अल मंडेब पर सीधी सैन्य पकड़ बनने से सऊदी अरब के प्रमुख बंदरगाहों—जैसे जेद्दा और यानबू—से होने वाले तेल निर्यात पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। हूती विद्रोहियों ने पहले ही लाल सागर से गुजरने वाले सऊदी और पश्चिमी देशों से जुड़े तेल टैंकरों के खिलाफ पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर रखी है। इस जमीनी उलटफेर की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है और वैश्विक शिपिंग कंपनियों को फिर से अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' का 14 से 20 दिन लंबा और महंगा चक्कर लगाने को विवश होना पड़ सकता है।
क्षेत्रीय गठबंधन में दरार और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम ने यमन में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित गुटों के आपसी मतभेदों और गठबंधन की कमजोरियों को भी सतह पर ला दिया है। यूएई समर्थित बलों की वापसी और स्थानीय गुटों में समन्वय की कमी का फायदा उठाकर हूतियों ने एक साथ कई मोर्चों पर बढ़त हासिल की है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हुदैदाह और तटीय इलाकों में हूतियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सेना के पीछे हटने से स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। आने वाले 48 से 72 घंटे यह तय करेंगे कि सरकारी बल धुबाब और बाब-अल मंडेब के प्रवेश द्वार को सुरक्षित रख पाते हैं या फिर लाल सागर का यह सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय समुद्री चोकपॉइंट पूरी तरह हूतियों की मिसाइलों के सीधे नियंत्रण में चला जाएगा।