‘वाह क्या बात कही है’: RSS चीफ मोहन भागवत के विचारों के मुरीद हुए ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन, लंदन में 100 से ज्यादा हिंदू संगठनों ने किया भव्य स्वागत

‘वाह क्या बात कही है’: RSS चीफ मोहन भागवत के विचारों के मुरीद हुए ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन, लंदन में 100 से ज्यादा हिंदू संगठनों ने किया भव्य स्वागत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत अपनी तीन देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा के अंतिम और निर्णायक चरण के तहत ब्रिटेन की राजधानी लंदन पहुंच चुके हैं। संघ के शताब्दी वर्ष (Centenary Year) के उपलक्ष्य में आयोजित इस वैश्विक संपर्क अभियान के तहत इससे पहले उन्होंने अमेरिका और कनाडा के विभिन्न शहरों का दौरा किया था। लंदन पहुंचने पर भारतीय प्रवासियों और स्थानीय समुदाय के बीच उनका अभूतपूर्व स्वागत किया गया है। ब्रिटिश संसद से लेकर भारतीय समुदाय के बीच इस यात्रा की गूंज साफ तौर पर सुनाई दे रही है, जहां कंजरवेटिव पार्टी के वरिष्ठ सांसद बॉब ब्लैकमैन ने संघ प्रमुख के विचारों की खुले तौर पर प्रशंसा करते हुए उन्हें अपना समर्थन दिया है।

ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने की तारीफ और साझा किए विचार

ब्रिटेन के कंजर्वेटिव पार्टी के दिग्गज और पांच बार के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मोहन भागवत के साथ अपनी मुलाकात और उनके संबोधन का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लिखा कि उन्हें आज शाम आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा संगठन के भविष्य के लिए रखे गए विचारों और दूरदर्शी सोच को सुनने का अवसर मिला, जो बेहद प्रेरणादायक है। ब्रिटिश सांसद की इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कैसे वैश्विक स्तर पर संघ के विचारों को एक नई और परिपक्व स्वीकार्यता मिल रही है। जानकारों का मानना है कि भागवत का यह दौरा भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखने का एक बड़ा माध्यम बन रहा है।

यूनाइटेड किंगडम में 100 से अधिक हिंदू संगठनों का संयुक्त समर्थन

लंदन आगमन पर मोहन भागवत का स्वागत करने के लिए ब्रिटेन के कोने-कोने से हिंदू और सामुदायिक संगठन आगे आए। 'हिंदू काउंसिल यूके', 'हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन', 'हिंदू स्वयंसेवक संघ यूके' और 'इनसाइट यूके' समेत 100 से अधिक प्रमुख संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर संघ प्रमुख के इस दौरे का पुरजोर स्वागत किया है। इन संगठनों ने अपने आधिकारिक बयान में आरएसएस को दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन करार देते हुए कहा कि यह संस्था समाज में चरित्र निर्माण, नेतृत्व विकास, सामाजिक एकजुटता और वैश्विक बंधुत्व को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही, संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर डॉ. भागवत के नेतृत्व में शुरू किए गए 'पांच प्रमुख परिवर्तनों'—सामाजिक सद्भाव, परिवार की संस्था का संरक्षण, निस्वार्थ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन—की भी खुले दिल से सराहना की गई है।

अमेरिका के बाद ब्रिटेन में भी राजनीतिक और वैचारिक सरगर्मी

मोहन भागवत का यह अंतरराष्ट्रीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में उनके न्यूयॉर्क और मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन के कार्यक्रम को लेकर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विरोध देखने को मिला था। अमेरिकी आयोग (USCIRF) और कुछ डेमोक्रेट नेताओं की आपत्तियों के बाद अब ब्रिटेन में भी छिटपुट विरोध के स्वर उठे हैं। ब्रिटेन की भारतीय मूल की सांसद नादिया व्हिटोम ने ब्रिटिश संसद के गृह कार्यालय के समक्ष यह सवाल उठाया था कि क्या सरकार ने इस दौरे के आव्रजन नियमों और चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों के तहत पूरी जांच की है। इन सवालों का जवाब देते हुए ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने संसद में स्पष्ट किया कि देश की आव्रजन नीतियां और सुरक्षा मानक सभी विदेशी आगंतुकों पर समान रूप से लागू होते हैं और सरकार किसी भी प्रकार के द्वेषपूर्ण या हिंसक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क व प्रतिबद्ध है।

वैश्विक मंच पर संघ के संवाद और राष्ट्रवाद की गूंज

अपने इस व्यापक दौरे के दौरान मोहन भागवत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि भारत से बाहर रहने वाले प्रवासियों का अपने 'कर्म भूमि' के प्रति पूरी निष्ठा के साथ कर्तव्य निभाना सर्वोपरि है। उन्होंने अमेरिका और कनाडा के सत्रों में यह भी स्पष्ट किया था कि विविधता में एकता ही भारत के मूल डीएनए में रची-ब बसी है और किसी भी सभ्य समाज में वैचारिक भिन्नताओं का सम्मान होना चाहिए। लंदन में मिल रहे इस व्यापक समर्थन और ब्रिटिश सांसदों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि वैचारिक विरोधों के बावजूद दुनिया भर में भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों से जुड़े इस बड़े अभियान का प्रभाव गहरा हो रहा है। आने वाले दिनों में ब्रिटेन के भारतीय समुदाय के साथ संघ प्रमुख की होने वाली बैठकें और भी कई महत्वपूर्ण संदेश देने वाली साबित हो सकती हैं।