'US की मदद की तो भुगतना होगा अंजाम...', ईरान की क्षेत्रीय देशों को दो टूक चेतावनी; बोला—'अमेरिकी सेना को सहयोग मतलब सीधा युद्ध'
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में युद्ध के गहराते बादलों और अमेरिका-इजरायल के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने क्षेत्र के सभी पड़ोसी और खाड़ी देशों को अंतिम व सख्त चेतावनी जारी की है। तेहरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी देश ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई में संयुक्त राज्य अमेरिका (US) या इजरायल की किसी भी प्रकार से मदद की, तो उसे सीधे तौर पर युद्ध में भागीदार माना जाएगा।
ईरानी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि अमेरिका को अपना हवाई क्षेत्र (Airspace), सैन्य अड्डे या खुफिया साजो-सामान का इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाले किसी भी देश को गंभीर सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ेगा और वह देश ईरान के सीधे निशाने पर आ जाएगा।
हवाई क्षेत्र या सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने पर होगा जवाबी हमला
ईरानी विदेश मंत्रालय और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने बयान जारी करते हुए कहा है कि तेहरान क्षेत्र के सभी देशों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
ईरान ने स्पष्ट किया है:
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तटस्थता की शर्त: यदि पड़ोसी देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करना चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस टकराव में पूरी तरह तटस्थ (Neutral) रहना होगा।
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सीधे टारगेट बनेंगे ठिकाने: यदि अमेरिकी लड़ाकू विमानों या मिसाइलों द्वारा ईरान की सीमा में घुसपैठ के लिए किसी पड़ोसी मुल्क की जमीन या एयरस्पेस का इस्तेमाल किया गया, तो ईरान उन विदेशी सैन्य ठिकानों और संबंधित बुनियादी ढांचे को वैध सैन्य लक्ष्य (Legitimate Military Target) मानकर जवाबी कार्रवाई करेगा।
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खाड़ी देशों को कूटनीतिक संदेश: यह संदेश विशेष रूप से उन खाड़ी देशों के लिए है जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्य बेस और नौसैनिक अड्डे स्थापित हैं।
अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और संभावित टकराव का खतरा
गाजा, लेबनान और लाल सागर में जारी संघर्ष के बाद से ही अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों (जैसे THAAD और पैट्रियट) की तैनाती काफी बढ़ा दी है। अमेरिका का दावा है कि यह तैनाती सहयोगियों की रक्षा और किसी भी बड़े हमले को रोकने के लिए है।
वहीं दूसरी ओर, ईरान इस भारी सैन्य जमावड़े को अपनी संप्रभुता के लिए सीधा खतरा मान रहा है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि अमेरिका क्षेत्र के देशों को ढाल बनाकर अपने रणनीतिक मंसूबों को पूरा करना चाहता है, जिससे पूरा पश्चिम एशिया एक विनाशकारी और अंतहीन महायुद्ध की आग में झुलस सकता है।
कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए दबाव बनाने की रणनीति
चेतावनी जारी करने के साथ-साथ ईरान ने सऊदी अरब, कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क भी तेज कर दिया है।
तेहरान इन देशों को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि क्षेत्र में किसी भी बड़े युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान खाड़ी की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को होगा। कई खाड़ी देशों ने भी पहले ही संकेत दिए हैं कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी संप्रभु देश पर हमले के लिए नहीं होने देना चाहते।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह सीधी चेतावनी अमेरिकी सैन्य विकल्पों को सीमित करने और किसी भी संभावित संयुक्त हमले से पहले क्षेत्रीय सहयोगियों को पीछे हटने पर मजबूर करने की एक सोची-समझी रक्षा रणनीति का हिस्सा है।