रिटेल पेट्रोल पंपों पर ₹40 तक सस्ता हुआ डीजल! भारी भीड़ के बाद कंपनियों ने बिक्री पर लगाई लिमिट
देश के ऊर्जा और फ्यूल रिटेल सेक्टर में इन दिनों एक हैरान करने वाली स्थिति देखने को मिल रही है। अमूमन जब कोई बड़ी फैक्ट्री, मॉल, अस्पताल या लॉजिस्टिक्स कंपनी थोक (Bulk) में ईंधन खरीदती है, तो उसे फुटकर दरों के मुकाबले सस्ता दाम मिलता है। लेकिन मौजूदा समय में यह समीकरण पूरी तरह उलट चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई संकट के चलते बल्क डीजल और आम पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले रिटेल डीजल के भाव में करीब ₹40 प्रति लीटर तक का भारी अंतर आ गया है।
थोक डीजल के मुकाबले आम पेट्रोल पंपों पर मिलने वाला डीजल लगभग 40 रुपये सस्ता होने के कारण औद्योगिक और बड़े वाणिज्यिक ग्राहकों ने थोक सप्लाई छोड़कर सीधे पेट्रोल पंपों से तेल खरीदना शुरू कर दिया है। इससे आम जनता और सामान्य गाड़ियों के लिए बने पेट्रोल पंपों पर डीजल के स्टॉक पर भारी दबाव बन गया है। इस अचानक बढ़े दबाव और किल्लत के जोखिम से निपटने के लिए निजी तेल विपणन कंपनियों ने डीजल की खरीद पर सख्त सीमा (Rationing/Cap) तय कर दी है।
₹40 का भारी अंतर: क्यों सस्ता हुआ पेट्रोल पंपों का डीजल?
इस बड़े अंतर के पीछे भारत में ईंधन के मूल्य निर्धारण (Pricing Mechanism) का ढांचा है:
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बल्क डीजल की कीमतें: औद्योगिक इकाइयों, मॉल, डेटा सेंटर्स, रेलवे और बैकअप डीजल जेनरेटर (DG Sets) चलाने वाले बड़े ग्राहकों को जो थोक में डीजल मिलता है, उसकी कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स के वैश्विक बाजार भाव से जुड़ी होती हैं। हालिया वैश्विक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल के दाम तेजी से बढ़े, जिसके चलते बल्क डीजल काफी महंगा हो गया।
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रिटेल पेट्रोल पंपों के दाम: आम नागरिकों, किसानों और ट्रांसपोर्टर्स को महंगाई से राहत देने के लिए देश के खुदरा पेट्रोल पंपों पर कीमतों को स्थिर रखा गया है।
इस स्थिति के चलते पेट्रोल पंपों पर बिकने वाला डीजल खुले बाजार के थोक डीजल की तुलना में 35 से 40 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो गया।
पेट्रोल पंपों पर ट्रकों और ड्रमों में भरने लगा ईंधन
इतना भारी अंतर देखकर बड़े औद्योगिक खरीदारों और कमर्शियल वाहन ऑपरेटरों ने अपने डेडिकेटेड टैंकर मंगाने के बजाय अपने नजदीकी पेट्रोल पंपों का रुख कर लिया। कई जगहों पर फैक्ट्रियों और जेनरेटरों के लिए 400 से 600 लीटर तक डीजल ड्रमों और गाड़ियों में भरकर ले जाया जाने लगा।
नतीजा यह हुआ कि आम दोपहिया, चार पहिया और स्थानीय वाहनों के लिए बने पेट्रोल पंपों पर दैनिक स्टॉक समय से पहले ही खत्म होने लगा। खासकर निजी कंपनियों के पंपों पर भारी लोड बढ़ गया, जिसके चलते उन्हें ईंधन की राशनिंग लागू करने पर मजबूर होना पड़ा।
Jio-bp और Nayara Energy ने लगाई डीजल खरीद पर लिमिट
पंपों पर ड्राई-आउट (ईंधन खत्म होने) की स्थिति से बचने और नियमित ग्राहकों को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निजी रिटेलर्स ने कैपिंग नियम लागू किए हैं:
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जियो-बीपी (Jio-bp): कई आउटलेट्स पर एक बार में प्रति वाहन अधिकतम 50 लीटर तक ही डीजल देने की सीमा तय की गई है। इसके अतिरिक्त, कुछ पंपों पर पूरे दिन की कुल डीजल बिक्री के लिए भी 6,000 लीटर जैसी दैनिक लिमिट निर्धारित की गई है ताकि इन्वेंट्री बनी रहे।
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नायरा एनर्जी (Nayara Energy): कंपनी के पेट्रोल पंपों पर विभिन्न क्षेत्रों और मांग के आधार पर प्रति वाहन 70 लीटर से लेकर 200 लीटर तक की सीमा तय की गई है।
क्या सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) भी लगाएंगी पाबंदी?
देश के लगभग 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप नेटवर्क का संचालन सरकारी तेल विपणन कंपनियां—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) करती हैं।
फिलहाल सरकारी पेट्रोल पंपों पर ऐसी कोई आधिकारिक पाबंदी या कोटा लागू नहीं किया गया है। लेकिन अगर निजी पंपों पर लिमिट लगने के बाद सभी बड़े बल्क खरीदार और लंबी दूरी के ट्रक सरकारी पंपों की ओर शिफ्ट होते हैं, तो सरकारी कंपनियों के नेटवर्क पर भी इन्वेंट्री का भारी दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय और उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक, यदि मांग इसी तरह असामान्य बनी रही, तो सरकारी कंपनियां भी थोक में ड्रमों या अत्यधिक मात्रा में डीजल भरने पर निगरानी और सीमा तय करने पर विचार कर सकती हैं।