गोल्ड बॉन्ड निवेशकों की खुली लॉटरी: आरबीआई के रिडेम्पशन रेट से मिला 275% से ज्यादा का बंपर रिटर्न, 1 लाख लगाने वालों को मिले पौने 4 लाख
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना के तहत निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के लिए बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय बैंक द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज VI के समय पूर्व रिडेम्पशन (Premature Redemption) के लिए आधिकारिक निकासी मूल्य घोषित कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद से ही वित्तीय बाजारों और सोने में रुचि रखने वाले निवेशकों के बीच उत्साह की लहर दौड़ गई है। रिजर्व बैंक ने इस सीरीज के लिए रिडेम्पशन दर 14,213 रुपये प्रति यूनिट (प्रति ग्राम) निर्धारित की है। जब यह बॉन्ड अक्टूबर 2019 में आम जनता के लिए जारी किया गया था, तब इसका भाव आज के मुकाबले एक-चौथाई से भी कम था। सात वर्षों के इस सफर में सोने की वैश्विक और घरेलू कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी का सीधा और भरपूर फायदा उन निवेशकों को मिला है जिन्होंने पारंपरिक आभूषणों या सोने की ईंटों के बजाय सरकार की इस डिजिटल गोल्ड योजना पर भरोसा जताया था।
त्योहारी और शादियों के मौसम में जब देश भर में सोने की मांग चरम पर है, तब इस रिडेम्पशन ने निवेशकों के चेहरों पर चमक बिखेर दी है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे प्रमुख सर्राफा व्यापारिक केंद्रों में निवेशकों द्वारा इस भारी रिटर्न की जमकर चर्चा की जा रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी गारंटी के साथ बिना किसी मेकिंग चार्ज या चोरी के डर के इतना भारी रिटर्न मिलना किसी भी सुरक्षित निवेश माध्यम के लिए एक ऐतिहासिक मिसाल है।
₹3,785 का निवेश बना ₹14,213: जानिए 1 लाख रुपये का निवेश कैसे बना पौने चार लाख
अगर आप इस निवेश के वित्तीय गणित को बारीकी से समझेंगे, तो आपको अंदाजा होगा कि लंबी अवधि के लिए सोने में सही तरीके से किया गया निवेश कितना फायदेमंद साबित हो सकता है। अक्टूबर 2019 में जब भारत सरकार की ओर से आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज VI का सब्सक्रिप्शन खोला था, तब इसकी शुरुआती निर्गम कीमत (Issue Price) 3,835 रुपये प्रति ग्राम रखी गई थी। वहीं, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन आवेदन करने वाले जागरूक निवेशकों को सरकार की ओर से 50 रुपये प्रति ग्राम की विशेष छूट दी गई थी, जिससे उनके लिए शुद्ध खरीद मूल्य मात्र 3,785 रुपये प्रति ग्राम रह गया था।
अब आरबीआई द्वारा तय की गई 14,213 रुपये प्रति ग्राम की रिडेम्पशन कीमत के आधार पर गणना करें, तो ऑनलाइन निवेशकों को शुद्ध रूप से प्रति ग्राम 10,428 रुपये का भारी पूंजीगत लाभ (Capital Gain) प्राप्त हुआ है। यह लाभ मूल खरीद मूल्य पर 275.5 प्रतिशत से अधिक का संपूर्ण एब्सोल्यूट रिटर्न दर्शाता है। आसान शब्दों में समझें तो यदि किसी निवेशक ने अक्टूबर 2019 में इस सीरीज में 1,00,000 रुपये का निवेश किया था, तो उसके निवेश का वर्तमान मूल्य बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के बढ़कर लगभग 3,75,500 रुपये से अधिक हो चुका है। इसके अलावा, इस पूरी अवधि के दौरान निवेशकों को उनके मूल निवेश पर सालाना 2.50 प्रतिशत की दर से हर छह महीने में मिलने वाला ब्याज भी प्राप्त हुआ है, जिसे जोड़ने पर समग्र मुनाफा 290 प्रतिशत के स्तर को भी पार कर जाता है।
कैसे तय की गई रिडेम्पशन कीमत? आईबीजेए के सोने के भाव का पारदर्शी गणित समझें
कई निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि केंद्रीय बैंक किसी भी गोल्ड बॉन्ड की रिडेम्पशन कीमत किस आधार पर तय करता है। इसके लिए एक बेहद पारदर्शी और सख्त वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है। नियमों के अनुसार, रिडेम्पशन की देय तारीख से ठीक पहले के तीन कारोबारी दिनों में 999 शुद्धता (24 कैरेट) वाले सोने के औसत बंद भाव को इसका आधार बनाया जाता है। इस मूल्यांकन के लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा दैनिक रूप से प्रकाशित सोने के रेट्स को अधिकृत माना जाता है।
SGB 2019-20 सीरीज VI के मामले में, रिडेम्पशन की तारीख से ठीक पहले के तीन कारोबारी सत्रों यानी 27 अक्टूबर, 28 अक्टूबर और 29 अक्टूबर के 24 कैरेट सोने के क्लोजिंग रेट्स का अंकगणितीय औसत निकाला गया। इस तीन दिवसीय औसत के आधार पर ही 14,213 रुपये प्रति ग्राम की दर अंतिम रूप से तय की गई। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी प्रकार की बिचौलिया कटौती या अस्पष्ट कटौती की कोई गुंजाइश नहीं होती। निवेशकों को देश के शीर्ष बुलियन एसोसिएशन के प्रमाणित भाव के अनुसार पाई-पाई का पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाता है।
खाते में सीधे क्रेडिट होगी रकम: प्रीमैच्योर रिडेम्पशन और निकासी की पूरी प्रक्रिया
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कुल परिपक्वता अवधि (Maturity Period) आठ वर्ष की होती है। हालांकि, नियमों के अनुसार निवेशकों को निवेश के 5 वर्ष पूरे होने के बाद हर छमाही ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले बाहर निकलने (Premature Exit) का विकल्प प्रदान किया जाता है। 2019 में जारी हुए इस बॉन्ड ने अपने सफल पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं, जिसके चलते आरबीआई ने निवेशकों को यह निकासी विंडो प्रदान की है।
जिन निवेशकों ने अपने बैंकों, डाकघरों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) या आरबीआई रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के माध्यम से सीधे आवेदन किया था, उनके बॉन्ड का रिडेम्पशन मूल्य सीधे उनके पंजीकृत बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ECS) या एनईएफटी के माध्यम से जमा कर दिया जाएगा। वहीं जिन निवेशकों के पास ये बॉन्ड डीमैट फॉर्म में सुरक्षित हैं, उन्हें अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (Zerodha, Groww, ICICI Direct आदि) के माध्यम से रिडेम्पशन का दावा करने या द्वितीयक बाजार (स्टॉक एक्सचेंज) पर वर्तमान भाव पर बेचने की सुविधा प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में किसी भी भौतिक सोने को संभालने, जांच कराने या काटने-घिसने की झंझट बिल्कुल नहीं होती।
क्या इस भारी मुनाफे पर लगेगा टैक्स? जानिए एसजीबी के आयकर से जुड़े नियम
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को भारतीय कर प्रणाली में सबसे पसंदीदा निवेश उपकरणों में से एक माना जाता है, लेकिन इसके टैक्स नियमों की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है। आयकर अधिनियम के नियमों के अनुसार, यदि कोई मूल निवेशक (Primary Allottee) सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को उसकी 8 वर्ष की पूर्ण परिपक्वता (Maturity) तक बनाए रखता है, तो उसे मिलने वाला संपूर्ण पूंजीगत लाभ (Capital Gains) 100 प्रतिशत कर-मुक्त (Tax-Free) होता है।
हालांकि, जब कोई निवेशक 5 वर्ष की लॉक-इन अवधि के बाद आरबीआई द्वारा दी गई प्रीमैच्योर रिडेम्पशन विंडो के तहत पैसा निकालता है, तो कर नियमों के अनुसार उसे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) के दायरे में देखा जाता है। बजट के नए कर प्रावधानों के तहत सूचीबद्ध प्रतिभूतियों पर 12.5 प्रतिशत की दर से बिना इंडेक्सेशन लाभ के एलटीसीजी लागू होता है। वहीं, बॉन्ड पर हर छह महीने में मिलने वाला 2.50 प्रतिशत का सालाना ब्याज निवेशक की अन्य स्रोतों से होने वाली आय (Income from Other Sources) में जुड़ता है और उस पर निवेशक के संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार आयकर देय होता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने रिटर्न दाखिल करते समय अपने वित्तीय सलाहकार से सटीक टैक्स देनदारी की गणना अवश्य करा लें।
फिजिकल सोने से क्यों मीलों आगे निकला पेपर गोल्ड? निवेशकों का बदलता मिजाज
यह बंपर मुनाफा एक बार फिर साबित करता है कि लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण के लिए पारंपरिक भौतिक सोने के मुकाबले पेपर गोल्ड या डिजिटल गोल्ड बॉन्ड कहीं अधिक समझदारी भरा विकल्प हैं। जब कोई व्यक्ति बाजार से सोने के जेवर, सिक्के या गिन्नी खरीदता है, तो उसे 3 प्रतिशत जीएसटी का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा, आभूषणों पर 8 से 20 प्रतिशत तक का भारी मेकिंग चार्ज लगता है जो बेचने के समय पूरी तरह डूब जाता है। साथ ही घर में सोना रखने पर लॉकर का वार्षिक किराया और सुरक्षा की निरंतर चिंता बनी रहती है।
इसके विपरीत, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में न कोई मेकिंग चार्ज लगता है, न जीएसटी लगता है और न ही शुद्धता को लेकर कोई संदेह रहता है। 1 ग्राम की कीमत पर पूरा 1 ग्राम 24 कैरेट का भाव मिलता है और ऊपर से हर साल 2.50 प्रतिशत का निश्चित सरकारी ब्याज भी खाते में आता है। उत्तर भारत के पारंपरिक बाजारों से लेकर दक्षिण भारत के आभूषण केंद्रों तक अब मध्यमवर्गीय परिवारों और युवा वेतनभोगी वर्ग में डिजिटल गोल्ड और एसजीबी के प्रति आकर्षण कई गुना बढ़ चुका है।
आगे क्या करें निवेशक? भविष्य के लिए सोने में निवेश की सटीक रणनीति
हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी के चलते पीली धातु की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। भारत में 24 कैरेट सोने के दाम ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छूते हुए 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में पहुंच चुके हैं। ऐसे में जो निवेशक एसजीबी के आगामी सीरीजों में निवेशित हैं या नए अवसरों की तलाश में हैं, उनके लिए यह स्पष्ट संदेश है कि सोने को हमेशा अपने वित्तीय पोर्टफोलियो के एक सुरक्षा कवच (Hedge) के रूप में देखना चाहिए।
वित्तीय विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी निवेशक को अपनी कुल वित्तीय संपत्ति का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा हमेशा सोने में निवेशित रखना चाहिए। जो निवेशक 2019-20 की इस सीरीज में बने हुए हैं, यदि उन्हें तत्काल नकदी की आवश्यकता नहीं है, तो वे अगले वर्ष आने वाली 8 साल की पूर्ण परिपक्वता तक रुकने का विकल्प भी चुन सकते हैं ताकि उन्हें पूर्ण कर-मुक्ति का लाभ मिल सके। वहीं जिन्हें अपने जीवन के किसी लक्ष्य, घर की डाउनपेमेंट या बच्चों की शिक्षा के लिए पूंजी की आवश्यकता है, उनके लिए 275 प्रतिशत से अधिक का यह मुनाफा भुनाने का यह सबसे स्वर्णिम अवसर साबित हुआ है।