दिल्ली में सीक्रेट मीटिंग के बाद ईरान का बड़ा ऐलान: UAE संग पुरानी तल्खी भुलाकर नई शुरुआत करने को तैयार

दिल्ली में सीक्रेट मीटिंग के बाद ईरान का बड़ा ऐलान: UAE संग पुरानी तल्खी भुलाकर नई शुरुआत करने को तैयार

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के मंच से पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की भू-राजनीति में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिला है। खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण तनाव, हमलों और आपसी अविश्वास के बीच ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने बिगड़े रिश्तों को सुधारने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। दिल्ली में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई आमने-सामने की गोपनीय वार्ता के ठीक अगले दिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सार्वजनिक ऐलान करते हुए कहा कि ईरान यूएई के साथ बीती बातों और तल्खियों को भुलाकर (Turn The Page) भविष्य की ओर देखना और एक नई शुरुआत करना चाहता है।

दिल्ली में हुई दुर्लभ और सबसे उच्चस्तरीय बैठक

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच दिल्ली में द्विपक्षीय बातचीत हुई। पिछले कुछ महीनों में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष और उसके बाद खाड़ी देशों में स्थित ठिकानों पर हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली सबसे उच्चस्तरीय आमने-सामने की बैठक थी।

अगस्त में यूएई द्वारा ईरान के साथ व्यापारिक और वित्तीय लेनदेन निलंबित करने के बाद दोनों देशों के संबंध बेहद नाजुक दौर में पहुंच गए थे। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत की धरती पर दोनों नेताओं का एक साथ बैठना वैश्विक कूटनीति के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।

'यूएई से कोई बैर नहीं, आपत्ति अमेरिकी सैन्य ठिकानों से है': पेजेश्कियन

रविवार को ईरानी मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि तेहरान खाड़ी के अपने पड़ोसी मुल्कों को 'भाई' मानता है। उन्होंने कहा:

"हमारा यूएई या क्षेत्र के किसी भी पड़ोसी मुल्क से कोई झगड़ा नहीं है। हमारी समस्या उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US Military Bases) से है, जिनका इस्तेमाल हमारे देश, बुनियादी ढांचे और नागरिकों पर हमले करने के लिए किया जाता है। हमारे मित्र और पड़ोसी देशों को अपनी जमीन का इस्तेमाल दुश्मनों को हमारे खिलाफ करने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। क्राउन प्रिंस के साथ हमारी बातचीत बेहद सकारात्मक रही और हमने अतीत को पीछे छोड़कर एक साथ भविष्य का निर्माण करने पर सहमति जताई है।'"

पेजेश्कियन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह मध्य पूर्व के ऊर्जा संसाधनों का दोहन करने और हथियारों की बिक्री बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय देशों को आपस में लड़ाने का काम करता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बैठक से पहले घटा तनाव

यह कूटनीतिक सुलह ऐसे समय में सामने आई है जब ओमान में ईरानी अधिकारियों और खाड़ी देशों (GCC व इराक) के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) की सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर बैठक प्रस्तावित है। वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे संवेदनशील रास्ते पर बने गतिरोध को सुलझाने से पहले यूएई और ईरान के बीच बर्फ पिघलना खाड़ी में स्थिरता के लिहाज से बेहद अहम है।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब ओमान में होने वाली इस क्षेत्रीय बैठक को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेरुखी दिखाते हुए कहा कि "मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यह उन देशों का अपना फैसला है"।

भारत बना दो प्रतिद्वंद्वियों के बीच सेतु

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय जानकारों ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत की इस मध्यस्थता और मंच उपलब्ध कराने की भूमिका की सराहना की है। पूर्व राजनयिकों का मानना है कि भारत ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को एक मेज पर लाकर यह साबित कर दिया है कि नई दिल्ली जटिल वैश्विक संकटों के बीच 'ब्रिज-बिल्डर' (पुल का निर्माण करने वाला) बन सकता है।

सम्मेलन में ईरान और यूएई दोनों ने संयुक्त ब्रिक्स घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए, जिसमें मध्य पूर्व में संयम बरतने, नागरिक ठिकानों की सुरक्षा करने और समुद्री व्यापार गलियारों को निर्बाध रखने की अपील की गई है।