अमेरिकी सेना में 'महा-शुद्धिकरण' से हड़कंप: 24 से ज्यादा टॉप जनरलों की अचानक छुट्टी, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के फैसलों से पेंटागन में छाया गहरा नेतृत्व संकट

अमेरिकी सेना में 'महा-शुद्धिकरण' से हड़कंप: 24 से ज्यादा टॉप जनरलों की अचानक छुट्टी, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के फैसलों से पेंटागन में छाया गहरा नेतृत्व संकट

दुनिया की सबसे शक्तिशाली समझी जाने वाली अमेरिकी सेना इन दिनों युद्ध के मैदान से बाहर अपने ही मुख्यालय 'पेंटागन' के भीतर एक अभूतपूर्व आंतरिक उठापटक और नेतृत्व संकट के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के पद संभालने के बाद से अमेरिकी सेना के शीर्ष जनरलों, कमांडरों और प्रशासनिक अधिकारियों को पद से हटाने या जबरन रिटायर करने का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसने पूरे रक्षा प्रतिष्ठान की नींव हिलाकर रख दी है। अब तक दो दर्जन से अधिक वरिष्ठ जनरलों और सैन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जा चुका है। स्थिति यह हो चुकी है कि दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच अमेरिकी थल सेना (US Army) महीनों से सीनेट द्वारा अनुमोदित किसी स्थायी चीफ ऑफ स्टाफ के बिना काम कर रही है। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के ताबड़तोड़ फैसलों ने अमेरिकी सैन्य कमान को दिशाहीनता के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

पेंटागन में 'शुद्धिकरण' और शीर्ष जनरलों की ताबड़तोड़ विदाई

अमेरिकी रक्षा मुख्यालय के भीतर चल रहे इस बदलाव को विश्लेषक एक बड़े राजनीतिक और वैचारिक शुद्धिकरण के रूप में देख रहे हैं। इस फेरबदल की शुरुआत जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल सीक्यू ब्राउन को पद से हटाए जाने के साथ हुई थी, जो अमेरिकी सेना और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय की सबसे अहम धुरी माने जाते थे। इसके बाद सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को बिना कोई ठोस प्रदर्शन-आधारित कारण बताए अचानक पद छोड़ने का निर्देश दे दिया गया। इसके अलावा, यूरोप में नाटो की पूर्वी सीमा की निगरानी कर रहे वी कॉर्प्स (V Corps) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चार्ल्स डी. कोस्टांजा, चीफ ऑफ चैपलेंस मेजर जनरल विलियम ग्रीन जूनियर और ट्रेनिंग कमांड के जनरल डेविड होडने जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी एक-एक करके बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अचानक लिए गए इन फैसलों से सेना के कैडर में भारी अविश्वास और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।

आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल का संभावित इस्तीफा और अंदरूनी कलह

पेंटागन का यह विवाद केवल सैन्य अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक और प्रशासनिक नेतृत्व के बीच भी टकराव चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिकी थल सेना के सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेदों के बाद ड्रिस्कॉल के पद छोड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के करीबी माने जाने वाले ड्रिस्कॉल ने सेना के आधुनिकीकरण और यूक्रेन कूटनीतिक वार्ताओं में अहम भूमिका निभाई थी। ड्रिस्कॉल और हेगसेथ के बीच सेना में सुधारों, बजट प्राथमिकताओं और अधिकारियों के प्रमोशन को लेकर गंभीर मतभेद रहे हैं। यदि ड्रिस्कॉल भी औपचारिक रूप से अपना पद छोड़ते हैं, तो अमेरिकी सेना के पास न तो कोई सीनेट से पुष्ट प्रशासनिक प्रमुख होगा और न ही कोई स्थायी सेना प्रमुख, जिससे सेना का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे रह जाएगा।

बिना स्थायी सेना प्रमुख के चल रही थल सेना: 'दिशाहीन' होने का खतरा

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और प्रमुख रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना का यह नेतृत्व संकट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर सस्ते ड्रोन्स और मिसाइल हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में अमेरिकी थल सेना पिछले कई महीनों से बिना किसी स्थायी सेना प्रमुख के संचालित हो रही है। जनरल रैंडी जॉर्ज को हटाए जाने के बाद जनरल क्रिस्टोफर ला नेव को केवल कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन उनकी स्थायी नियुक्ति को लेकर सीनेट में दोनों दलों के सांसदों के बीच आपत्तियां बनी हुई हैं। वरिष्ठ रणनीतिकारों का कहना है कि जब कमान संभालने वाले जनरलों को यह नहीं पता होता कि वे पद पर कितने दिन टिकेंगे, तो लंबी अवधि की रणनीतिक और सामरिक योजनाएं ठप पड़ जाती हैं।

'वोक कल्चर' बनाम पेशेवर सेना: क्या सेना का राजनीतिकरण हो रहा है?

इस पूरे संकट के केंद्र में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की वह नीति है, जिसे वे सेना से 'वोक कल्चर' (Woke Culture) और विविधता आधारित प्राथमिकताओं को खत्म करने का नाम दे रहे हैं। हेगसेथ और उनके समर्थकों का दावा है कि पूर्ववर्ती प्रशासनों के दौरान सेना की युद्धक क्षमता (लेथैलिटी) पर ध्यान देने के बजाय सामाजिक नीतियों और विविधता पर जरूरत से ज्यादा जोर दिया गया, जिससे सेना कमजोर हुई। वहीं दूसरी तरफ, पूर्व सैन्य अधिकारियों और आलोचकों का आरोप है कि रक्षा मंत्रालय अब सेना के दशकों पुराने गैर-राजनीतिक स्वरूप को नष्ट कर रहा है। आरोप हैं कि योग्यता और युद्ध अनुभव के बजाय व्यक्तिगत वफादारी और वैचारिक झुकाव को पदोन्नति का पैमाना बनाया जा रहा है। हाल ही में प्रमोशन लिस्ट से कुछ वरिष्ठ महिला और अश्वेत अधिकारियों के नाम हटाने को लेकर भी पेंटागन में तीखा विवाद देखा गया था।

वैश्विक तनावों और युद्ध के मोर्चों पर इस संकट का सीधा असर

अमेरिकी सेना की कमान में फैली इस अनिश्चितता का असर वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की आक्रामक सैन्य मुद्रा जैसे कई मोर्चे एक साथ सक्रिय हैं। अमेरिकी सेना पारंपरिक रूप से नाटो और अपने वैश्विक साझेदार देशों को सुरक्षा की गारंटी देती रही है। लेकिन जब अमेरिकी सेना के शीर्ष जनरलों को ही अचानक हटाया जा रहा हो और सहयोगी देशों को यह स्पष्ट न हो कि पेंटागन में अंतिम फैसला कौन ले रहा है, तो इससे अमेरिका के वैश्विक सहयोगियों का भरोसा डगमगाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के खालीपन का फायदा विरोधी ताकतें उठा सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।

संस्थागत स्थिरता और अमेरिकी सैन्य परंपराओं के सामने नई चुनौती

अमेरिकी संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेना को हमेशा एक निष्पक्ष और गैर-दलीय संस्था के रूप में देखा गया है। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी देश की सेना के पेशेवर नेतृत्व में राजनीतिक दखलंदाजी अत्यधिक बढ़ जाती है, तो संस्थागत अनुशासन और मनोबल कमजोर होता है। अमेरिकी संसद की रक्षा समितियों में भी अब इस बात को लेकर आवाजें उठने लगी हैं कि पेंटागन में चल रही इस उठापटक पर तत्काल रोक लगाई जाए। रिटायर हो चुके दर्जनों फोर-स्टार जनरलों ने चेतावनी दी है कि यदि अनुभवी और युद्ध-परीक्षित जनरलों को यूं ही मनमाने ढंग से हटाया जाता रहा, तो भविष्य में सेना की निर्णय लेने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होगी। अमेरिकी सेना के लिए यह दौर केवल एक प्रशासनिक संकट नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी स्वायत्तता और पेशेवर गरिमा को बचाए रखने की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।