सऊदी अरब की ढाल बनेंगे पाकिस्तान और तुर्किए: हूती हमलों के बीच एक्टिव हुआ ऐतिहासिक 'मक्का रक्षा समझौता
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी गठबंधन के बीच छिड़ी जंग ने अब एक नए अंतरराष्ट्रीय सैन्य ध्रुवीकरण को जन्म दे दिया है। सऊदी अरब के शहरों, पवित्र स्थलों और तेल प्रतिष्ठानों पर हूतियों द्वारा किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब का त्रिपक्षीय 'मक्का रक्षा समझौता' (Mecca Joint Defence Agreement) पहली बार सक्रिय (Activate) हो गया है।
रियाद में सामरिक, राजनीतिक एवं रक्षा समिति (SPDC) की आपात बैठक के बाद तीनों देशों ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि मक्का समझौते के तहत साझा सुरक्षा और सामूहिक रक्षा उपायों को जमीन पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत पाकिस्तान और तुर्किए अपने सैन्य बलों और रक्षा संसाधनों को सऊदी अरब की सुरक्षा और निवारक तैयारियों (Deterrence Measures) के लिए तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।
क्या है 'मक्का रक्षा समझौता'? नाटो के आर्टिकल-5 जैसा सुरक्षा कवच
अगस्त के महीने में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के शीर्ष नेतृत्व ने मक्का मुकर्रमा में इस त्रिपक्षीय रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते को मध्य पूर्व का 'इस्लामिक नाटो' भी कहा जा रहा है, क्योंकि इसका मुख्य सिद्धांत बिल्कुल नाटो के प्रसिद्ध सामूहिक सुरक्षा क्लॉज (आर्टिकल-5) की तर्ज पर तैयार किया गया है:
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एक पर हमला, तीनों पर हमला: समझौते की मूल शर्त है कि समूह के किसी भी एक सदस्य देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर संयुक्त हमला माना जाएगा।
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सामूहिक सैन्य जवाब: खतरे की स्थिति में तीनों देश अपनी सैन्य शक्ति, खुफिया जानकारी और तकनीकी क्षमताओं को साझा कर संयुक्त रणनीति के तहत जवाब देंगे।
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सचिवालय और कमान: इस समझौते के तहत पाकिस्तान के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को मक्का डिफेंस अलायंस का पहला महासचिव नियुक्त किया जा चुका है।
रियाद में महामंथन: पाकिस्तानी सेना प्रमुख और शीर्ष रक्षा अधिकारी रहे मौजूद
सोमवार को रियाद में आयोजित उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के साथ-साथ तुर्किए के वरिष्ठ राजनयिक और सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया।
बैठक के बाद संयुक्त बयान में सऊदी अरब और उसके पवित्र स्थलों को निशाना बनाकर किए जा रहे 'जघन्य हूती हमलों' की कड़े शब्दों में निंदा की गई। प्रिंस खालिद बिन सलमान ने कहा कि यह गठबंधन किसी भी बाहरी आक्रामकता के खिलाफ सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है।
क्या सीधे युद्ध में उतरेंगे पाकिस्तानी और तुर्की सैनिक?
मक्का पैक्ट के एक्टिव होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पाकिस्तान और तुर्किए की सेनाओं की भूमिका क्या होगी? रक्षा विशेषज्ञों और राजनयिक सूत्रों के अनुसार:
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सीमा और एयर डिफेंस सुरक्षा: पाकिस्तानी और तुर्की सैनिकों को सीधे यमन के भीतर जमीनी जंग में उतारने के बजाय सऊदी अरब की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, तेल रिफाइनरियों, हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की रक्षा में तैनात किए जाने की संभावना है।
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तुर्की ड्रोन और रडार तकनीक: तुर्किए अपने अत्याधुनिक बेराक्तार (Bayraktar) और अन्य लड़ाकू ड्रोन सिस्टम के साथ-साथ उन्नत एयर-सर्विलांस रडार सऊदी अरब को उपलब्ध कराएगा, ताकि हूतियों के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले सुसाइड ड्रोनों को समय रहते नष्ट किया जा सके।
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पाकिस्तानी थल सेना की कमान: पाकिस्तान पारंपरिक रूप से सऊदी अरब में अपने सुरक्षा सलाहकार और सुरक्षा दस्ते तैनात करता रहा है। इस बार उनकी मौजूदगी बड़े सैन्य कंटींजेंट के रूप में हो सकती है।
फजीहत के बाद हरकत में आया पाकिस्तान
सऊदी अरब में पिछले कई हफ्तों से हूती हमलों की तीव्रता बढ़ने के बावजूद पाकिस्तान की शुरुआती खामोशी को लेकर इस्लामाबाद की काफी आलोचना हो रही थी। पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश ईरान (जो हूतियों का प्रमुख समर्थक है) को नाराज नहीं करना चाहता था। लेकिन सऊदी अरब द्वारा दिए गए अरबों डॉलर के वित्तीय बेलआउट पैकेज, कर्ज रोल-ओवर और रियाद के कूटनीतिक दबाव के बाद पाकिस्तान के लिए पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं बचा था।
चारों तरफ से उठे सवालों के बाद पाकिस्तान ने अपनी पूरी सैन्य और कूटनीतिक ताकत को सऊदी अरब के समर्थन में झोंकने का फैसला किया।
'यमन की सुबह' ऑपरेशन से बौखलाए हैं हूती
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा यमन में शुरू किए गए 'ऑपरेशन यमन डॉन' (Dawn of Yemen) के तहत हाल ही में 100 से अधिक लड़ाकू विमानों से हूतियों के 300 से ज्यादा ठिकानों को तबाह किया गया है। इसके अलावा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब और लाल सागर के कई बंदरगाहों से हूतियों को पीछे धकेला गया है।
इसी के जवाब में हूतियों ने सऊदी एयरस्पेस को असुरक्षित घोषित करते हुए रियाद, अभा और खमीस मुशायत पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे थे। अब मक्का पैक्ट के सक्रिय होने से यह स्पष्ट हो गया है कि यदि हूती विद्रोही अपने हमले तेज करते हैं, तो उन्हें केवल सऊदी सेना से नहीं, बल्कि तुर्किए और पाकिस्तान के संयुक्त सैन्य तंत्र से भी दो-चार होना पड़ेगा।