ब्राजील में चुनाव हारते ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा परिवार समेत अमेरिका भागे बोल्सोनारो, पत्नी और दोनों बेटियों के साथ मियामी में ली पनाह
ब्राजील के हालिया राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। वर्तमान राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा से रनऑफ मुकाबले में मिली करारी शिकस्त के बाद लिबरल पार्टी के उम्मीदवार और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो गुपचुप तरीके से देश छोड़कर संयुक्त राज्य अमेरिका पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और राजनयिक सूत्रों के अनुसार, बोल्सोनारो अपनी पत्नी फर्नांडा और अपनी दो बेटियों के साथ फ्लोरिडा के मियामी शहर में उतरे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद उनके इस कदम को एक सोची-समझी पलायन योजना माना जा रहा है। राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने उनके इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ब्राजील के लोकतांत्रिक इतिहास के लिए एक "शर्मनाक कृत्य" करार दिया है। लूला ने कहा कि जो व्यक्ति अपने ही देश से इस तरह छिपकर भागता है, उसके पास छिपाने के लिए जरूर कई काले राज हैं। राजधानी ब्रासीलिया से लेकर रियो डी जेनेरियो तक इस नाटकीय घटनाक्रम ने राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का 24 घंटे का अल्टीमेटम और पासपोर्ट जब्ती का डर: क्यों अचानक छोड़ा देश?
फ्लावियो बोल्सोनारो के ब्राजील से अचानक फरार होने की सबसे बड़ी वजह देश के सुप्रीम फेडरल कोर्ट का वह सीलबंद आदेश था, जो रविवार को मतदान खत्म होते ही जारी किया गया था। अदालत ने एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग और सार्वजनिक धन की हेराफेरी से जुड़े मामले की जांच के तहत बोल्सोनारो को अपने नियमित और राजनयिक (डिप्लोमैटिक) दोनों पासपोर्ट 24 घंटे के भीतर सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया था। मंगलवार दोपहर 12 बजे तक की समयसीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन मियाद पूरी होने से पहले ही वे सीमा पार कर गए। सूत्रों का कहना है कि जैसे ही समयसीमा समाप्त हुई, अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट औपचारिक रूप से रद्द कर दिए। हालांकि भागने से ठीक पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद का बचाव करते हुए कहा था कि वे देश छोड़कर नहीं जाएंगे और इन कानूनी साजिशों का सामना करेंगे। लेकिन हकीकत में वे गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के खतरे को भांपते हुए अपने पूरे परिवार को लेकर सुरक्षित ठिकाने की ओर निकल गए।
पिता जायर बोल्सोनारो के पदचिह्नों पर बेटा: 2022 के इतिहास का खौफनाक दोहराव
राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को ब्राजील के इतिहास की पुनरावृत्ति मान रहे हैं। यह पलायन हूबहू उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के कदमों की याद दिलाता है। गौरतलब है कि साल 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में जब जायर बोल्सोनारो को लूला डा सिल्वा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, तब उन्होंने भी अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और लूला के शपथ ग्रहण से ठीक पहले फ्लोरिडा भाग गए थे। बाद में जायर बोल्सोनारो के समर्थकों ने ब्रासीलिया में सरकारी इमारतों, संसद और सुप्रीम कोर्ट में जमकर तोड़फोड़ की थी। जायर बोल्सोनारो को बाद में तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई और वर्तमान में वे नजरबंद हैं। अब उनके बेटे फ्लावियो ने भी चुनाव हारते ही उसी रास्ते को चुना और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अमेरिका की शरण ले ली।
अमेरिकी रुख और वीजा की स्थिति: ट्रंप की प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाई सरगर्मी
फ्लावियो बोल्सोनारो और उनके परिवार के अमेरिका पहुंचने के बाद वाशिंगटन की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिका फ्लावियो बोल्सोनारो, उनकी पत्नी और उनकी दोनों बेटियों को औपचारिक रूप से देश में प्रवेश के लिए वीजा जारी करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो लंबे समय से बोल्सोनारो परिवार के करीबी सहयोगी रहे हैं, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस कदम का समर्थन करते हुए बोल्सोनारो परिवार को "बेहतरीन लोग" बताया है। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ब्राजील चुनाव में औपचारिक रूप से किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया था, लेकिन उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर संदेह जरूर जताया। बोल्सोनारो के छोटे भाई एडुआर्डो बोल्सोनारो पहले से ही अमेरिका के टेक्सास में रह रहे हैं और उन्होंने पहले ही बयान दिया था कि हार की स्थिति में फ्लावियो को देश छोड़ देना चाहिए।
चुनावी नतीजों पर उठाए सवाल, लेकिन जनादेश ने लूला को सौंपा सत्ता का ताज
इस बेहद ध्रुवीकृत चुनावी मुकाबले में राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने 6.4 करोड़ से अधिक वोट हासिल किए, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग 6 करोड़ वोट मिले। करीब 44 लाख वोटों के बड़े अंतर और 4 प्रतिशत के मार्जिन से पराजित होने के बावजूद बोल्सोनारो ने शुरुआत से ही नतीजों को स्वीकार करने से मना कर दिया था। उन्होंने मतदान केंद्रों पर अव्यवस्था और वोटिंग प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप लगाते हुए चुनावी अदालत से परिणामों को रद्द करने की मांग की थी। लेकिन चुनाव आयोग और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी माना। हार के बाद प्रेस से बात करने से इनकार करते हुए वे अचानक गायब हो गए और सीधे अमेरिका में प्रकट हुए।
ब्राजील की राजनीति में नया कानूनी संकट: क्या होगा प्रत्यर्पण या बढ़ेगा कूटनीतिक तनाव?
फ्लावियो बोल्सोनारो के अमेरिका में शरण लेने के बाद ब्राजील सरकार अब कानूनी और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है। ब्राजील के अटॉर्नी जनरल और न्याय मंत्रालय पर अब यह दबाव है कि वे अदालत के आदेश का उल्लंघन कर भागे सीनेटर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस या प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया शुरू करें। यदि ब्राजील की शीर्ष अदालत उन्हें आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित करती है, तो अमेरिका और ब्राजील के बीच एक गंभीर राजनयिक गतिरोध पैदा हो सकता है। लूला प्रशासन इसे कानून के शासन की अवहेलना मान रहा है, जबकि बोल्सोनारो खेमा इसे राजनीतिक प्रतिशोध का नाम देकर अमेरिका में राजनीतिक शरण लेने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वाशिंगटन उन्हें कब तक सुरक्षा प्रदान करता है और ब्राजील की अदालतें इस खुली कानूनी चुनौती पर क्या कड़ा कदम उठाती हैं।