कोई इनको झूठ बोलने का नोबेल दे दो! अपनी नाकामी छिपाने के लिए भारत का नाम लेने लगे पाकिस्तानी जनरल
आर्थिक कंगाली और आंतरिक गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय फजीहत कराने का कोई मौका नहीं छोड़ता। भारतीय विदेश मंत्रालय से कई बार करारी फटकार और वैश्विक मंचों पर बेइज्जती झेलने के बावजूद पाकिस्तानी सेना के जनरलों की झूठ बोलने की आदत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अपनी चरमरा चुकी व्यवस्था, इंटेलिजेंस फेलियर और आंतरिक सुरक्षा की नाकामी को छिपाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत एक बार फिर अपना पुराना 'विक्टिम कार्ड' खेल रही है। पाकिस्तानी सेना के विवादित सैन्य प्रवक्ता और डीजी आईएसपीआर (DG ISPR) लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक बार फिर बिना किसी सबूत के भारत के खिलाफ जहर उगला है।
आटे-दाल के लिए तरस रही जनता, बलूचिस्तान और खैबर में सेना पर चौतरफा प्रहार
लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा पाकिस्तान अंदरूनी मोर्चों पर बिखरने की कगार पर पहुंच चुका है। एक तरफ जहां पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आटे, दाल, सब्सिडी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर जनता पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है, वहीं दूसरी तरफ बलूचिस्तान में दशकों के दमन और अत्याचार से आक्रोशित 'बलूच लिबरेशन आर्मी' (BLA) ने पाकिस्तानी चौकियों और सैन्य काफिलों पर आत्मघाती व घातक हमले तेज कर दिए हैं।
इसके अलावा, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) के उग्रवादियों ने पाकिस्तानी फौज की नाक में दम कर रखा है। इन चारों तरफ से घिरे गंभीर हालातों से अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तानी जनरल अब इतने बचकाने और सफेद झूठ बोल रहे हैं कि ऐसा लगता है मानो उन्हें झूठ बोलने का नोबेल पुरस्कार चाहिए।
डीजी आईएसपीआर अहमद शरीफ के दावों की खुली पोल: हमेशा की तरह एक भी सबूत नहीं
हाल ही में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पत्रकारों के सामने बिना सिर-पैर के आरोप लगाते नजर आए। उन्होंने दावा किया कि भारत पाकिस्तान के भीतर होने वाली उग्रवादी और आतंकवादी गतिविधियों की पूरी फंडिंग कर रहा है। पाक सैन्य प्रवक्ता ने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि उनके सुरक्षा बलों ने हालिया आतंकवाद विरोधी अभियानों में 54 तथाकथित "भारत-समर्थित प्रॉक्सियों" को मार गिराया है।
इतना ही नहीं, भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से घबराए जनरल ने यह मनगढ़ंत आरोप भी मढ़ दिया कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा को अस्थिर करने की बड़ी साजिश रच रही है। हालांकि, हर बार की तरह जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इन भारी-भरकम दावों पर पुख्ता सबूत मांगे, तो पाकिस्तानी सेना बगलें झांकने लगी और एक भी डिजिटल या दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
सुरक्षा चूक और इंटेलिजेंस फेलियर से ध्यान भटकाने का पुराना पाकिस्तानी पैंतरा
अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी जनरलों की यह हताशा और बौखलाहट पूरी तरह से स्वाभाविक है। पाकिस्तान के भीतर लगातार हो रहे बड़े सैन्य कैंपों पर हमले, आईएसआई (ISI) का इंटेलिजेंस फेलियर और बलूच विद्रोह को कुचलने में मिल रही लगातार असफलता के कारण पाकिस्तानी जनता का भरोसा अपनी ही सेना से पूरी तरह उठ चुका है। सेना मुख्यालय (GHQ) पर इस वक्त भारी आंतरिक दबाव है।
यही वजह है कि इस पूरी सैन्य ब्रीफिंग में जनरल अहमद शरीफ का मुख्य फोकस अपनी कमियों को सुधारने या यह बताने पर नहीं था कि आतंकी संगठन पाकिस्तान के सुरक्षित सैन्य ठिकानों में कैसे घुस रहे हैं, बल्कि उनका पूरा जोर केवल भारत के खिलाफ झूठा प्रोपेगैंडा चलाने और अपनी विफलता का ठीकरा नई दिल्ली पर फोड़ने पर रहा।