कतर से गुजरात आ रहे LNG टैंकर पर आत्मघाती ड्रोन हमला, चार भारतीय क्रू मेंबर्स की सांसें अटकीं

कतर से गुजरात आ रहे LNG टैंकर पर आत्मघाती ड्रोन हमला, चार भारतीय क्रू मेंबर्स की सांसें अटकीं

पश्चिम एशिया में शांति और कूटनीतिक सुलह की कोशिशों को मंगलवार तड़के उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' में तीन कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाकर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। इस हमले की सबसे डरावनी बात यह है कि निशाना बने जहाजों में से एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) से लदा कतर का विशाल टैंकर 'अल रेकयात' है, जो सीधे भारत के गुजरात तट की ओर आ रहा था। इस हाई-रिस्क एलएनजी टैंकर पर चार भारतीय चालक दल के सदस्य भी सवार थे, जिनकी जान इस हमले के दौरान बाल-बाल बची है।

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग इंटेलिजेंस और ब्रिटिश नौसेना के सूत्रों के अनुसार, कतर का यह गैस टैंकर हमले के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। गैस रिसाव और मलबे के कारण जहाज के भीतर भारी विस्फोट होने का गंभीर खतरा मँडरा रहा है। इसी क्षेत्र में सऊदी अरब का एक कच्चे तेल से लदा सुपर टैंकर 'वेडयान' भी इस जलप्रलय की चपेट में आकर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है।

ओमान के तट पर कतर के 'अल रेकयात' ने मांगी मदद: इंजन रूम में लगी भीषण आग

रॉयटर्स की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, यह समुद्री हमला ओमान के रणनीतिक तटीय इलाके लिमाह के समीप मंगलवार तड़के अंजाम दिया गया। गैस से लदे 'अल रेकयात' टैंकर पर जब आसमान से एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल या आत्मघाती ड्रोन आकर गिरा, तो जोरदार धमाके के साथ जहाज के मुख्य इंजन रूम में भीषण आग लग गई।

खतरे की भयावहता को देखते हुए कैप्टन ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय समुद्र में आपातकालीन डिस्ट्रेस सिग्नल भेजकर मदद की गुहार लगाई। राहत की बात यह रही कि आपातकालीन दस्तों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे जहाज पर मौजूद चारों भारतीय नागरिकों सहित पूरा चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, जहाज की तकनीकी प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है।

कतर और अमेरिका का ईरान पर सीधा शक: रिवोल्यूशनरी गार्ड की मिसाइल एक्टिविटी पर उठे सवाल

इस अप्रत्याशित और हिंसक हमले के तुरंत बाद कतर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसके लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अभी तक किसी भी विद्रोही संगठन या देश ने आधिकारिक रूप से इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन जांच के तार सीधे तेहरान से जुड़ रहे हैं।

अमेरिकी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने दावा किया है कि कल देर रात ईरान की कुख्यात 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' (IRGC) कोर ने होर्मुज जलमार्ग के बेहद करीब कई गुप्त बैलिस्टिक मिसाइलें और लंबी दूरी के ड्रोन दागे थे। भू-राजनीतिक विश्लेषक इस बात से हैरान हैं कि यह इतिहास में पहली बार हुआ है जब ईरान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु व कूटनीतिक वार्ताओं में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देश कतर के ही वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया है।

यूकेएमटीओ की पुष्टि: तीन जहाजों पर एक साथ हुआ प्रोजेक्टाइल हमला

ब्रिटिश सेना के नियंत्रण वाले 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स' (UKMTO) सेंटर ने इस समुद्री आतंकी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मंगलवार तड़के होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कुल तीन वाणिज्यिक जहाजों पर एक सोची-समझी रणनीति के तहत हमला किया गया था।

पहले जहाज को ओमान के लिमाह के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से उड़ाने की कोशिश की गई, जबकि बाकी के दो जहाजों पर अत्याधुनिक लड़ाकू ड्रोनों के जरिए क्लस्टर बम गिराए गए। यूकेएमटीओ ने स्पष्ट किया है कि इन हमलों में वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को अस्थिर करने का बड़ा प्रयास किया गया है, लेकिन किसी भी नाविक के हताहत होने या बंदी बनाए जाने की खबर नहीं है।

खामेनेई की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब: कोम की सड़कों पर लगे 'किल ट्रंप' के नारे

यह भीषण समुद्री हमला ठीक उसी समय हुआ है जब पूरे ईरान में देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शिया धार्मिक शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र कोम शहर में मंगलवार को लाखों की तादाद में काले कपड़ों में लिपटे शोक संतप्त लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

खामेनेई के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे ताबूत को एक विशेष सैन्य वाहन पर रखकर निकाला गया। इस दौरान पूरे शहर में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बेहद आक्रामक और हिंसक नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर दिखाई दिए, जिन पर अंग्रेजी और फारसी भाषा में सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को लक्षित करते हुए 'किल ट्रंप' के नारे लिखे हुए थे।

आपको बता दें कि पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसी साल 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बेहद गोपनीय और विनाशकारी हवाई हमले में हो गई थी। सुरक्षा कारणों और देश के आंतरिक हालातों के चलते उनकी मृत्यु के ठीक चार महीने बाद अब जाकर उनके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जा रही हैं। शुक्रवार से शुरू हुआ यह शोक कार्यक्रम आगामी 9 जुलाई को मशहद शहर में स्थित पवित्र इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक करने के साथ संपन्न होगा, जिसने पूरे मध्य पूर्व में युद्ध की चिंगारी को एक बार फिर भड़का दिया है।