चीन और भारत के बीच कैसे बैलेंस बनाता है न्यूजीलैंड? PM मोदी के दौरे से पहले कीवी प्रधानमंत्री ने दिया कड़क जवाब, खालिस्तान पर भी दी चेतावनी
कूटनीति की बिसात पर दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों—भारत और चीन—के बीच संतुलन साधना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होता। लेकिन न्यूजीलैंड ने इसका एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक तोड़ निकाल लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी न्यूजीलैंड दौरे से ठीक पहले, कीवी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक इंटरव्यू में ग्लोबल पॉलिटिक्स, भारत-चीन संबंधों और खालिस्तानी कट्टरपंथियों को लेकर बेबाक राय रखी है। पीएम मोदी इस हफ्ते अपने तीन देशों के अहम दौरे पर निकल रहे हैं, जिसमें न्यूजीलैंड में उनके भव्य स्वागत की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं।
भारत और चीन के बीच संतुलन का 'मास्टरस्ट्रोक'
हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान जब पीएम लक्सन से पूछा गया कि न्यूजीलैंड, भारत और चीन जैसी दो बड़ी एशियाई ताकतों के बीच कैसे संतुलन स्थापित करता है, तो उन्होंने बेहद सधा हुआ जवाब दिया। लक्सन ने कूटनीति का मूल मंत्र साझा करते हुए कहा कि किसी भी अन्य रिश्ते की तरह, हम वहां सहयोग करते हैं जहां दोनों के हित मिलते हैं और जहां मतभेद होते हैं, उन्हें स्वीकार कर उनका कूटनीतिक हल निकालते हैं। उनका साफ मानना है कि मतभेदों को टकराव का कारण नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि उन्हें समझदारी से संभालना ही असली लीडरशिप है।
अमेरिका का दिया सटीक उदाहरण
अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए लक्सन ने सुपरपावर अमेरिका का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ न्यूजीलैंड के कई मुद्दों पर बेहद गहरे और दोस्ताना संबंध हैं, लेकिन जब बात 'टैरिफ' (व्यापारिक कर) की आती है, तो दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद भी हैं। न्यूजीलैंड एक छोटा देश होने के नाते हमेशा मुक्त व्यापार (Free Trade) का समर्थन करता है और हाई टैरिफ को दुनिया के लिए गलत मानता है। ठीक इसी तरह, चीन के साथ भी उनका इतिहास और राजनीतिक ढांचा बिल्कुल अलग है। लक्सन ने स्पष्ट किया कि समान सोच वाले मित्र देशों (जैसे भारत) के साथ मिलकर न्यूजीलैंड हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम करेगा।
खालिस्तान पर सख्त चेतावनी: 'धमकी और हिंसा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं'
भारत के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत तब दिखी, जब न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री ने 'खालिस्तान' के मुद्दे पर बेहद सख्त और जीरो-टॉलरेंस वाला रवैया अपनाया। लक्सन ने दो टूक शब्दों में कहा कि खालिस्तानी गतिविधियों की वजह से भारत को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने अपनी धरती से भारत विरोधी तत्वों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि न्यूजीलैंड में किसी भी तरह की धमकी, हिंसा या डराने-धमकाने जैसी गतिविधियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों से निपटने के लिए वहां का कानून पूरी सख्ती से अपना काम करेगा।
आतंकवाद पर भारत-न्यूजीलैंड का साझा मोर्चा
लक्सन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार अपने सहयोगी देशों से खालिस्तानी कट्टरपंथ पर लगाम कसने की मांग कर रहा है। लक्सन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और न्यूजीलैंड को आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा खतरों को लेकर अपनी खुफिया जानकारी और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करना चाहिए। पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले न्यूजीलैंड के पीएम के इन बयानों ने दोनों देशों के बीच एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव रख दी है।