सऊदी अरब पहुंचे पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और हजारों सैनिक, खुफिया रक्षा समझौते से कांपा दुश्मन

सऊदी अरब पहुंचे पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और हजारों सैनिक, खुफिया रक्षा समझौते से कांपा दुश्मन

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है और किसी भी वक्त एक बड़ा धमाका होने की आशंका बढ़ गई है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपनी सेना और वायुसेना की भारी तैनाती कर दी है। इस कदम के बाद से पूरे वैश्विक गलियारे में हलचल मच गई है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि चीनी मूल की आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) और लड़ाकू विमानों की टुकड़ी भी सऊदी की सुरक्षा में उतार दी है।

सऊदी की धरती पर 8,000 से ज्यादा पाक सैनिकों का डेरा

खतरनाक मोर्चेबंदी को देखते हुए पाकिस्तान ने सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर लगभग 8,000 से अधिक जांबाज सैनिकों को तैनात किया है। इसके साथ ही एक पूरा फाइटर जेट स्क्वाड्रन और दो खतरनाक ड्रोन स्क्वाड्रन भी सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती पिछले कुछ हफ्तों के दौरान बहुत ही गोपनीय तरीके से की गई है। इस पूरी सैन्य हलचल का खर्च खुद सऊदी अरब उठा रहा है, जबकि कमान पाकिस्तानी अधिकारियों के हाथों में है।

चीनी मिसाइल डिफेंस सिस्टम HQ-9 संभालेगा मोर्चा

इस नई सैन्य तैनाती में सबसे चौंकाने वाली बात चीनी मूल की 'HQ-9 एयर डिफेंस प्रणाली' का शामिल होना है। इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम को संचालित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित पाकिस्तानी कर्मियों को सऊदी अरब भेजा गया है। ईरान या उसके समर्थित गुटों द्वारा किए जाने वाले किसी भी संभावित ड्रोन या मिसाइल हमले को हवा में ही ध्वस्त करने के लिए इस सिस्टम को सऊदी की सीमा और तेल क्षेत्रों के नजदीक एक्टिव किया गया है।

क्या है दोनों देशों के बीच हुआ 'सीक्रेट न्यूक्लियर एग्रीमेंट'?

सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के पीछे साल 2025 में हस्ताक्षरित किया गया एक अत्यंत गोपनीय रक्षा समझौता (Mutual Defense Agreement) है। हालांकि दोनों देशों ने इस समझौते की शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन इसके तहत एक सबसे बड़ी शर्त यह है कि यदि सऊदी अरब पर कोई भी बाहरी हमला होता है, तो उसे पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी पहले यह इशारा कर चुके हैं कि यह समझौता सऊदी अरब को अप्रत्यक्ष रूप से 'पाकिस्तान की परमाणु छत्रछाया' (Nuclear Umbrella) में ले आता है। खुफिया दस्तावेजों की मानें तो जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान अपने 80,000 सैनिकों और युद्धपोतों को भी सऊदी भेज सकता है।

ईरान संकट के बीच पाकिस्तान की दोहरी चाल

दिलचस्प बात यह है कि यह तैनाती उस समय हुई जब पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था और युद्धविराम कराने के लिए शांति वार्ता आयोजित कर रहा था। लेकिन जैसे ही वार्ता बेपटरी हुई, पाकिस्तान ने तुरंत सऊदी अरब का पक्ष लेते हुए अपनी सेनाएं उतार दीं। हालांकि, सऊदी अरब में तैनात इन पाक सैनिकों की प्राथमिक भूमिका मुख्य रूप से सलाहकार और ट्रेनिंग देने की बताई जा रही है, लेकिन ईरान से सीधा टकराव होने की स्थिति में ये सैनिक फ्रंटलाइन पर आ सकते हैं। इससे पहले भी जब सऊदी के तेल कुओं पर हमला हुआ था, तब पाकिस्तान ने तुरंत अपने जेट्स रियाद की सुरक्षा में रवाना कर दिए थे।

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