ट्रंप की आखिरी चेतावनी से कांपा मिडिल ईस्ट! ईरान पर फिर महायुद्ध की आहट, जानें तेहरान के पलटवार का वो खतरनाक प्लान

ट्रंप की आखिरी चेतावनी से कांपा मिडिल ईस्ट! ईरान पर फिर महायुद्ध की आहट, जानें तेहरान के पलटवार का वो खतरनाक प्लान

अमेरिका और ईरान के बीच जारी बेहद नाजुक और अस्थिर युद्धविराम एक बार फिर पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक नई और कड़क चेतावनी के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' ने खुफिया सूत्रों के हवाले से एक बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट साझा की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की तरफ से युद्ध को टालने के लिए जो नया प्रस्ताव भेजा गया था, वह पूरी तरह से अपर्याप्त है और उसमें शांति बहाली को लेकर कोई ठोस सुधार नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका तेहरान को किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है, जिससे इस क्षेत्र में फिर से भीषण बमबारी की आहट तेज हो गई है।

खाड़ी देशों के कहने पर रुका था हमला, ट्रंप बोले- ईरान जानता है आगे क्या होगा

यह बड़ा कूटनीतिक संकट ऐसे समय पर आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अपने प्रमुख खाड़ी सहयोगी देशों के विशेष अनुरोध पर ईरान के खिलाफ होने वाले नए सैन्य हमलों को कुछ समय के लिए रोक दिया था। ट्रंप प्रशासन का दावा था कि तेहरान के साथ पर्दे के पीछे गंभीर बातचीत चल रही है जिससे एक स्वीकार्य समझौता मुमकिन है। हालांकि, बातचीत बेनतीजा रहने के बाद 'न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए एक बेबाक इंटरव्यू में ट्रंप ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। ट्रंप ने तेहरान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वहां बैठा इस्लामी शासन बहुत अच्छी तरह से जानता है कि आगे क्या होने वाला है। उन्होंने दावा किया कि ईरान इस समय अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की गंभीरता को समझ चुका है और वह पहले से कहीं ज्यादा समझौते के लिए छटपटा रहा है।

छोटी अवधि लेकिन अत्यधिक विनाशकारी युद्ध की तैयारी में जुटा तेहरान

जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के ईरानी सुरक्षा मामलों के शीर्ष विशेषज्ञ हामिदरेजा अजीजी ने 'न्यूयॉर्क टाइम्स' को एक विशेष विश्लेषण में बताया कि 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत होने के बाद से ही ईरान एक बेहद लंबे संघर्ष की मानसिक तैयारी में जुटा था। इसी रणनीति के तहत उसने इजरायल और अन्य क्षेत्रीय ठिकानों पर अपने ड्रोन और मिसाइल हमलों को सीमित रखा था ताकि वह अपना मुख्य गोला-बारूद बचा सके। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि अब दोबारा युद्ध की आग भड़कती है, तो तेहरान 'छोटी अवधि लेकिन अत्यधिक तीव्रता' वाले एक अत्यंत आक्रामक संघर्ष का सामना करने की रणनीति बना रहा है। इसमें अमेरिका द्वारा ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, तेल रिफाइनरियों और खार्ग द्वीप जैसी उसकी आर्थिक जीवनरेखाओं पर होने वाले हवाई हमलों और संभावित जमीनी कार्रवाई का मुकाबला करना शामिल है।

खाड़ी देशों को 'ऊंटों के युग' में भेजने की धमकी, अरब के तेल क्षेत्रों पर नजर

इस संभावित नए दौर के महायुद्ध में ईरान की जवाबी रणनीति बेहद खौफनाक नजर आ रही है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि हमला होने की स्थिति में ईरान प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर दाग सकता है। ईरान का मुख्य फोकस सऊदी अरब और यूएई (UAE) के विशाल तेल क्षेत्रों, रिफाइनरियों और महत्वपूर्ण बंदरगाहों को तबाह करना होगा, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाकर ट्रंप प्रशासन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। ईरानी सुरक्षा बलों (IRGC) से जुड़े प्रमुख विश्लेषक मेहदी खरातियान ने एक पॉडकास्ट में खुलेआम धमकी देते हुए कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे अबू धाबी पर कब्जा कर सकते हैं और UAE को वापस ऊंटों की सवारी करने वाले पुराने युग में धकेल देंगे। ईरान का आरोप है कि इन अरब देशों ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान गुप्त रूप से उनकी मदद की थी।

होर्मुज के साथ बाब अल-मंडेब पर कब्जे का प्लान, तेहरान की सड़कों पर हथियारों की ट्रेनिंग

अपनी जवाबी रणनीति को मजबूत करने के लिए ईरान के पास वैश्विक व्यापार को ठप करने वाले कई अन्य खतरनाक सामरिक विकल्प भी मौजूद हैं। ईरान पहले से ही रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमन्य' (Strait of Hormuz) पर अपना मजबूत नियंत्रण रखता है, जहां से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा गुजरता है। जानकारों का कहना है कि युद्ध बढ़ने पर तेहरान यमन के अपने हमख्याल हूती विद्रोहियों की मदद से 'बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य' पर भी कब्जा करने की कोशिश करेगा, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग दसवां हिस्सा होकर गुजरता है। इस बड़े सैन्य संकट के बीच तेहरान की सड़कों पर आम नागरिकों को हथियारों को चलाने और युद्ध लड़ने का बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो इस बात का साफ संकेत है कि ईरान किसी भी संभावित अमेरिकी जमीनी आक्रमण के खिलाफ एक बड़े जन-युद्ध (People's War) की तैयारी कर चुका है।

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